क्या ब्लड ग्रुप से जुड़ा है कोरोना का संक्रमण?

चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस का कहर इस वक्त दुनियाभर को चपेट में ले चुका है। वुहान में संक्रमण फैलने और इससे हुई मौतों पर शोध करते हुए शोधकर्ताओं ने कहा है कि यह संक्रमण एक विशेष ब्लड ग्रुप और 55 साल से ज्यादा उम्र वालों पर ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।

By: Tasneem Khan

Published: 18 Mar 2020, 04:09 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

JAIPUR जयपुर में कोरोना के चार संक्रमित मिले, जिनमें से तीन के ठीक होने की पुष्टि हो चुकी है। अब डॉक्टर यह वायरस न फैले, इसे लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। राज्य सरकार भी इस बीमारी के न फैलने के लिए अभियान शुरू कर चुकी है। वहीं कोरोना को लेकर दुनियाभर में कई शोध इस समय हो रहे हैं। इसी बीच अमरीका ने इसका वैक्सीन बना लेने का दावा किया है, वहीं ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने भी इस बीमारी का कारण पता लगा लिया है। एक रिसर्च तो यह भी आई है कि यह संक्रमण एक विशेष ब्लड ग्रुप वालों में ज्यादा देखा जा रहा है। चीन में इस बीमारी से संक्रमित लोगों पर शोध किया गया तो सामने आया कि ज्यादातर संक्रमित लोग ए ब्लड ग्रुप के हैं। जबकि मरने वालों की संख्या उम्र से जोड़ी जा रही है। बताया जा रहा है कि अधिकतर कोरोना संक्रमण से मरने वालों की उम्र 55 वर्ष से ज्यादा थी। इससे कम उम्र के मरीजों में सर्वाइव करने की क्षमता ज्यादा देखी गई। ब्लड ग्रुप की बात करें तो शोधकर्ताओं ने यह भी कहा है कि चीन में ओ ब्लड ग्रुप वाले मरीजों में कोरोना का संक्रमण भी सबसे कम देखा गया। आपको बता दें कि चीन के वुहान में वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से संक्रमित ढाई हजार लोगों पर अध्ययन किया था। उसकी के नतीजों में यह बातें सामने आई हैं। वुहान ही वो शहर है, जहां से यह वायरस दुनियाभर में फैल गया और आज डेढ़ सौ देशों के लोग इसकी चपेट में हैं। अब तक की सबसे ज्यादा मौतें इसी शहर में हुई। हुबई प्रांत को इसका केंद्र माना गया। हालांकि दुनियाभर में महामारी का रूप ले चुकी इस बीमारी से चीन समेत कई देशों में लोगों के कोरोनावायरस संक्रमण से उबरने की ख़बरें आने लगी हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया में भी इस वायरस को लेकर शोध चल रही है। यहां के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने इस बात की पहचान कर ली है कि मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वायरस का मुक़ाबला कैसे करती है। इस शोध में बताया गया है कि मानव शरीर का सुरक्षा तंत्र यानी उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता इस वायरस से कैसे लड़ती है और कैसे उसे हरा सकती है। युवाओं के शरीर में इस संक्रमण से लड़ने की क्षमता ज्यादा देखी गई है। वहीं बच्चों में इससे कम और सबसे कम क्षमता बुजुर्गों में देखी गई। इनमें भी वे लोग ज्यादा हैं, जिन्हें अस्थमा या फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं पहले से हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस शोध का मकसद उन कोशिकाओं के काम के बारे में पता लगाना था जो इस वायरस को टक्कर दे रही हैं। उनका मानना है कि इससे वायरस के लिए वैक्सीन तैयार करने में मदद मिलेगी। वहीं अमरीका का दावा है कि वहां एक वैक्सीन तैयार हो चुका है और इंसानों पर इसका परीक्षण भी शुरू हो गया है। वैक्सीन बनाने वाली वाली प्राइवेट कंपनी ने कहा कि इस वैक्सीन को टेस्ट करने के पहले स्टेप में एक वोलंटियर पर प्रयोग किया गया है। परीक्षण में 45 वोलंटियर हिस्सा ले रहे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए और प्रभावकारिता के लिए बड़े पैमाने परीक्षण के दो चरणों को पूरा करना पड़ेग। इस प्रक्रिया में कम से कम एक साल का समय भी लग सकता है। आपको बता दें कि चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण 159 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वायरस से संक्रमित 1,84,976 मामलों की पुष्टि की जा चुकी है जबकि इस कारण 7,500 मौतें दुनियाभर में दर्ज की गई हैं।

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