कोरोना की तीसरी लहर: बच्चों को बचाने के लिए आयुष की पहल, तैयार होगा आयुष प्रोटोकॉल

कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए आयुष प्रोटोकॉल बनेगा, जिसका ड्राफ्ट इसी सप्ताह बनकर तैयार होने की उम्मीद है।

By: kamlesh

Published: 20 May 2021, 03:38 PM IST

जयपुर। कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए आयुष प्रोटोकॉल बनेगा, जिसका ड्राफ्ट इसी सप्ताह बनकर तैयार होने की उम्मीद है। इसमें बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाने सहित उनके बचाव के उपाय, रोग के लक्षण, घर पर देखभाल के तरीके, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर और शोध के विषय तय किए जाएंगे। इस कारण यह मील का पत्थर होगा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने जोधपुर स्थित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार की अध्यक्षता में विशेषज्ञों का टास्क फोर्स बनाया है, जिसमें कुल अध्यक्ष सहित कुल 12 सदस्य होंगे। जयपर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को समन्वय का जिम्मा सौंपा गया है। प्रो. अभिमन्यु कुमार कोरोना को लेकर केन्द्र सरकार द्वारा बनाई गई विशेषज्ञ कमेटियों में पहले भी शामिल रहे हैं।

क्यों महत्वपूर्ण
कोविड-19 की तीसरी लहर से बच्चों के प्रभावित होने की आशंका है। यह बात सामने आ चुकी है, लेकिन अभी तक उनको बचाने व उपचार के लिए कोई प्रोटोकोल सामने नहीं आया है। आयुष प्रोटोकोल- इसमें आयुर्वेद को प्राथमिकता, लेकिन होम्योपेथी, सिद्धा, योग व यूनानी चिकित्सा पद्धतियां भी शामिल होंगी।

टास्क फोर्स में कौन
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार - अध्यक्ष सदस्य- आयुष मंत्रालय में सलाहकार एवं होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. संगीता दुग्गल, आइ.टी.आर.ए. जामनगर के प्रो. के एस पटेल व सहायक प्रोफेसर सागर एम भिंडे, एस.वी. आयुर्वेद कॉलेज तिरुपति के पूर्व प्रोफेसर एन कृष्णैया, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआइआइए) नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर राजगोपाला एस, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर की एसोसिएट प्रोफेसर निशा कुमारी ओझा व विजिटिंग बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वाति घाटे, श्री नारायण प्रसाद अवस्थी राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर के एसोसिएट प्रोफेसर प्रशांत गुप्ता, आयुष मंत्रालय के शोध अधिकारी वैद्य सुमित गोयल व वैद्य दीपक लोंधे। सदस्य सचिव- राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के सहायक प्रोफेसर ब्रह्मदत्त शर्मा। इनका भी लिया जाएगा सहयोग- राष्ट्रीय सिद्धा संस्थान चेन्नई, होम्योपैथी रिसर्च कौंसिल, यूनानी मेडिसिन के लिए सीसीआरयू, निम्हांस बैंगलूरु के योग विशेषज्ञ सहायक प्रोफेसर हेमंत भार्गव।

आयुष पहले भी रहा आगे
कोविड-19 के शुरुआती दौर में जोधपुर स्थित आयुर्वेद विवि ने आयुर्वेदिक दवाई से क्लिनिकल ट्रायल किया, जो सफल रहा। कम गंभीर रोगियों को सात दिन से कम समय में ठीक किया और उन रोगियों पर दवा का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं हुआ। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस अध्ययन को अपनी संदर्भ सामग्री में शामिल किया और ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में इसका प्रकाशन हुआ। भारत सरकार ने भी आयुर्वेदिक उपचार का प्रोटोकोल जारी किया। जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने एम्स जोधपुर में क्लिनिकल ट्रायल किया, उसके भी अच्छे नतीजे सामने आए। हाल ही राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को कोविड केयर सेंटर बनाया गया है, जहां ऑक्सीजन व वेंटिलेटर सुविधा भी है।

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