पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में डमी परीक्षार्थी बिठाकर नकल करने वाला गिरोह पकड़ा

गिरोह का मुख्य सरगना सरकारी स्कूल व्याख्याता और शिक्षक

By: Lalit Tiwari

Updated: 17 Sep 2021, 06:26 PM IST

ब्रह्मपुरी थाना पुलिस ने पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में डमी परीक्षार्थी बिठाकर नकल करने वाला गिरोह पकड़ लिया। पुलिस ने इस मामले में तीन फर्जी परीक्षार्थी और एक मूल अभ्यर्थी तथा दलाल सहित आठ व्यक्तियों को हिरासत में लिया हैं। गिरोह का मुख्य सरगना सरकारी स्कूल का व्याख्याता और शिक्षक हैं। आरोपी मूल अभ्यार्थियों के आधार कार्ड और फोटो को कांट छाटकर तैयार किए गए दस्तावेज और आठ हजार रुपए बरामद किए हैं।
डीसीपी (उत्तर) परिस देशमुख ने बताया कि 15 सितंबर को आरपीएससी की ओर से आयोजित पुलिस उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा में पुलिस थाना ब्रह्मपुरी क्षेत्र में स्थित परीक्षा केन्द्र ध्रुब बाल निकेतन सी.सै. स्कूल में फर्जी अभ्यर्थी बन परीक्षा देने आए युवक से पूछताछ की गई। पुलिस ने पुलिस उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा के मूल अभ्यर्थी के स्थान पर फर्जी डमी परीक्षार्थी बिठाकर नकल कराने वाले हाई प्रोफाइल गिरोह का भंडाफोड कर तीन फर्जी परीक्षार्थी और एक मूल अभ्यर्थी और चार दलाल सहित आठ जनों को हिरासत में लिया हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से मूल अभ्यार्थियों के आधार कार्ड, कूटरचित दस्तावेज और आठ हजार रुपए बरामद किए हैं। गिरोह में मुख्य सरगना नेतराम मीणा (स्कूल व्याख्याता, खण्डार, स.मा) और सहयोगी भंवर लाल सरकारी शिक्षक (बाडमेर) तथा विभिन्न् प्रतियोगी परीक्षाओं में तैयारी करने वाले व्यक्ति शामिल हैं। पूछताछ में गिरोह ने 8 अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थी बिठाकर मूल अभ्यर्थियों से 1.8 लाख रुपए बतौर एडंवास लेना बताया हैं।
इस तरह करते है वारदात-
पुलिस ने बताया कि गिरोह का मुख्य सरगना नेतराम मीणा करौली सवाई माधोपुर, धौलपुर, दौसा के अभ्यर्थियों से सम्पर्क कर उनकी जगह फर्जी परीक्षार्थी बिठाता था। गिरोह के अन्य सदस्यों की सहायता से मूल अभ्यर्थियों के आधार कार्ड और फोटो को कम्प्यूटर तकनीक के माध्यम से कांट छांटकर डमी अभ्यर्थियों की फोटो लगाकर कूटरचित आधार कार्ड तैयार कर उनकी जगह बिठाता था। जिसकी एवज में 18 से 22 लाख रुपए लिए जाते थे। जिसमें से 5 लाख रुपए परीक्षार्थी (डमी) को 5 लाख, मध्यस्थ को 10 से 12 लाख रुपए स्वयं रखता था। डमी परीक्षार्थी द्वारा पेपर देने के पश्चात, पेपर बुक और ओएमआर शीट मध्यस्थ के माध्यम से मुख्य सरगना नेतराम को पहुंचाई। नेतराम ने पेपरबुक और ओएमआर शीट बतौर सबूत मूल अभ्यार्थी को दी जाती थी और आंसर की जारी होने के बाद मिलान होने पर मूल अभ्यार्थी द्वारा तय राशि का पूरा भुगतान नेतराम को कर दिया जाता था।

Lalit Tiwari Desk
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