बिना स्वीकृति तोड़े सरकारी बजट के निर्माण


नियमानुसार गलत पर जिम्मेदार मौन

By: Rakhi Hajela

Published: 14 Jun 2020, 03:06 PM IST

सिरोही सरकारी बजट से बना कोई भवन तय समयावधि से पहले अनुपयोगी होने के बाद भी नहीं तोड़ा जा सकता है। प्रशासन की स्वीकृति से नियमानुसार हटाया जाता है। इसके विपरीत सिरोही जिले के मंडार कस्बे में जवाबदारों ने पानी की टंकी, नाले, परकोटा आदि जेसीबी से धराशायी कर सम्पत्ति को नुकसान पहुंचा दिया। प्रशासनिक अधिकारी जानकारी होने के बाद भी चुप्पी साधे हुए हैं।
जानकारी के अनुसार 2002.03 में सरपंच विपिन जैन ने घटते जल स्तर के कारण रियासतकालीन खारीवाव में मोटर लगाकर सीमेंट टंकी से पेयजल सुविधा मुहैया करवाई थी। उस दौरान डेढ़ लाख रुपए का खर्च आया था। टंकी को कुछ समय पूर्व जेसीबी से धराशायी कर दिया। उस दौरान सरपंच ने बालिका विद्यालय, रेबारियों का गोलुआ में कुओं के पास टंकी बनाकर पंचायत को सुपुर्द की थी। इतना ही नहीं सरकारी धन से बनवाई गई पानी की टंकी को भी तोड़ दिया गया, जिसे ढाई दशक पूर्व तत्कालीन सरपंच मुन्नीदेवी अग्रवाल ने भील बस्ती क्षेत्र में बनवाया था।
पूर्व सरपंच राजाराम कोली के कार्यकाल में इन्द्रा कॉलोनी से सोरड़ा सड़क तक पंचम राज्य वित्त आयोग योजना में पांच लाख रुपए से नाले का निर्माण करवाया था जो पिछले दिनों तोड़ दिया। पंचायत के पुराने भवन व आरआई क्वार्टर के बीच के परकोटे को भी प्रशासन की बिना स्वीकृति के तोड़कर सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। सरपंच परबत सिंह देवड़ा का कहना है कि टंकी भील बस्ती की थी इसलिए उनके कहने पर हटाई है। तोडऩे की स्वीकृति की बात आप ग्राम विकास अधिकारी को पूछो। वहीं इस संबंध में ग्राम विकास अधिकारी रतनसिंह देवड़ा का कहना है कि भील बस्ती में टंकी व नाले को तोडऩे की कोई जानकारी नहीं है। न ही तोडऩे की कोई स्वीकृति है। वैसे इसे तोडऩा गलत है।

Rakhi Hajela Desk
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