पहले कोरोना ने रुलाया, अब सिस्टम और सरकार 50 लाख मुआवजे के लिए परिजनों के टपका रहे आंसू

राज्य के 250 से ज्यादा सरकारी कार्मिकों और अधिकारियों के परिजन महीनों बाद भी सरकार से लगाए बैठे आस

— राज्य की मांग पर केन्द्र ने किया सरलीकरण तो अब तक 94 हेल्थ वॉरियर को मिल चुका 50 लाख का कोविड बीमा, अब 11 शेष
— राज्य सरकार से मुआवजा पाने के लिए 250 से ज्यादा सरकारी कार्मिक कोविड मृतकों के परिजन हो रहे दरबदर

By: Vikas Jain

Published: 11 Sep 2021, 07:09 PM IST

विकास जैन

जयपुर. कोविड की पहली और दूसरी लहर के दौरान कोविड से अपनी जान गंवा देने वाले 250 से ज्यादा सरकारी कार्मिकों के परिजन सरकार की लालफीताशाही और संवेदनहीनता के कारण 50 लाख बीमा के लिए दरबदर हो रहे हैं। इन परिजनों को पहले कोरोना ने अपनों के गम ने रुलाया तो अब सरकार के कागजों में घूम रही मुआवजे की पत्रावलियां इन्हें रुला रही हैं। ये सभी कार्मिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य विभागों के कार्मिक हैं, जिन्हें राज्य सरकार ने यह बीमा देने की घोषणा की थी। चिकित्सा कार्मिकों को केन्द्र ने पहले ही इस बीमा के दायरे में ले लिया था।

पूरे मामले की पड़ताल में सामने आया कि राज्य सरकार के बार बार आग्रह के बाद केन्द्र ने चिकित्सा कार्मिकों के बीमा की प्रक्रिया का सरलीकरण किया तो अब तक चिन्हित 105 में से 94 चिकित्सा कार्मिक यह बीमा राशि प्राप्त कर चुके हैं। 6 कार्मिकों की प्रक्रिया विभिन्न जिला कलक्टरों के पास लंबित है तो शेष की केन्द्र सरकार के स्तर पर लंबित हैं। जबकि पत्रिका की पड़ताल में दूसरे विभागों के 268 कार्मिक व अधिकारी सामने आ चुके हैं, जिनके परिजन मुआवजे की आस अब भी लगाए बैठे हैं।

राज्य ने आगे बढ़कर की थी घोषणा

दरअसल, देश में पहली लहर के दौरान ही केन्द्र सरकार ने कोविड में जान गंवाने वाले चि कित्सा कार्मिकों को 50 लाख बीमा के दायरे में लिया था। उसके बाद राजस्थान में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आगे बढ़कर संवेदनशीलता दिखाते हुए अन्य विभागों के कार्मिकों को भी इतनी राशि की आर्थिक सहायता के दायरे में लाने की घोषणा अप्रेल 2020 में ही कर दी थी। राज्य सरकार ने इसे ऐसे अन्य कर्मचारियों के लिए भी बढ़ाया था, जो कोरोना वायरस ऑपरेशन का हिस्सा थे। इनमें अनुबंध के आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को शामिल किया गया था।

शिक्षा विभाग...120 शिक्षकों की मौत, किसी को नहीं मिला मुआवजा

कोरोना काल के दौरान 120 शिक्षकों की मौत कोविड से हो चुकी है, लेकिन इनमें से मुआवजा अब तक किसी को नहीं मिला है।


बिजली कंपनियों के 118 कार्मिकों की मौत, मुआवजे की प्रक्रिया बातचीत तक ही सीमित

जयपुर विद्युत वितरण निगम, अजमेर विद्युत वितरण निगम, जोधपुर विद्युत वितरण निगम, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम और राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम में कार्यरत 118 कर्मचारियों और अधिकारियों की मृत्यु हुई। लेकिन सरकार ने इन्हें अभी तक कोरोना वॉरियर्स भी नहीं माना है। पांचों विद्युत कंपनियों की ओर से इस मामले में सरकार से बातचीत चल रही है। सरकार से बातचीत की जिम्मेदारी विद्युत प्रसारण निगम के वित्त निदेशक को दी गई है।

परिवहन और रोडवेज में 10 की मौत..मुआवजा किसी को नहीं

परिवहन विभाग में 2 की मौत हुई। एक को 50 लाख का मुआवजा दिया जाना है, लेकिन उसे भी अभी तक नहीं मिला है और प्रकियाधीन है। दूसरा प्रोग्रामर था, जिनकी गृह विभाग में डयूटी थी तो उनकी फाइल वहां भेजी गई है। रोडवेज में 8 कर्मचारियों की मौत हुई। लेकिन तकनीकी कारणों में उलझा किसी को भी मुआवजा नहीं दिया गया।

जलदाय के 8 फील्ड वर्करों की मौत, वॉरियर माना ही नहीं

कोरोना काल में जलदाय विभाग के इंजीनियर्स, पंप हाउस कर्मी व विभाग के तकनीकी कर्मचारियों ने फील्ड वर्क किया। इनमें 8 इंजीनियर व कर्मचारियों की कोरोना से मौत हुई। इनके लिए राशि देने के लिए जलदाय विभाग की ओर से वित्त विभाग को पत्र लिखा गया। लेकिन वित्त विभाग ने इन्हें कोरोना वारियर ही नहीं माना और पत्र को परीक्षण के लिए रख लिया।

पंचायतीराज के 12 की कार्मिकों की मौत, घूम रही पत्रावलियां

पंचायती राज विभाग में 12 ग्राम विकास अधिकारी और 2 सहायक विकास अधिकारियों की कोरोना से मौत के बाद मुआवजे के दावे अब तक भी लंबित हैं। ग्राम विकास अधिकारी संघ लंबे समय से इसकी मांग कर रहा है, लेकिन परिजनों को राहत नहीं मिल पाई है।

पहले केन्द्र से भी हुुए दरबदर, राज्य ने मांग की तो मिला बीमा

चौंकाने वाली बात यह है कि चिकित्सा के कार्मिकों को केन्द्र की घोषणा के बाद बीमा मिलने में बड़ी परेशानियां आई। तब राज्य सरकार ने ही केन्द्र से इसके सरलीकरण का आग्रह किया तो बीमा मिलना शुरू हुआ, लेकिन राज्य में यह प्रक्रिया अब तक भी सरल ही नहीं हो पाई है।

Vikas Jain Reporting
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