Corona Effect : जयपुर से लाखों श्रमिक गांव लौटे, खाली होने लगी बस्तियां, मकानों में लग रहे ताले

औद्योगिक क्षेत्र व कच्ची बस्तियों से सर्वाधिक मजदूरों का हुआ पलायन, सामान्य श्रमिक ही नहीं सालों से रह रहे लोग भी परिवार सहित कर गए पलायन, श्रमिकों की बस्तियां हो गई खाली

By: pushpendra shekhawat

Published: 16 May 2020, 01:08 PM IST

जया गुप्ता / जयपुर। गांवों से पिछले कई दशकों से शहरों की ओर बड़ी संख्या में रोजगार की तलाश में लोगों का पलायन हो रहा था। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद पहली बार पलायन शहरों से गांवों की ओर हो रहा है। सामान्य श्रमिक ही नहीं जो लोग सालों से परिवार सहित शहर में रहते हुए रोजगार कर रहे थे, वे भी अब गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं। राजधानी जयपुर से ही अब तक लाखों की संख्या में लोग पलायन कर चुके हैं।

गत 20-25 वर्षों गांव व दूसरे राज्यों से लोगों के रोजगार के लिए आने के कारण शहर में बेतरतीब बस्तियां बस रही थीं। लेकिन अब वे कुछ खाली दिखने लगी हैं। ज्यादातर कच्ची बस्तियां अतिक्रमण के चलते बसी थीं। छोटे-छोटे घरों में 30 से 40 लोग तक रह रहे थे। लेकिन अब इन लोगों ने कोरोना वायरस के भय के चलते अपने गांव की ओर कूच करना ही ज्यादा मुनासिब समझा है। यही वजह है कि बस्तियों में अब भीड़ काफी छंट गई है।

2.91 लाख लोगों ने किया पलायन
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार शहर से करीब 2.91 लाख लोग अब तक पलायन कर चुके हैं। इनमें वही लोग शामिल हैं, जिन्होंने पंजीयन करवाया है। जबकि बिना पंजीयन वालों को शामिल किया जाए तो यह संख्या दो गुना से भी ज्यादा होती है। यह लोग लम्बे इंतजार के बाद भी साधन नहीं मिलने से पैदल ही गांव के लिए रवाना हो रहे हैं। ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में वापस लौटे हैं। ज्यादातर वे लोग लौटे हैं, जिनके परिवार के कुछ लोग गावों में रहते हैं। जो परिवार पूरी तरह इन बस्तियों में शिफ्ट हो चुके हैं, वे अब भी बस्तियों में ही रह रहे हैं। निर्माण कार्यज्ञ करने वाले श्रमिक, फैक्ट्री मजदूर, थड़ी-ठेला संचालक ज्यादातर गांव जा चुके हैं। अब जवाहरात व एम्ब्रायडी कार्यों में लगे लोग भी जाने लगे हैं।


9 हजार श्रमिक जयपुर आए, होम क्वॉरंटीन किए

जहां लाखों लोग शहर से गए हैं, वहीं कुछ दूसरे राज्यों से भी वापस आए हैं। वापस आने वालों की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है। अब तक जयपुर में 9 हजार श्रमिक घर आ चुके हैं। सभी श्रमिकों को होम क्वॉरंटीन कर मॉनिटरिंग की जा रही है। सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग जयपुर के उपनिदेशक रितेश शर्मा ने बताया कि एसडीएम स्तर पर सभी श्रमिकों की मॉनिटरिंग की जा रही है। संदिग्ध मिलने पर उन्हें क्वॉरंटीन किया जा रहा है।

इन इलाकों से गए मजदूर
इलाके ----------------------------------- अनुमानित संख्या

जगतपुरा व सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र ------- 50 हजार

सांगानेर, गोवर्धन नगर --------------------- 35 हजार

वीकेआइ ----------------------------------- 45 हजार

झोटवाडा ----------------------------------- 22 हजार

कालवाड रोड, निवारू रोड -------------------- 10 हजार

मानसरोवर औद्योगिक क्षेत्र ----------------- 15 हजार

शास्त्री नगर, नाहरी का नाका ---------------- 30 हजार

घाट की गुणी, आगरा रोड -------------------- 30 हजार

परकोटा ------------------------------------- 20 हजार

चित्रकूट, गोविंद नगर, गिरधारीपुरा, सुशीलपुरा ---- 50 हजार

- जिनके परिवार गांव में रह रहे हैं, उनमें महामारी को लेकर भय हो गया है। इसी कारण वापस लौट रहे हैं। हजारों लोग रास्तों में पैदल चलते मिले हैं। मुम्बई, गुजरात से लोग परिवारों के साथ पैदल लौटे हैं। हालांकि जयपुर से ऐसा देखने में कम आया है।

- मुकेश, कोरोना जनप्रयास संगठन सदस्य

- चित्रकूट, गोविंद नगर सहित आस-पास के इलाकों में दिहाड़ी मजदूर, थड़ी-ठेला लगाने वाले 60 प्रतिशत लोग गांव जा चुके हैं। काफी लोगों ने जाने के लिए पंजीकरण करवा रखा है। जिन लोगों ने सब्जी के ठेले लगा लिए, वे ही अभी गांव नहीं गए हैं।

- मोहन झवेरिया, स्थानीय निवासी, चित्रकूट

- औद्योगिक क्षेत्र के आसपास प्रवासी मजदूरों की ही बस्तियां हैं। आधी से ज्यादा बस्तियां खाली हो गई हैं। जो रह गए हैं, उनके पास भी रोजगार नहीं है। उनका गांव में भी ठिकाना नहीं है, इसीलिए यहीं पर रूके हुए हैं।

- रोहित कुमार, सीतापुरा निवासी

pushpendra shekhawat Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned