कोरोना के कर्मवीर: मासूम को घर पर छोड़ कोरोना के खिलाफ ड्यूटी निभा रहीं डॉक्टर हूमा

कोरोनाकाल में इनदिनों डॉक्टर, पुलिसकर्मी और अन्य कोरोना वारियर्स अपनी जान पर खेल कर आमजन को इस महामारी से बचाने में जुटे हुए हैं। इन्हीं कोरोना वारियर्स में से एक हैं डॉक्टर हूमा खान, जो शहर के परकोटा खासकर रामगंज इलाके में अपनी सेवाएं दे रही हैं। डॉक्टर खान यूनानी चिकित्सा अधिकारी हैं और कांवटियों की पीपली स्थित सरकारी यूनानी डिस्पेंसरी में प्रभारी के पद पर तैनात हैं।

By: abdul bari

Published: 17 Jun 2020, 02:05 AM IST

जयपुर
कोरोनाकाल में इनदिनों डॉक्टर, पुलिसकर्मी और अन्य कोरोना वारियर्स अपनी जान पर खेल कर आमजन को इस महामारी से बचाने में जुटे हुए हैं। इन्हीं कोरोना वारियर्स में से एक हैं डॉक्टर हूमा खान, जो शहर के परकोटा खासकर रामगंज इलाके में अपनी सेवाएं दे रही हैं। डॉक्टर खान यूनानी चिकित्सा अधिकारी हैं और कांवटियों की पीपली स्थित सरकारी यूनानी डिस्पेंसरी में प्रभारी के पद पर तैनात हैं।


खास बात ये है कि हूमा खान की एक साल की मासूम बेटी है। जो इनदिनों मां से दूर ही रहती है। डॉक्टर खान ने बताया कि वह सुबह जल्दी घर से निकल जाती हैं और अपनी टीम के साथ रामगंज क्षेत्र के लोगों को जगह-जगह शिविर लगाकर इम्यूनिटी बूस्टर यूनानी काढ़ा पिलाती हैं। इसके अलावा पुसिकर्मियों समेत अन्य कोरोना वारियर्स को इम्यूनिटी बूस्टर यूनानी दवाएं वितरित करती हैं। जिससे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाए और वह कोरोना की चपेट में न आएं। इस दौरान उन्हें अपनी मासूम को घर पर ही छोड़ना पड़ता है।


चाहकर भी नहीं ले पाई तो आंखें भर आईं...

डॉक्टर हूमा ने पिछले दिनों की घटना को याद करते हुए बताया कि मैं रामगंज इलाके में ही होम क्वारंटाइन हुए लोगों को इम्यूनिटी बूस्टर यूनानी दवाएं और काढ़ा पिलाने गई हुई थी। इस दौरान घर से बार-बार मम्मी के फोन आ रहे थे, उनका कहना था कि आज बेटी काफी रो रही है, जल्दी घर आ जाओ। खान ने बताया कि दोपहर बाद काम निपटा कर जैसे ही घर पहुंची तो मासूम मेरी ओर आने लगी, लेकिन चाहते हुए भी संक्रमण के डर से मैं उसे गोद में न ले पाई। इस दौरान मेरी आंखें भर आईं। बाद में ड्रेस चेंज कर खुद को सेनेटाइज किया और फिर बेटी को गले से लगा लिया।

कोरोना के कर्मवीर: मासूम को घर पर छोड़ कोरोना के खिलाफ ड्यूटी निभा रहीं डॉक्टर हूमा

जनप्रतिनिधियों का लिया सहयोग

डॉक्टर खान ने बताया कि शुरूआत में कुछ लोग यूनानी काढ़ा पीने से हिचकिचा रहे थे। जिसके बाद उन्होंने स्थानीय जागरूक लोगों और पार्षदों का सहयोग लिया। जिनकी मदद से लोगों की समझाइश हुई और उन्होंने ये दवा पीने में दिलचस्पी दिखाई।

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पति भी देते हैं साथ

कोरोना की इस जंग में डॉक्टर हूमा के साथ उनके पति मोहम्मद जुनैद भी मुस्तैदी से लगे हुए हैं। जुनैद इनदिनों अपने काम को छोड़कर शिविरों में यूनानी विभाग की टीम के साथ ही रहते हैं और उनका सहयोग करते हैं।

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