दिखावा साबित हो रहा है भ्रष्टाचारी अफसरों का निलम्बन, पैरवी ठीक से नहीं होती, बहाल हो जाते हैं भ्रष्टाचारी

dinesh saini

Publish: Oct, 13 2017 05:35:14 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
दिखावा साबित हो रहा है भ्रष्टाचारी अफसरों का निलम्बन, पैरवी ठीक से नहीं होती, बहाल हो जाते हैं भ्रष्टाचारी

निलंबन के बाद सरकार बरतती है सुस्ती, अफसर आखिरकार कर दिए जाते हैं बहाल...

जयपुर। भ्रष्टाचार के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में आईएएस से लेकर आईपीएस और आरएएस तक कई अफसर निलम्बित हुए लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। सरकार की सुस्ती के कारण ज्यादातर मामले अटके रहे, फिर संबंधित अफसरों को बहाल कर दिया गया।

 


प्रदेश में लाखों-करोड़ों रुपए रिश्वत लेने के मामले भी सामने आए लेकिन इनमें भी निलंबन जैसी कार्रवाई कुछ महीनों तक रही, फिर अफसर बहाल हो गए। बल्कि उन्हें अच्छी पोस्ट पर नियुक्ति दी गई। हाल ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनियमितता के मामले में सरकार ने कई अफसरों को निलम्बित किया है।

 

मामले में एक आईएएस और आरएएस अफसर भी जद में आए हैं। सरकार पहले भी ऐसी कार्रवाई करती रही है लेकिन यह सिर्फ निलम्बन तक सीमित रही है। करोड़ों का खान घोटाला भी इसमें शामिल है, जिसमें सितम्बर 2015 में निलंबित अफसर को दो वर्ष बाद पिछले अगस्त में नियमों का हवाला देते हुए आखिरकार बहाल कर दिया। जांच की गति भी अत्यन्त धीमी गति से चल रही है। इसी तरह एनआरएचएम घोटाले में आईएएस अफसर को आरोपित बनाया गया और जून 2016 में निलंबित किया गया।

 

राज्य सरकार ने अभियोजन चलाने की अनुशंसा केन्द्र को भेज भी दी लेकिन केन्द्र करीब पांच माह से इसका परीक्षण ही करा रहा है। जबकि प्राय: तीन माह में केन्द्र को निर्णय लेना पड़ता है। इसी तरह अजमेर पुलिस के चर्चित घूसकांड के अधिकांश आरोपित अफसर भी बहाल हो चुके हैं।

 

पैरवी ठीक से नहीं होती
जानकारों का कहना है कि भ्रष्टाचार समेत अन्य तरह के प्रकरणों में सरकार की ओर से पैरवी ठीक तरह से नहीं होती। प्रकरण लंबे समय तक पेंडिंग रहने तथा संदिग्ध हालात का फायदा आरोपित अफसरों को मिलता रहा है। कई बार तो अभियोजन स्वीकृति जारी करने में ही सरकार कई महीने लगा देती है।

 

दो को मिली सजा
बीकानेर दक्षिण में एसडीएम रहते हुए आरएएस अशोककुमार यादव को भ्रष्टाचार के मामले में कार्मिक विभाग ने 19 मार्च 2005 को निलंबित किया था। करीब आठ साल तक चले प्रकरण के बाद न्यायालय ने 21 मई 2013 को उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया और दो वर्ष कारावास तथा दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। इसके बाद राज्य सरकार ने 27 नवम्बर 2014 को उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इसके अलावा जैसलमेर के पोकरण में एसडीएम रहते हुए आरएएस रतन विश्नोई को 10 मार्च 2007 को एसीबी ने भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था।

 

16 मार्च 2007 को उïन्हें निलंबित किया गया, जबकि न्यायालय ने 30 अक्टूबर 2013 को उïन्हें दोषी करार देते हुए एक वर्ष की सजा सुनाई। इस पर सरकार ने 11 नवम्बर 2014 को उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया।

 

2013 से निलम्बन और बहाली
निलम्बन (एक बहाल)
आईएएस 05
आईपीएस 01
आरएएस 24

 

बहाली
आईएएस 01
आईपीएस 04
आरएएस 17

सजा मिली : 02 आरएएस को, जिसके कारण नौकरी से बर्खास्तगी।

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