कन्जर्वेशन रिजर्व को लग रहा ग्रहण

बीसलपुर बांध के निकटवर्ती सहित देवली व टोडारायसिंह क्षेत्र में फैले आरक्षित वन क्षेत्र में कन्जर्वेशन रिजर्व के तहत बनने वाले अभयारण्य के लिए इस साल भी बजट प्रस्तावित नहीं किए जाने से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपए की योजना को ग्रहण लग रहा है।

By: Abhishek sharma

Published: 01 Apr 2016, 11:46 PM IST

बीसलपुर बांध के निकटवर्ती सहित देवली व टोडारायसिंह क्षेत्र में फैले आरक्षित वन क्षेत्र में कन्जर्वेशन रिजर्व के तहत बनने वाले अभयारण्य के लिए इस साल भी बजट प्रस्तावित नहीं किए जाने से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपए की योजना को ग्रहण लग रहा है। इसके साथ ही जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीदों पर भी पानी फिर रहा है। योजना के तहत कराए जाने वाले कामों को हरी झण्डी नहीं मिलने से क्षेत्र के लोगों में मायूसी है।
दशकों से फाइलों में अटके पड़े कई कार्य
उल्लेखनीय है कि बीसलपुर बांध बनने के दौरान वन क्षेत्र का काफी हिस्सा बांध व विकसित की गई कॉलोनी में चला गया। इससे शर्त के अनुसार बीसलपुर बांध परियोजना की ओर से वन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 3.50 करोड़ रुपए वन विभाग के खाते में जमा कराए गए। विकास कार्यों के लिए वन विभाग की ओर से वर्षों पहले सर्वे रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेज दी गई। विभाग की अनदेखी के चलते सर्वे रिपोर्ट में कमी छोड़ देने से एक दशक से ये कार्य फाइलों में अटके हैं। हालांकि सर्वे रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने लगभग आठ साल पहले अधिसूचना जारी कर वन अधिनियम की धारा 36-ए के उपबन्धों के तहत टोडारायसिंह के 36.67 वर्ग किलोमीटर, देवली उपखण्ड के राजमहल, बीसलपुर  में 11.64 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र को बीसलपुर कन्जर्वेशन रिजर्व के नाम से अभयारण्य घोषित कर दिया था, लेकिन लम्बा समय गुजर जाने के बाद भी विभाग की ओर से केवल रेंज कार्यालय व बैरियर ही बनवाए गए।   
रिजर्व के तहत घोषित क्षेत्र
बीसलपुर कन्जर्वेशन रिजर्व के तहत जारी अधिसूचना में टोडारायसिंह क्षेत्र के पश्चिमी सीमा में थड़ोली, डूब क्षेत्र बीसलपुर, उत्तरी सीमा में आरक्षित वन खण्ड में करीबी गांव, टोडारायसिंह का उत्तरी हिस्सा, दक्षिणी सीमा में टोडारायसिंह वन क्षेत्र का दक्षिणी हिस्सा, पूर्वी सीमा में नजदीकी गांव बगड़ी, बस्सी, सालग्यावास, रामपुरा व बोटून्दा वन क्षेत्र है।
यह भी शामिल
देवली उपखण्ड के राजमहल, बीसलपुर वन क्षेत्र की पूर्वी सीमा में वन खण्ड राजमहल एवं आरक्षित वन खण्ड माताजी रावता गांव की पहाड़ी की पूर्वी वन सीमा, पश्चिमी सीमा में आरक्षित वन पातलिया की पहाड़ी, रक्षित वन क्षेत्र में राजमहल की पश्चिमी सीमा, डूब क्षेत्र में बीसलपुर बांध की उत्तरी सीमा, राजमहल पातलिया की डूंगरी, दक्षिण में माताजी का रावता, राजमहल, ककोडिय़ा की पहाड़ी की दक्षिणी सीमा को कन्जर्वेशन रिजर्व क्षेत्र घोषित किया गया था।
इन्हें छोडऩा है
योजना के तहत होने वाले कार्यों के दौरान वन क्षेत्र में आने वाली बीसलपुर बांध की नहरें, बनास नदी का राजस्व हिस्सा, सार्वजनिक स्थान, मन्दिर, सड़कें, धर्मशालाएं, बिजली की लाइनें, बीसलपुर बांध आदि अभयारण्य में शामिल नहीं होंगे। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वन्य जीवों की सुविधाओं के साथ-साथ पर्यटकों के मनोरंजन के लिए एनिकट, कच्ची सड़कें (ट्रेकिंग रूट), वॉच टावर, बैरियर, लाइट व्यवस्था, वन चौकियां, पौधारोपण आदि होना है, लेकिन ये सभी काम फाइलों में अटके पड़े है।
प्रस्ताव फिर से भेजेंगे
सरकार को पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुए। इसमें फिर से संशोधन कर अप्रेल तक भिजवाने का प्रयास करेंगे। इससे जल्द ही कार्य को हरी झण्डी मिल सके।
वी. के. प्रधान, उपवन संरक्षक, टोंक

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