शोर-शराबे में कोरोना हवा-हवाई, धूम-धड़ाके में गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई

-वार्डों में नियम ताक पर रखकर प्रत्याशी कर रहे प्रचार
- भीड़ में मास्क गायब, सोशल डिस्टेंसिंग भी भूले
-निर्वाचन आयोग की सख्ती दरकिनार कर महामारी को दे रहे निमंत्रण

By: Amit Pareek

Published: 26 Oct 2020, 08:55 PM IST

जयपुर. निकाय चुनाव में प्रचार परवान चढऩे लगा है। सुबह से रात तक ढोल-ताशे, धूम-धड़ाका, गहमागहमी कॉलोनियों में दिखने लगी है। नहीं चाहते हुए भी वोटर्स को इस माहौल का हिस्सा बनना पड़ रहा है। कहीं पड़ोसी धर्म आड़े आ रहा है तो कहीं परिचित होने की दुहाई दी जा रही। कहीं पर पार्टी का दबदबा चुनावी रंगत में रमने को विवश कर रहा है। पेश है लाइव पड़ताल।
अलसुबह से दरवाजे पर प्रत्याशी समर्थकों के रेले के साथ पहुंच रहे हैं। मजबूरी ऐसी कि मास्क से बेेपरवाह इन लोगों को चंद मिनट ही सही सुनना पड़ रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग के नारे को जेब में लेकर घूम रहे इन लोगों को जैसे कोरोना की जरा भी फिक्र नजर नहीं आ रही। इस पूरी हलचल में महामारी को जैसे भूला दिया गया है। हर कोई बस चुनावी रंग में रंगा जा रहा है। जो कोरोना के डर से इस माहौल से दूर खड़ा है उसे भी मजबूर कर भीड़ का हिस्सा बनाया जा रहा है।

संकेत तो कुछ और कहते हैं
स्थानीय लोगों ने बातचीत में स्वीकार किया कि निकाय चुनाव में कोरोना गाइडलाइन तो जैसे कागजों में ही कहीं दबकर रह गई है। संक्रमण की रोकथाम को ध्यान में रख जो सरकारी दावे किए गए थे वो हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। पूरे शहर में निर्वाचन आयोग की सख्ती भी बेअसर नजर आ रही है। शहर के वार्डों में चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ रही हैं उससे तो यही संकेत मिल रहे हैं।

खौफ गायब, वायरस गुम
शहर के कई वार्डों में चुनाव कार्यालय का उद्घाटन हो या घर-घर प्रचार जगह-जगह समर्थकों की भीड़ बिना मास्क नजर आ रही है। कई प्रत्याशी तो स्वयं वार्ड में पहचान कराने के उद्देश्य से मास्क घर भूलकर आ रहे हैं। देर रात तक चुनावी कार्यालयों में रणनीति के बहाने जुट रहे लोग भी कोरोना से बेखबर दिख रहे हैं। कॉलोनियों में प्रत्याशियों का स्वागत सत्कार हो या मंच पर माल्यार्पण समारोह सभी में वायरस की नजरअंदाजी झलक रही है। महामारी के दौर में खतरे की दहलीज पर खड़े बुजुर्गों को रिझाने का भी कोई अवसर इन चुनावों में नहीं गंवाया जा रहा। संक्रमण के खौफ के बावजूद उन्हें सभाओं में आमंत्रित किया जा रहा है। उनके करीब जाकर अभिवादन का दस्तूर निभाया जा रहा है। जबकि संक्रमित हवा के झोंके मात्र से वे चपेट में आ सकते हैं।

लोगों को यह भी आशंका
नगर निगम चुनाव में यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि वोट के लिए घूम रही भीड़ में कोई संक्रमित हो सकता है अथवा कोई ऐसा भी हो सकता है जो पूर्व में खुद या उनके करीबी वायरस की चपेट में आए हों। ऐसे में दूसरों के लिए खतरा अभी टला नहीं है।

लेकिन सावधानी भी जरूरी
बहुत से लोगों का कहना था कि शहर की सरकार के लिए निकाय चुनाव अहम हैं लेकिन उससे भी कहीं ज्यादा जरूरी है महामारी के दौर में सावधानी के साथ पूरी चुनावी कवायद में शामिल होना। निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों की पालना करना और यह ध्यान में रखना कि कहीं नियमों की अवहेलना न हो जाए जिसके कारण दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़े।

Amit Pareek Desk
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