दिल्ली में चुनाव लड़ने से पीछे हट रहे हैं कांग्रेस के दिग्गज

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी, वहीं कांग्रेस और भाजपा में अभी भी मंथन चल रहा है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली में फिर से अपने मजबूती से पांव जमाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाना चाहता है, लेकिन ये नेता चुनाव लड़ने के लिए राजी नहीं है।

जयपुर

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी, वहीं कांग्रेस और भाजपा में अभी भी मंथन चल रहा है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली में फिर से अपने मजबूती से पांव जमाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाना चाहता है, लेकिन ये नेता चुनाव लड़ने के लिए राजी नहीं है।
कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार पिछले पांच साल में आम आदमी पार्टी की सरकार की ओर से लागू की गई योजनाओं के जरिए आप ने वहां अपना जमीनी पकड़ को मजबूत किया है, वहीं भाजपा का आक्रामक रूख और नरेन्द्र मोदी फैक्टर को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता परेशान है। उनका मानना है कि ऐसे हालात में दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीतना अभी आसान नहीं है। इसलिए दिग्गज नेता इस चुनाव लड़ने से पीछे हट रहे हैं। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर पार्टी की खोई प्रतिष्ठा को पुन: बहाल करने के लिए एडी से चोटी तक का जोर लगा रहा है।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के कई नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद टिकट के निर्धारण को लेकर भी माथापच्ची बढ़ गई है। पार्टी नहीं चाहती कि टिकटों के ऐलान के बाद भी कुछ और लोग पाला बदल लें। संभावना है कि एक दो दिन में पार्टी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर देगी।

गौरतलब है कि सोनिया गांधी ने सोमवार को 10 जनपथ स्थित निवास पर प्रदेश कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई थी जिसमे पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, पूर्व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली, पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया और पूर्व संसदीय सचिव नसीब सिंह आदि शामिल हुए थे। इस बैठक में चुनाव प्रत्याशियों के साथ ही पूरी एकजुटता से चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति पर मंथन किया गया था


चौहान की कांग्रेस में वापसी के संकेत
शीला सरकार में मंत्री रहे राजकुमार चौहान बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं। वे लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। चौहान ने दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा के साथ सोनिया गांधी से आधे घंटे मुलाकात की है। इसके बाद से उनके कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा शुरू हो गई। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राजकुमार चौहान कांग्रेस में शामिल होकर मंगोलपुरी सीट से एक बार फिर चुनावी ताल ठोक सकते हैं। वे चार बार विधायक रहे हैं और शीला सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। 2013 और 2015 के विधानसभा चुनाव में हारने के बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था।

Prakash Kumawat Desk
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