Textile industry : कपड़ा उद्योग को नए ऑर्डर का इंतजार

कोरोना वायरस ( Corona virus ) के कारण कपड़े ( clothes ) की मांग में आई जोरदार गिरावट के कारण देश के कपड़ा उद्योग ( Textile industry ) पर संकट के बादल मंडराने लग गए है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि उद्योग में जल्द रिवकरी के आसार नहीं दिख रहे हैं। नया ऑर्डर नहीं मिलने से परेशानी बढ़ती जा रही है। मजदूरों के पलायन से भी गार्मेंट व अपेरल कारोबारियों ( garment and apparel businessmen ) को बड़ा झटका लगा है।

By: Narendra Kumar Solanki

Published: 26 Jun 2020, 01:30 PM IST

जयपुर। कोरोना वायरस के कारण कपड़े की मांग में आई जोरदार गिरावट के कारण देश के कपड़ा उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लग गए है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि उद्योग में जल्द रिवकरी के आसार नहीं दिख रहे हैं। नया ऑर्डर नहीं मिलने से परेशानी बढ़ती जा रही है। मजदूरों के पलायन से भी गार्मेंट व अपेरल कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है।
गार्मेंट की प्रमुख औद्योगिक नगरी भीलवाड़ा के कपड़ा कारोबारियों को इस समय मजदूरों और कारीगरों से ज्यादा नए ऑर्डर का इंतजार है। उनका कहना है कि ऑर्डर मिलेंगे तो मजदूर भी मिल जाएंगे और कारीगर भी आ जाएंगे। रेडीमेड गार्मेंट कारोबारी का कहना है कि न तो नया ऑर्डर मिल रहा है और न ही पहले की उधारी ही वसूल हो रही है, जिससे उनकी माली हालत बहुत खराब हो गई है।
सोशल मूवमेंट घटना भी बना वजह
दरअसल, कोरोना के प्रकोप के कारण लोगों का सोशल मूवमेंट नहीं हो रहा है, इसलिए उनको नये कपड़े खरीदने की आवश्यकता नहीं हो रही है। कोरोना काल में वस्त्र परिधान की ग्राहकी सुस्त पड़ जाने के कारण कोई रिटेलर नया ऑर्डर देने का जोखिम नहीं उठा रहा है। कारोबारियों की माने तो पहले के मुकाबले रेडीमेट गार्मेंट की बिक्री 80 फीसदी घट गई है। दूसरा बड़ा कारण कोरोना संक्रमण का फैलाव तेजी से हो रहा है, जिससे फिलहाल ग्राहकों ने बाजार से अपना रूख मोड़ लिया है। हौजरी व रेडीमेड गार्मेंट की बिक्री पहले के मुकाबले महज 20 फीसदी रह गई है। रिटेल व्यापारियों का कहना है कि पहले बचा हुआ स्टॉक निकालेंगे तभी नया ऑर्डर देंगे। इस समय लोग महज अंडर गार्मेंट या बहुत जरूरी होने पर ही कपड़े खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के चलते गर्मी के सीजन की खरीदारी प्रभावित रही है।

श्रमिकों से बड़ी बिक्री की समस्या
फैक्टरियों में काम चलेगा तो मजदूर व कारीगर खुद लौट आएंगे। इसलिए श्रमिकों की समस्या उतनी बड़ी नहीं है जितनी बिक्री में आई गिरावट है। इस समय रेडीमेड गार्मेंट में न तो घरेलू मांग है और न निर्यात मांग। कारोबारी दुकान खोलते हैं लेकिन ग्राहक नहीं होने की वजह से जल्द ही बंद कर देते हैं। देश में कृषि के बाद सबसे रोजगार देने वाला अगर कोई क्षेत्र है तो वह वस्त्र व परिधान का उद्योग है, जिसमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। इस तरह कपड़ा उद्योग के बेपटरी होने से भारी तादाद में श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं।

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Narendra Kumar Solanki Desk
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