इस वजह से ​नहीं निकलेगी गण के बिना "गौर"

Gangaur 2020 : राजधानी में लोकपर्व गणगौर आज कोरोना के खौफ के बीच मनाया जा रहा है। लेकिन, इस बार जयपुर में त्रिपोलिया गेट से करीब तीन सदी से लवाजमे के साथ परंपरागत तरीके से निकलने वाली गणगौर की सवारी नहीं निकलेगी न ही आम जनता के दर्शनों के रखा जाएगा। कोराना वायरस के संक्रमण के बाद राज्य सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी व देशभर लागू हुए लॉकडाउन के चलते सिटी पैलेस प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।

By: Devendra Singh

Published: 27 Mar 2020, 02:48 PM IST

देवेन्द्र सिंह / जयपुर. राजधानी में लोकपर्व गणगौर आज कोरोना के खौफ के बीच मनाया जा रहा है। लेकिन, इस बार जयपुर में त्रिपोलिया गेट से करीब तीन सदी से लवाजमे के साथ परंपरागत तरीके से निकलने वाली गणगौर की सवारी नहीं निकलेगी न ही आम जनता के दर्शनों के रखा जाएगा। कोराना वायरस के संक्रमण के बाद राज्य सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी व देशभर लागू हुए लॉकडाउन के चलते सिटी पैलेस प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। लॉकडाउन की स्थिति में पांच से अधिक लोग एकत्र नहीं हो सकते ऐसे में गण के बिना गणगौर ( gangaur ) भी नहीं निकाली जाएगी। जयपुर बसने के बाद यह पहला अवसर होगा जब सिटी पैलेस ( City Palace ) से गणगौर की शाही सवारी नहीं निकलेगी और न ही ताल कटोरे पर घेवर का भोग लगेगा। कहते है जब परंपराएं भविष्य में झांकती हैं तो समृद्धि उस शहर के कदम चूमती है और जब वहीं परंपराएं किसी कारण से टूटती तो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती है। यही अब होने वाला है जयपुर की शाही गणगौर का। सिटी पैलेस में इस बार केवल मिट्टी से बनी गणगौर की ही परंपरागत पूजा होगी। इस बार सवारी को बाहर नहीं निकाला जाएगा।

स्थापना के बाद से निकल रही थी गणगौर
सिटी पैलेस प्रशासन से जुड़े रामू रामदेव का कहना है कि जयपुर बसने के बाद यह पहला मौका होगा, जब किसी महामारी के चलते गणगौर की शाही सवारी नहीं निकाली जाएगी। प्लेग जैसी महामारी और छपन्या जैसा अकाल भी गणगौर की सवारी को नहीं रोक पाया था। जयपुर शहर की स्थापना 18 नवम्बर 1727 में हुई इसके बाद 1828 में सिटी पैलेस से पहली बार गणगौर की शाही सवारी निकाली गई थी। उसके बाद हर साल निविघ्न शाही सवारी निकाली जाती रही। जानकारी के अनुसार जयपुर बसने से पहले आमेर में भी गणगौर की सवारी निकाली जाती थी। उधर पर्यटन विभाग ने भी कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए गणगौर की शाही सवारी के दौरान विभाग की ओर से करवाए जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम पहले ही रद्दकर दिए थे।

बादल महल में सजती थी संगीत की महफिल

वर्ष 1875 में जपपुर राजघराने के बुलावें पर गणगौर की शाही सवारी देखने के लिए तत्कालिन ग्वालियर महाराजा सिंधिया जयपुर आए थे । उनके सम्मान में सवाई राम सिंह द्वितीय ने बादल महल में दरबार लगाया। अजमेर की नृत्यांगनाओं व गायिकाओं ने बादल महल में संगीत की महफिल सजाई। सन् 1907 में बीकानेर महाराजा गंगा सिंह भी सवाई माधोसिंह के बुलावे पर जयपुर की गणगौर देखने आए। राजपरिवार के लोग मोती बुर्ज से गणगौर माता के दर्शन करते थे। तब बादल महल के शाही दरबार में संगीत व नृत्य की महफिल सजती थी, तब जयनिवास बाग के फव्वारे चलते थे।

Devendra Singh Reporting
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