हे भगवान! अस्पतालों में खत्म होता जा रहा कोविड और नॉन-कोविड का भेद

कोविड काल अब जहां अपने चरम की ओर बढ़ रहा है, वहीं अब राजधानी जयपुर के ही कोविड अस्पतालों में कोविड और नॉन-कोविड मरीजों में भेद ही खत्म होता नजर आ रहा है।

By: kamlesh

Published: 26 Nov 2020, 02:21 PM IST

जयपुर। कोविड काल अब जहां अपने चरम की ओर बढ़ रहा है, वहीं अब राजधानी जयपुर के ही कोविड अस्पतालों में कोविड और नॉन-कोविड मरीजों में भेद ही खत्म होता नजर आ रहा है। अधिकांश निजी अस्पतालों के पास खुद का एक ही भवन है, उसी में कोविड और नॉन-कोविड दोनों मरीज भर्ती हैं। कई जगह तो आने और जाने के रास्ते भी एक ही ही हैं। यह पता ही नहीं चल पाता कि कौन कोविड है और कौन नॉन-कोविड।

खतरनाक सच लेकिन सब बंद किए बैठे आंखें
निजी अस्पतालों पर ही बढ़ी निर्भरता की चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा विभाग की मनमानी भारी पडऩे लगी है। अस्पतालों के एक ही भवन में भर्ती कोविड और नॉन-कोविड मरीज, आने जाने के रास्ते सहित कई सुविधाएं एक, संक्रमण बढऩे का बना हुआ पूरा खतरा राजस्थान पत्रिका ने बुधवार को शहर के कई अस्पतालों की पड़ताल की तो यह खतरनाक सच्चाई सामने आई। दरअसल, सरकारी को छोड़ निजी अस्पतालों पर ही बढ़़ी निर्भरता भारी पड़ रही है।

गोपालपुरा बाइपास: एक ही भवन में दोनों तरह के मरीज
अस्पताल में प्रवेश करते ही गार्ड ने पत्रिका प्रतिनिधि को रोका। लेकिन खुद उसने अपना फेस मास्क नाक से नीचे किए हुआ था। पत्रिका प्रतिनिधि के टोकने पर उसने मास्क ठीक किया। यहां अंदर जाने पर पता चला कि मुख्य भवन में ऊपरी मंजिल पर कोविड के गंभीर मरीजों को रखा जा रहा है। गेट पर सख्ती थी, लेकिन अंदर एक ही भवन में दोनों तरह के मरीजों को रखे जाने से संक्रमण बढऩे का अंदेशा था। यहां आने वाले मरीजों के परिजन ने बताया कि अंदर कुछ सुविधाओं का उपयोग दोनों तरह के मरीजों के लिए हो रहा है।

खातीपुरा: लिफ्ट से जाते हैं कोविड-नॉन कोविड मरीज
यहां एक निजी अस्पताल में दो जगह कोविड वार्ड बनाए गए हैं। यहां एक चौंकाने वाली सच्चाई देखी। गेट के बाहर एक स्ट्रेचर ट्रॉली रखी थी। इसके नीचे ऑक्सीजन सिलेंडर भी लगा मिला। यहां जो भी गंभीर मरीज आता है, उसे इसी स्ट्रेचर से ले जाया जाता है। यहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि यहां लिफ्ट और आम रास्तों से सामान्य और कोविड मरीज दोनों ही गुजरते हैं। जांच के बाद ही पता चलता है पॉजिटिव है या नहीं। पहले तो, सामान्य तौर पर ही उसका उपचार किया जाता है।

जवाहर सर्कल: जगह कम, भीड़ ज्यादा, कोविड-नॉन कोविड आसान सपंर्क में
यहां एक निजी अस्पताल में विजिटर्स परामर्श केन्द्र बनाया गया है, जहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से पूछताछ होती है। यदि वह सामान्य मरीज है तो उसे एक फार्म भरवाया जाता है और जांच के बाद ओपीडी की तरफ भेज दिया जाता है। यदि कोविड से संबंधित जांच या भर्ती के लिए कोई आता है तो उसे वहीं पास ही कोविड काउंटर पर भेज दिया जाता है। यहां दोनों तरह के मरीज आपस में आसानी से संपर्क में आते हैं और वहीं जगह कम होने पर भीड़ की स्थिति भी बनती हुई नजर आती है।

जेएलएन मार्ग : प्रवेश का रास्ता सभी के लिए एक ही
यहां एक निजी अस्पताल में सामान्य मरीज और कोविड मरीज एक ही गेट से प्रवेश करते हुए नजर आए। इसके बाद इमरजेंसी गेट के बाहर ओपीडी परामर्श केन्द्र बनाया गया है, जहां सामान्य मरीज की जानकारी एक फॉर्म में भरी जाती है और यह चैक किया जाता है कि मरीज को कोविड के कोई लक्षण तो नहीं हैं। यदि कोविड से जुडे लक्षण पाए जाते हैं तो हॉस्पिटल के एक हिस्से में बने कोविड सेंटर पर भेज दिया जाता है।

किरण पथ मानसरोवर: कोई रोकने वाला नहीं
यहां स्थित एक निजी अस्पताल में मुख्य प्रवेश द्वार पर ऑटोमेटिक गेट है। लेकिन आवाजाही से रोकने-टोकने वाला नहीं। आप कोविड हैं या नॉन-कोविड, बाहर किसी तरह की पूछताछ भी नहीं। अंदर पूछताछ केन्द्र से सटा बड़ा रिसेप्शन हॉल, जहां करीब 15 से 20 लोग बैठे नजर आए लेकिन पता ही नहीं चल पाता कि कौन कोविड के परिचित हैं और कौन नॉन कोविड के। पूछताछ पर पता चला कि यहां कोविड मरीज भर्ती किए जाते हैं, तो जवाब मिला कि हां किए जाते हैं। वेंटिलेटर और आईसीयू उपलब्ध हो जाएंगे।

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