Congress.हर निकाय का अलग बनेगा घोषणा पत्र

Congress.हर निकाय का अलग बनेगा घोषणा पत्र
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Rahul Singh | Updated: 06 Oct 2019, 01:09:40 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

प्रदेश में होने वाले स्थानीय निकायों के चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस अलग अलग घोषणा पत्र बनाने जा रही है।

जयपुर 6 अक्टूबर
प्रदेश में होने वाले स्थानीय निकायों के चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस अलग अलग घोषणा पत्र बनाने जा रही है। इसके जरिए जनता को बताया जाएगा कि कांग्रेस का बोर्ड बनने पर कौन कौन से प्रोजेक्ट आएंगे और कौनसे नए विकास के काम करवाए जाएंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस जल्द ही इन घोषणा पत्रों के लिए अलग अलग समितियां बनाएगी जिसमें जिला स्तर और बाकी के नेता शामिल होंगे जो इन घोषणा पत्र को तैयार करवाएंगे। प्रदेश में नवंबर में 52 स्थानीय निकायों के चुनाव होने है और इसके कार्यक्रम की घोषणा इसी माह हो जाएगी।
ये जिला स्तरीय घोषणा पत्र समिति ये देखेगी कि सम्बन्धित निकाय में कौनसे बड़ेे प्रोजेक्ट लंबित है और कौनसे प्रोजेक्ट शुरू कराए जा सकते है। इसके लिए नेताओं से सुझाव लिए जाएंगे और इस आधार पर घोषणा पत्र बनेगा। इसके पीछे कांग्रेस यह सोच रही है कि ये चुनाव लोकल है इसलिए मुददे भी लोकल होंगे तो जनता कांग्रेस को वोट दे सकेगी चुनाव के लिए वार्ड आरक्षण की लॉटरी निकल चुकी है जबकि मेयर, सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव को लेकर राज्य सरकार अभी असमंजस में है। असमंजस इस बात का है कि चुनाव किस तरह से कराएं जाए। प्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार आई तो उन्होंने अपने घोषणा पत्र के वादे के अनुसार यह निर्णय किया कि निकाय प्रमुख का चुनाव सीधे जनता ही करेगी। इसके लिए लाटरी निकलने ही वाली थी कि इससे पहले ही पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस नेताओं की बैठक में पार्टी के सामने ये फीडबैक आया था कि कांग्रेस यदि निकाय प्रमुखों के चुनाव जनता के जरिए कराएगी तो पार्टी को नुकसान होगा। नेताओं ने इसकी वजह ये बताई थी कि कश्मीर में आर्टिकल 370 को हटाने के बाद इन चुनावों में भाजपा को फायदा मिल सकता है। इसलिए पार्षदों के जरिए मेयर का चुनाव कराया जाना चाहिए। वहीं भाजपा पहले ये एलान भी कर चुकी है कि वो निकाय चुनाव में 370 को मुख्य मुददा बनाएगी। कांग्रेस नेताओं की ओर से मांग उठाए जाने के बाद कांग्रेस सरकार ने एक स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में एक समिति बना दी थी और यह समिति सभी नेताओं से फीडबैक ले चुकी है। वैसे फीडबैक में कुछ नेताओं ने सीधे चुनाव कराने की वकालत भी की है और इसके पीछे तर्क दिया हैं कि 2009 में जब सीधे जनता ने सीधे चुनाव किया था तो कांग्रेस को फायदा मिला था और अधिकांश निकायों में कांग्रेस के प्रमुख चुने गए थे। धारीवाल की समिति सारे पहलुओं को देख रही है स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल जल्द ही अपनी रिपोर्ट सीएम अशोक गहलोत को सौंप देंगे और रिपोर्ट के आधार पर गहलोत फैसला करेंगे कि मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव जनता के जरिए कराएं या पार्षदों के जरिए कराया जाए। सूत्रों के अनुसार धारीवाल ने अपनी रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली हैं।
अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं होने की वजह से राज्य निर्वाचन आयोग और स्वायत्त शासन विभाग भी इसकी लॉटरी को लेकर कुछ तय नहीं कर पा रहा है , हालांकि दोनों ने अपनी चुनाव से जुडी प्रक्रिया को जरूर जारी रखा हुआ है ताकि जैसे ही स्थिति साफ हो उसके अनुसार अगली कार्यवाही की जा सके।

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