अंतिम संस्कार में नहीं आते तो ये निभाते जिम्मेदारी

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By: Avinash Bakolia

Published: 31 May 2020, 10:25 AM IST

जयपुर. कोरोना महामारी के कारण प्रदेश में मौतों का आंकड़ा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में अब तक 185 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी हैं वहीं जयपुर में 89 लोग कोरोना का शिकार हो चुके हैं। कई मामलों में परिजन अपनों के दाह संस्कार में शामिल नहीं होते। अस्पताल प्रशासन को ही नगर निगम, पुलिस के साथ मिलकर प्रोटोकॉल अपनाते हुए अंतिम संस्कार करवाना पड़ता है। इसके अलावा जयपुर के बाहर के कोरोना पॉजिटिव मरीजों के शव का भी अंतिम संस्कार यहीं किया जा रहा है।
एसएमएस अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार कई बार परिजन कोरोना संक्रमण फैलने के डर से शव को अपने साथ नहीं ले जाते। इसके अलावा कोरोना पॉजिटिव मरीज के परिजन खुद क्वॉरंटीन होते हैं, तो ऐसी स्थिति में शव का अंतिम संस्कार कौन करे।
एसएमएस अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. डी.एस. मीणा ने बताया कि सीकर और अलवर के मामले में ऐसा ही हुआ था। सीकर के नीम का थाना में एक युवक की कोरोना से मौत हो गई थी। वह एचआइवी पॉजिटिव भी था। कुछ परिजन अस्पताल में क्वॉरंटीन थे। कुछ परिजनों को फोन पर इसकी सूचना दी, लेकिन उन्होंने शव गांव ले जाने से मना कर दिया। परिजनों को डर था कहीं गांव में संक्रमण न फैल जाए। इसलिए नगर निगम और प्रशासन की मदद से अंतिम संस्कार करवाया।

प्रशासन ने नहीं दी अनुमति तो यहीं करना पड़ा अंतिम संस्कार
चिकित्सकों ने बताया कि कई बार दूसरे राज्य के मरीज की मौत पर शव को वहां भेजने में काफी परेशानी होती है। दूसरे राज्य के प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने पर मजबूरन कोरोना पॉजिटिव मरीज के शव का अंतिम संस्कार यहीं करवाना पड़ा। आगरा निवासी एक मरीज की कोरोना से मौत हो गई थी। उसके भाई और पिता दोनों क्वॉरंटीन में थे। बाद में एक जने की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई। परिजनों ने पहले तो जयपुर में ही दाह संस्कार करने को कहा। अस्पताल प्रशासन ने जिला प्रशासन से इसकी अनुमति ले ली। बाद में परिजनों ने दाह संस्कार के लिए मना कर दिया और शव को आगरा भेजने को कहा। चिकित्सकों ने बताया कि तीन-चार दिन अनुमति के चक्कर शव मुर्दाघर में ही रखा रहा। आगरा के प्रशासन ने शव को वहां ले जाने की अनुमति नहीं दी। मजबूरन जयपुर में ही अंतिम संस्कार किया गया।

डिब्बों में बंद अस्थियां, विसर्जन का इंतजार

श्रीनाथ गोशाला चेरिटेबल ट्रस्ट ने कोरोना से हो रही मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार का जिम्मा उठा रखा है। ट्रस्ट के सचिव राजेन्द्र सारा ने बताया कि जयपुर से बाहर के लोगों की कोरोना से मृत्यु के बाद आदर्श नगर श्मशान घाट में ही अंतिम संस्कार किया जाता है। अब तक 35 का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। इनमें से 13 लोगों के परिजन अस्थियां ले गए। 22 जनों की अस्थियां अभी भी बाकी है। सभी को अस्थियां ले जाने के लिए सम्पर्क किया जा रहा है। इसके अलावा एसएमएस मुर्दाघर के सुपरवाइजर विष्णु गुर्जर ने बताया कि दुर्गेश, पूरण, पंकज, मनीष, अर्जुन, मंगल, रोशन, अमित सभी साथ मिलकर दाह संस्कार करते हैं। कोरोना संक्रमण के डर से परिजन आते ही नहीं।


यह होता है प्रोटोकॉल
कोरोना पॉजिटिव मरीज की मृत्यु होने के बाद विशेष प्रोटोकॉल में दाहसंस्कार किया जाता है। एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजेश शर्म ने बताया कि शव के नाक, मुंह, कानों को रूई से बंद करते हैं। इसके बाद प्लास्टिक के डबल लेयर बॉडी बैग से कवर कर फिर से कपड़े से पैक किया जाता है। फिर दुबारा बॉडी बैग से शव को पैक किया जाता है। जिला कलक्टर को इसकी सूचना दी जाती है। नगर निगम और पुलिस की निगरानी में एंबुलेंस की सहायता से सीधे मोक्षधाम भेजा जाता है। शव को घर नहीं भेजा जाता। परिजनों को भी हिदायत दी जाती है कि शव को न खोंले। इसके बाद दाह संस्कार/सुपुर्दे खाक किया जाता है।

Avinash Bakolia Reporting
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