उपचुनाव में अपनों की नाराजगी न पड़ जाए भारी, अनदेखी से कांग्रेस विधायकों के तीखे तेवर

-भरत सिंह के बाद अब विधायक संयम संयम लोढ़ा का भी सरकार पर निशाना, सरकार में सुनवाई नहीं होने को लेकर पूर्व में कई विधायक भी लगा चुके हैं आरोप

By: firoz shaifi

Published: 05 Apr 2021, 11:31 AM IST

जयपुर। प्रदेश की 3 सीटों पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस के विधायकों की नाराजगी ही सत्ता और संगठन को भारी पड़ सकती है। पार्टी में एक के बाद एक कई विधायकों की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। सचिन पायलट कैंप के विधायकों के साथ-साथ अब गहलोत कैंप के विधायक भी सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक भरत सिंह कुंदनपुर जहां एक बार फिर खान मंत्री प्रमोद जैन भाया को भ्रष्टाचार का मुखिया बताया है तो वहीं बीते कई दिनों से कांग्रेस समर्थित और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले संयम लोढ़ा भी इशारों-इशारो में सरकार पर निशाना साध चुके हैं।

ऐसा पहली बार नहीं है जब वरिष्ठ विधायक भरत सिंह ने खान मंत्री प्रमोद जैन भाया को लेकर निशाना साधा हो, इससे पहले भी भरत सिंह खान मंत्री प्रमोद जैन भाया के कथित भ्रष्टाचार के मामले को लेकर मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिख चुके हैं।

नाराजगी ना पड़ जाए भारी
सूत्रों की माने तो उपचुनाव के बीच जिस तरह से कांग्रेस के विधायक अपनी सरकार को निशाने पर ले रहे हैं उससे कहीं ना कहीं चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जानकारों की माने तो कल उदयपुर पहुंचने के बाद प्रदेश प्रभारी अजय माकन कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों से व्यक्तिगत मुलाकात कर उनकी नाराजगी दूर करने का प्रयास कर सकते हैं।

गहलोत कैंप के इन विधायकों ने उठाए सवाल
दरअसल सियासी संकट के बीच सरकार का साथ मजबूती से देने विधायकों ने भी सरकार में अपनी अनदेखी और काम नहीं होने की शिकायतों को लेकर सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया था।


संयम लोढ़ा
कांग्रेस समर्थित और मुख्यमंत्री गहलोत के करीबी माने जाने वाले विधायक संयम लोढ़ा ने भी आज ट्वीट करके सरकार पर निशाना साधा है। लोढ़ा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि 'गुनाहगार को इस कदर गले लगा के माफ किया उसने,कि बेगुनाह भी चिल्ला उठे हम भी गुनाहगार है'। इससे पहले भी संयम लोढ़ा घूस के बदले अस्मत मांगने वाले आरपीएस अधिकारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं।

इंदिरा मीणा
कांग्रेस की बामनवास से विधायक इंदिरा मीणा ने अपनी सरकार के मंत्रियों पर भेदभाव के आरोप लगाते हुए पीसीसी चीफ और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा पर सवाल खड़े किए थे और आरोप लगाते हुए कहा था कि जनता की समस्याओं को बताने के लिए कितनी बार मंत्री के बंगले पर आना पड़ेगा, उनकी चिट्ठियों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है।

बाबूलाल बैरवा
कांग्रेस से कठूमर से विधायक बाबूलाल बैरवा ने अपनी सरकार मंत्रियों पर दलित विरोधी होने के आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के मान मनोवल पर बैरवा को राजी किया गया था।


अमीन खां

वही हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अमीन खान ने भी सरकार में अनदेखी होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि शिक्षा मंत्री विधायकों की बात ही नहीं सुनते और उन्हें डांट फटकार कर भगा देते हैं।

भरत सिंह कुंदनपुर
कांग्रेस से सांगोत से विधायक भरत सिंह लगातार सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर मुखर है। उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चिट्ठी लिखकर सरकार से एक कैबिनेट मंत्री को बर्खास्त करने तक की मांग कर डाली थी। भरत सिंह कई बार विधानसभा सत्र में सरकार को भी घेर चुके हैं।

रामनारायण मीणा
वहीं वरिष्ठ विधायक राम मीणा भी विधानसभा सत्र के दौरान अपनी सरकार के मंत्रियों को कई बार सवालों में घेर चुके हैं।

पायलट कैंप के विधायकों ने लगाए थे भेदभाव के आरोप
वहीं दूसरी ओर सचिन पायलट कैंप के भी कई विधायकों ने सरकार में भेदभाव के आरोप लगाए थे। विधानसभा सत्र में अपनी सीट पर माइक की व्यवस्था नहीं होने से उखड़े विधायक रमेश मीणा ने अपनी सरकार पर एससी- एसटी और माइनॉरिटी विधायकों के साथ भेदभाव के आरोप लगाए थे और कहा था कि एससी-एसटी और माइनॉरिटी के विधायकों के साथ सरकार में भेदभाव किया जाता है, उनके काम नहीं किए जाते हैं। ना ही उन्हें सदन में बोलने दिया जाता है, जबकि राज्य की कांग्रेस सरकार एससी-एसटी और मॉइनोरिटी के दम पर बनी है। मुरारी मीणा और वेद प्रकाश सोलंकी ने भी रमेश मीणा के सुर में सुर मिलाए थे।

सरकार को घेरने वाले विधायकों को नहीं मिली स्टार प्रचारकों में जगह
इधर सदन के अंदर और बाहर सरकार को घेरने वाले विधायकों को स्टार प्रचारकों की सूची में जगह नहीं मिल पाई थी, इसे लेकर भी पार्टी में अंदरखाने लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है।

firoz shaifi Desk
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