खौफ के दौर से गुजरी राजस्थान की 8.5 लाख प्रसूताएं, लॉकडाउन में कई निजी अस्पतालों ने प्रसव से ही कर दिया इनकार

कोरोना काल के छह महीने प्रसूताओं पर पड़े भारी..... राजस्थान पत्रिका संवाददाता ने जाना प्रसूताओं का दर्द

अब अनलॉक में भी संक्रमण के डर से अस्पताल जाने से डर रही प्रसूताएं
हजारों को आसानी से नहीं मिला पलंग, प्रसव के लिए भर्ती करने से पहले असंक्रमित का प्रमाण पत्र भी मांग रहे अस्पताल

By: Vikas Jain

Updated: 26 Sep 2020, 12:02 PM IST

हजारों हुई संक्रमित, 100 गुना बढ़ा प्रसुताओं का दर्द

विकास जैन

जयपुर। कोरोना काल के दौरान प्रदेश में करीब 2 लाख से अधिक प्रसूताओं को प्रसव से पहले अस्पताल में जगह हासिल करने और खौफ के माहौल में यहां से वहां चक्कर लगाने पर मजबूर होना पड़ा है। लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में कई निजी अस्पतालों ने सामान्य प्रसूताओं को भी आसानी से जगह नहीं दी और प्रसव कराने से इनकार ही कर दिया। ऐसी प्रसूताओं में वे भी शामिल हैं, जो पहले से किसी अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की देखरेख में चल रही थी।

राजस्थान पत्रिका संवाददाता ने प्रसूताओं के दर्द की पड़ताल की तो सामने आया कि उन्हें लॉकडाउन और अनलॉक दोनों में ही भारी परेशानी रही। इस पूरे काल में भय का माहौल शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों की महिलाओं में बना हुआ है।

करीब 8.5 लाख प्रसव प्रदेश और सवा करोड़ भारत में

प्रदेश में मार्च से अब तक छह माह के दौरान करीब 8.5 लाख प्रसव और करीब इतने ही शिशुओं के जन्म लेने का अनुमान है। प्रदेश में सालाना करीब 17 लाख जीवित शिशु जन्म लेते हैं। अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि के दौरान भारत में करीब सवा करोड़ प्रसव हुए हैं।

मातृ मृत्यु दर पर विपरीत असर की आशंका

सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे के मुताबिक प्रदेश की मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर इस समय करीब 180 के करीब है। जो कि पहले से ही देश में बेहतर स्थिति में नहीं है और निचले पायदान वाले राज्यों में ही शामिल है। शिशु मृत्यु दर के लिहाज से भी प्रदेश में स्थितियां अच्छी नहीं है, प्रदेश में एक साल तक के बच्चों की मौत का प्रति वर्ष आंकड़ा करीब 70 हजार है। आशंका है कि इस साल कोविड काल में स्थितियां और बिगड़ सकती है।

डॉक्टर को खुद सताया संक्रमण का डर, नहीं करवाया प्रसव

अजमेर जिले की प्रसूता का प्रसव लॉकडाउन के दौरान ही होना था। उनके पहला प्रसव था और एक बड़े निजी अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की देखरेख में चल रही थी। लेकिन लॉकडाउन के दौरान कोरोना का भय स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ को खुद को सताने लगा और महिला को प्रसव के लिए दूसरी जगह जाने की सलाह दे दी। इसके बाद भय के माहौल में महिला को सरकारी अस्पताल में ही प्रसव कराना पड़ा।

मजबूरन जाना पड़ा कोविड अस्पताल में

जयपुर शहर के चारदीवारी क्षेत्र की प्रसूता को कोरोना था ही नहीं, लेकिन इस पूरे क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया था। उस समय प्रशासन ने व्यवस्था ऐसी कर दी कि इस कंटेनमेंट जोन की प्रसूता का प्रसव कोविड डेडिकेटड महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट में ही होगा। जबकि यहां पहले से ही कोरोना संक्रमित प्रसूताएं थी। मजबूरन प्रसूता और परिवारजन डरते डरते वहां गए और प्रसव करवाया। बाद में वह नेगेटिव ही मिली।

अस्पताल में भर्ती होने के बाद संक्रमित हो गई

जयपुर शहर के एक निजी अस्पताल में हाल ही में अनलॉक के दौरान प्रसूता ने शिशु को जन्म दिया। वह भर्ती हुई तब नेगेटिव थी, लेकिन अस्पताल में रहने के दौरान पॉजिटिव पाई गई। प्रसूता को बाद में कोविड डेडिकेटेड अस्पताल महिला चिकित्सालय जाना पड़ा।

संदिग्धों के लिए तो कई ने व्यवस्था ही नहीं की

सामान्य प्रसव कराने वाले कई निजी अस्पतालों ने तो इमरजेंसी प्रसव की व्यवस्था ही नहीं की और प्रसूता को पहले ही सलाह दे दी गई कि वे नेगेटिव रिपोर्ट लेकर ही आएं। यहां संदिग्ध यानि सैंपल लेने की तो व्यवस्था थी ही नहीं।

प्रदेश में गांवों तक नहीं होते प्रसव

इस समय प्रदेश की स्थिति ऐसी है कि गांवों ढाणियों और यहा तक की 20 हजार से अधिक आबादी वाले कई कस्बों में भी स्तरीय प्रसव की सुविधाएं नहीं है। कई जगह निजी अस्पताल हैं ही नहीं हैं, सरकारी अस्पताल हैं तो स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में इनके लिए कोरोना काल दोगुनी चुनौती के रूप में सामने आया।

डरें नहीं, सुरक्षात्मक उपाय अपनाकर प्रसव सुविधाओं का उपयोग लें

प्रसूताओं को अलग सुरक्षित व संक्रमण रहित माहौल में रखा जाए
समय समय पर जरूरी चेकअप करवाते रहें, मास्क लगाएं
अपने नियमित विशेषज्ञ से समय समय पर टेली कंसल्टेंसिंग या अन्य माध्यम से परामर्श लेते रहें
आहार का विशेष ध्यान रखें
घर में भी अन्य सदस्यों के कम से कम संपर्क में आएं
प्रसव तारीख से पहले ही अपनी कोविड व अन्य आवश्यक जांचें जरूर करवा लें
इस समय कोविड डेडिकेटेड अस्पतालों में सरकारी स्तर पर और निजी अस्पतालों में भी सुरक्षित प्रसव की सुविधा है

डॉ.विमला जैन, पूर्व अधीक्षक, महिला चिकित्सालय, सांगानेरी गेट जयपुर के अनुसार

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प्रसव के समय प्रसूताओं को भारी परेशानियां हुई। कई निजी अस्पतालों ने तो भर्ती करने से ही इनकार कर दिया, इस तरह के मामले होने के बाद भी राज्य सरकार ने उन पर कोई ठोस कार्यवाही की नहीं, जो कि दुखद है। अब अनलॉक के समय प्रसूताओं को किसी तरह की समस्या नहीं आए, वे बेखौफ होकर स्वस्थ शिशु को जन्म दे सके, इस तरह के माकूल इंतजाम राज्य सरकार को करने चाहिए।

सुमन शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान महिला आयोग

Vikas Jain Reporting
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