जांच मशीनें ठीक करने का सरकारी खर्चा सालाना 20 करोड़, फिर भी अस्पतालों में मशीनें लंबे समय तक खराब

— मशीनें लंबे समय तक खराब रहने से मरीजों की कट रही जेब, निजी जांच केन्द्रों की चांदी
— चिकित्सा विभाग में ई उपकरण के जरिये निजी कंपनी को मशीनें ठीक करने का ठेका
— मेडिकल कॉलेज अब तक योजना में शामिल ही नहीं, छोटे अस्पतालों में भी समय पर ठीक नहीं हो रही रही मशीनें

By: Vikas Jain

Updated: 13 Sep 2021, 10:16 AM IST

विकास जैन

जयपुर. प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज से जुड़ी जांच मशीनों की खराबी को अधिकतम सात दिन में ठीक करने के लिए राज्य सरकार सालाना 20 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। लेकिन इसके बावजूद छोटे और बड़े अस्पतालों में जांच मशीनें सात दिन से अधिक समय तक भी ठीक नहीं हो पा रही हैं। विभाग ने करीब पांच साल पहले ई उपकरण पर इन्द्राज के जरिये इन मशीनों को तय समय पर ठीक करने का ठेका शुरू किया था। तब से अब तक एक ही कंपनी यह काम लगातार देख रही है।

राजस्थान पत्रिका ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में जांच मशीनों की खराबी की समस्या की पड़ताल की तो सामने आया कि मेडिकल कॉलेज से लेकर निचले स्तर तक के अस्पतालों में मशीनें लंबे समय तक खराब पड़ी रहती हैं। मशीनें अधिक दिनों तक खराब रहने के कारण मरीजों को निजी जांच केन्द्रों पर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब कट रही है, वहीं निजी केन्द्रों की चांदी हो रही है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2016 में शुरू हुई ई उपकरण व्यवस्था के बाद हाल ही में इसका नया ठेका भी करने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन कोविड के नाम पर उसे भी रोक दिया गया। ई उपकरण का संचालन राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरशन (आरएमएससील) के जरिये किया जाता है।

मेडिकल कॉलेजों में हजारों मरीजों, वो तो अभी शामिल ही नहीं

हैरत की बात यह है कि सालाना 20 करोड़ रुपए तक का खर्चा होने के बावजूद अभी तक मेडिकल कॉलेजों को तो इसमें जोड़ा ही नहीं गया है। अब नए ठेके में इसे जोड़े जाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कोविड के नाम पर उस प्रक्रिया को भी रोक दिया गया है। जबकि मेडिकल कॉलेजों को जोड़ने जाने पर हजारों मरीजों को इसका फायदा मिलता है। इस समय प्रदेश के सरकारी तंत्र में सर्वाधिक भार सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर ही है।

रामगंजमंडी..10 दिन से सीबीसी, एक माह से एक्सरे मशीन बंद

कोटा जिले के रामगंजमंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में 10 दिन पहले सीबीसी जांच मशीन का मदर बोर्ड जल गया, लेकिन सुधार नही हुआ। मरीजों को निजी लैब में जांच के लिए जाना पड़ रहा है। इसी सीएचसी पर एक माह से तकनीकी कारण से एक्सरे जांच मशीन बंद हैं।

जोधपुर...दो माह तक खराब रही एक्सरे मशीन

जोधपुर के चौपासनी सैटेलाइट अस्पताल में दो माह तक एक्सरे मशीन खराब रही, जयपुर से मिस्त्री ने हाल में आकर सही की।

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ईईजी मशीन 2 महीने तक रही खराब, बाहर देने पड़े 3 हजार रुपए तक

एसएमएस अस्पताल जयपुर में वीडियो ईईजी जांच मशीत करीब दो महीने से खराब है। जिससे ओपीडी मे आने वाले मरीजों की जांच नहीं हो पाई। जिसके कारण 600 रूपए में होने वाली जांच के बाहर 3 हजार रूपए तक देने पड़े। पत्रिका ने इसको लेकर मुद्दा उठाया, जिसके बाद मशीनें ठीक हो गई।

4 माह बाद ठीक हुई मशीनें

एसएमएस के न्यूरोलॉजी विभाग में दो डिजिटल ईईजी जांच मशीन भी खराब पड़ी थी। जिसे करीब चार से पांच वर्ष बीत चुके थे। ऐसे में एक से ही काम चला रहे थे और लंबी वेटिंग मिलती थी।

अजमेर..8 माह से एक्सरे मशीन खराब

जेएलएन अस्प्ताल अजमेर में 8 माह से एक्सरे मशीन खराब है। हार्ट अटैक के मरीजों के अस्पताल के दूसरे छोर सड़क पार कर जांच के लिए ले जाया जा रहा है। कुछ मरीज निजी केन्द्रों से जांच करवा कर मरीज को भर्ती करवाते हैं। कार्डियोलॉजी विभाग में कैथलैब में तकनीकी खराबी होने पर करीब चार माह तक मरीज परेशान रहे। इसके चलते निजी अस्पताल व सेन्टर पर एंजियोग्राफी करवाने को मजबूर होना पड़ा।

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ई उपकरण के जरिये तय समय पर मशीनें ठीक नहीं होने पर स्वत: ही पेनल्टी की व्यवस्था है। 2016 के बाद अभी तक एक ही कंपनी केटीपीएल के पास इसका ठेका है। कुछ समय पहले नई प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन कोविड के कारण यह संभव नहीं हो पाया। क्योंकि एक कंपनी से दूसरी के पास जाने के बाद करीब तीन महीने तक का समय टेक ओवर में लगता है। मेडिकल कॉलेज ई उपकरण व्यवस्था में अभी तक शामिल नहीं थे, अब नए टेंडर में उन्हें भी शामिल करने की तैयारी चल रही है।
प्रेमसिंह, राज्य नोडल अधिकारी, ई उपकरण

Vikas Jain Reporting
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