scriptCorruption: 'Aka' survived in 300 cases in five years | भ्रष्टाचार: पांच साल में 300 मामलों में बच गए ‘आका’ | Patrika News

भ्रष्टाचार: पांच साल में 300 मामलों में बच गए ‘आका’

राजस्थान के कई विभागों में बड़ी संख्या में भ्रष्ट अधिकारी जमे हुए हैं। एसीबी ने इन अधिकारियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ने के लिए जाल बिछाया। जाल में छोटी मछली (अधीनस्थ कर्मचारी) तो पकड़ी गई, मगर बड़े आका पकड़े नहीं जा सके। इतना नहीं आकाओं के लिए रिश्वत वसूलने वाले भी उनके खिलाफ मुंह खोलने से बचते रहे। ऐसे में एसीबी ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर उनके मूल विभाग को विभागीय कार्रवाई के लिए फाइल भेजी है।

जयपुर

Published: June 20, 2022 08:03:37 pm

राजस्थान के कई विभागों में बड़ी संख्या में भ्रष्ट अधिकारी जमे हुए हैं। एसीबी ने इन अधिकारियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ने के लिए जाल बिछाया। जाल में छोटी मछली (अधीनस्थ कर्मचारी) तो पकड़ी गई, मगर बड़े आका पकड़े नहीं जा सके। इतना नहीं आकाओं के लिए रिश्वत वसूलने वाले भी उनके खिलाफ मुंह खोलने से बचते रहे। ऐसे में एसीबी ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर उनके मूल विभाग को विभागीय कार्रवाई के लिए फाइल भेजी है।

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गौर करने वाली बात है कि 1 जनवरी 2022 को विगत पांच वर्ष के 294 प्रकरणों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए फाइल भेजी गई। वहीं, इस वर्ष अब तक 6 प्रकरणों की फाइल संबंधित विभागों को भेजी है। जबकि इन 300 प्रकरणों से संबंधित विभागों ने मात्र 17 में ही एसीबी को कार्रवाई करने का जवाब भेजा है। ऐसे में सरकार की भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टोलरेंस की नीति पर प्रश्नचिन्ह लगता है।

पटवारी पकड़ा, तहसीलदार के खिलाफ भेजी फाइल
वर्ष 2020 में राजसमंद में पटवारी शिवराम शर्मा व दलाल नंदकिशोर को मकान की चाबी लौटाने व भवन निर्माण कार्य नहीं रोकने की एवज में 20 हजार रुपए रिश्वत लेते पकड़ा। जांच में तहसीलदार के खिलाफ सबूत नहीं मिलने पर संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए फाइल भेजी है।

17 मामलों में मिला जवाब
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 2018 में हुए संशोधन के तहत एसीबी पद के दुरुपयोग के मामलों की जांच नहीं कर सकती है।पहले संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष से स्वीकृति लेनी पड़ती है। वर्ष 2018 से अब तक कई मामलों में संबंधित विभागों ने स्वीकृति नहीं दी। एसीबी ने अनुमति के लिए 315 मामलों में पत्र भेज रखा है।

23 हजार रिश्वत लेते पकड़ा था
वर्ष 2017 में नागौर में समग्र शिक्षा अभियान के सहायक परियोजना अधिकारी सीताराम को 23 हजार रुपए रिश्वत लेते पकड़ा। सीताराम के साथ जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी जगदीश चन्द्र के खिलाफ एफआइआर दर्ज की। अब जांच पूरी होने पर जगदीश के खिलाफ सबूत नहीं होने पर विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा है।

जिन मामलों में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिलते तब उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए लिखते हैं।
बी.एल. सोनी, डीजी एसीबी

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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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