RUHS के अंदर का सच: भर्ती मरीजों तक पहुंचा पत्रिका, मरीज बोले- वे रोजाना 30-40 मरीजों के शव पैक करते देखते हैं

पत्रिका आरयूएचएस अस्पताल में भर्ती मरीजों तक पहुंचा तो उन्होंने कहा, मंत्री ने किसकी समस्या देखी और किसका हाल जाना, इसका मरीजों को पता नहीं। मंत्री ने वही देखा, जो उन्हें डॉक्टरों ने दिखाया।

By: santosh

Updated: 29 Nov 2020, 11:08 AM IST

विकास जैन
जयपुर. प्रदेश के सबसे बड़े कोविड डेडिकेटेड अस्पताल आरयूएचएस में चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कोरोना संक्रमित होने के बावजूद 'निरीक्षण' किया। डॉक्टरों-चिकित्साकर्मियों की जान जोखिम में झोंकी। फिर भी न समस्याएं देख पाए, न अव्यवस्थाएं उन्हें नजर आई। पत्रिका ने शनिवार को हकीकत खंगाली और मरीजों से बात की तो सामने आया कि चिकित्सा मंत्री का निरीक्षण मरीजों के लिए नहीं, सुर्खियां बटोरने के लिए था।

मरीज बोले: मंत्रीजी ने वही देखा, जो डॉक्टरों ने दिखाया
पत्रिका आरयूएचएस अस्पताल में भर्ती मरीजों तक पहुंचा तो उन्होंने कहा, मंत्री ने किसकी समस्या देखी और किसका हाल जाना, इसका मरीजों को पता नहीं। मंत्री ने वही देखा, जो उन्हें डॉक्टरों ने दिखाया। बाहर से 10 मंजिला भव्य भवन दिखता है लेकिन भीतर बाथरूम से वार्ड तक समस्याओं का अंबार है। आठ महीने में दर्जनों मरीज ऐसे रहे, जो भर्ती होने के बाद कुछ घंटों में या एक-दो दिन में ही यहां से परेशान होकर निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हुए।

मरीजों ने बताया सच, जो रघु शर्मा ने देखा ही नहीं
- सर्दी के बावजूद अस्पताल के अधिकांश बाथरूम में पानी लीक हो रहा है।
- कॉटेज वार्ड के अलावा अन्य किसी मरीज के लिए गर्म पानी की व्यवस्था नहीं है।
- शौचालयों की समय पर सफाई नहीं होती।
- वीआइपी के अलावा अन्य कमरों की नियमित सफाई नहीं होती।
- अस्पताल में जरूरत के मुकाबले वार्ड ब्वाय बहुत कम हैं।
- नर्सिंग स्टाफ अक्सर कोई इंजेक्शन लगाना भूल जाते हैं। इससे मरीजों को तकलीफ होती है।
- अस्पताल में रोजाना 30-40 मरीजों की मौत हो रही है। हम शव देखते हैं लेकिन मौतों का सच छुपाया जा रहा है।
- कई बार नर्सिंग स्टाफ रात 12 बजे इंजेक्शन लगाने आते हैं, तब तक मरीज सो चुके होते हैं।
- मरीजों को खुद का ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर लाने को कहा जाता है।
- डॉक्टर आते हैं तब कहते हैं कि कोई ज्यादा बात नहीं करेगा, शिकायत करने पर चिल्लाने लगते हैं।
- दस मंजिला अस्पताल की लिफ्ट से ऊपरी मंजिल तक जाने में बहुत समय लगता है। यहां से सिलेंडरों की आवाजाही अधिक होती है।
(कई मरीजों ने पत्रिका को लिखित में समस्याएं बताई)

जिम्मेदारों के दावे की पोल भी खुली
पड़ताल के दौरान मरीजों ने पत्रिका को जो हालात बताए और व्यवस्थाओं की जो तस्वीर सामने आई, उससे जिम्मेदारों के दावों की पोल भी खुल गई है। व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त रखने के दावे झूठे साबित हुए हैं।

मौतों पर पर्दा: सरकार कराए उच्च स्तरीय जांच
अस्पताल में भर्ती मरीजों ने पत्रिका को बताया कि वे रोजाना 30-40 मरीजों के शव पैक करते देखते हैं। ऐसे में यह जरूरत और बढ़ गई है कि सरकार उच्च स्तरीय जांच कराए, मौतों पर पर्दा डालने के मामले में सच जनता के सामने लाए। गौरतलब है कि प्रदेश में हो रही मौतों और सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में हर जिले में लगातार बड़ा अंतर सामने आ रहा है।

ये हैं जिम्मेदार
- डॉ. सुधीर भंडारी, प्राचार्य एवं नियंत्रक, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
- डॉ. अजीत सिंह, अधीक्षक, आरयूएचएस अस्पताल

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