जन्म और विवाह प्रमाण पत्रों पर लॉकडाउन का ब्रेक

लॉकडाउन ने जन्म और विवाह प्रमाण पत्र पर ब्रेक लगा दिए है। नगर निगम (Jaipur Municipal Corporation) में लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान जन्म प्रमाण पत्र (Birth certificate) सिर्फ नाम मात्र के बने है। विवाह प्रमाण पत्र (Marriage certificate) पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया। लॉकडाउन के दौरान करीब 40 दिनों में सिर्फ 100 जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बने है। वहीं विवाह प्रमाण पत्र एक भी जारी नहीं हुआ है। मत्यु प्रमाण पत्र भी गिने—चुने ही बने है।

By: Girraj Sharma

Published: 05 May 2020, 07:08 PM IST

जन्म और विवाह प्रमाण पत्रों पर लॉकडाउन का ब्रेक
— 40 दिन में 100 जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बने
— विवाह प्रमाण पत्र एक भी नहीं
— 25 फीसदी ही रह गया जन्म रजिस्ट्रेशन

गिर्राज शर्मा
जयपुर। लॉकडाउन ने जन्म और विवाह प्रमाण पत्र पर ब्रेक लगा दिए है। नगर निगम (Jaipur Municipal Corporation) में लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान जन्म प्रमाण पत्र (Birth certificate) सिर्फ नाम मात्र के बने है। विवाह प्रमाण पत्र (Marriage certificate) पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया। लॉकडाउन के दौरान करीब 40 दिनों में सिर्फ 100 जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बने है। वहीं विवाह प्रमाण पत्र एक भी जारी नहीं हुआ है। मत्यु प्रमाण पत्र भी गिने—चुने ही बने है। हालांकि जन्म के रजिस्ट्रेशन जरूर हो रहे है, लेकिन लॉकडाउन का असर इस पर भी पडा है, अप्रेल माह में जन्म रजिस्ट्रेशन की संख्या घटकर 25 से 30 फीसदी ही रह गई है। अब जिन जन्म के रजिस्टेशन को 21 दिन हो गए, उनके प्रमाण पत्र बनवाने में लोगों को परेशानी उठानी पडेगी। रजिस्ट्रेशन के 21 दिन बाद प्रमाण पत्र बनवाने के लिए शपथ पत्र सहित कई औपचारिताएं पूरी करनी होती है।

नगर निगम अधिकारियों की मानें तो लॉकडाउन से पहले जहां नगर निगम में रोजाना 800 से एक हजार जन्म प्रमाण पत्र बन रहे थे, वहीं लॉकडाउन के दौरान पिछले करीब 40 दिनों में 100 जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बनें, इनमें भी अधिकतर आॅनलाइन बने जन्म प्रमाण पत्र शामिल है। हालांकि आॅनलाइन जन्म प्रमाण पत्र लॉकडाउन में भी बन रहे है, लेकिन लोग जागरूक नहीं होने से जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवा रहे है।

लॉकडाउन का असर जन्म के रजिस्ट्रेशन में भी देखने को मिला है, अस्पतालों के जन्म रजिस्ट्रेशन के आंकडे देखे तो जयपुर शहर के जनाना अस्पताल और महिला अस्पताल के साथ अन्य अस्पतालों में जनवरी माह में करीब 11 हजार रजिस्टेशन हुए, वहीं फरवरी माह में जन्म रजिस्टेशन की संख्या घटकर 9 हजार 600 रह गई। मार्च में यह संख्या और कम हो गई, मार्च में जन्म रजिस्टेशन 8 हजार 100 हुए है। वहीं लॉकडाउन में जन्म रजिस्टेशन के आंकडे घटकर 25 से 30 फीसदी ही रह गए है। लॉकडाउन के दौरान यानी अप्रेल माह में शहर के अस्पतालों में सिर्फ 2800 जन्म के रजिस्टेशन हुए है, लेकिन जन्म प्रमाण पत्र 100 भी नहीं बने है। निगम अधिकारियों की मानें तो लॉकडाउन से पहले नगर निगम में रोजाना 800 से एक हजार जन्म प्रमाण पत्र बनते थे, इनमें 300 से 400 जन्म प्रमाण पत्र अकेले नगर निगम मुख्यालय में बनते थे, बाकि के विभिन्न जोन कार्यालयों में प्रमाण पत्र बनते थे।

नगर निगम जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार प्रदीप पारीक ने बताया कि जन्म प्रमाण पत्र आॅनलाइन बन रहे हैं, लेकिन लोग जागरूक नहीं है। सब आॅफलाइन ही जन्म प्रमाण पत्र बनवाना चाहते है। यही कारण है कि लॉकडाउन के दौरान करीब 40 दिनों में 100 जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बने। जबकि पहले औसतन रोजाना 800 से 1000 जन्म प्रमाण पत्र बन रहे थे। जन्म रजिस्टेशन की संख्या भी घटकर चौथाई ही रह गई है।

अब आएगी ये दिक्कत
नगर निगम अधिकारियों की मानें तो जन्म—मत्यु के रजिस्ट्रेशन होने के बाद 21 दिन में प्रमाण पत्र बनवाना अनिवार्य है, इसके बाद शपथ पत्र देना होता है। लॉकडाउन के दौरान शहर के विभिन्न अस्पतालों में करीब 2800 जन्म के रजिस्टेशन हुए है, लेकिन प्रमाण पत्र सिर्फ 100 भी नहीं बने हैं। ऐसे में अब इनके प्रमाण पत्र बनवाने में लोगों को परेशानी उठानी पडेगी।

Girraj Sharma Desk
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