scriptCourt opened the door for Gyanvapi, what will be condition of masjid | ज्ञानवापी के लिए कोर्ट ने खोला किवाड़, आखिर क्या होगा मस्जिद का हाल... | Patrika News

ज्ञानवापी के लिए कोर्ट ने खोला किवाड़, आखिर क्या होगा मस्जिद का हाल...

ज्ञानवापी मस्जिद में आखिरकार कानूनी प्रकिया की शुरूआत हो गई। वाराणसी जिला अदालत ने श्रृंगार गौरी मामले की सुनवाई करते हुए 22 सितंबर की तारीख दे दी है। इसके कारण पूरे हिंदूस्तान के हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है। वहां वाराणसी में हो रही बारिश को भी शुभ बताया जा रहा है।

जयपुर

Published: September 12, 2022 09:56:07 pm

ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Case) में आखिरकार कानूनी प्रकिया की शुरूआत हो गई। वाराणसी जिला अदालत ने श्रृंगार गौरी मामले की सुनवाई करते हुए 22 सितंबर की तारीख दे दी है। इसके कारण पूरे हिंदूस्तान के हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है। वहां वाराणसी में हो रही बारिश को भी शुभ बताया जा रहा है।

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दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष ने भी आगे की रणनीति को तय करने की प्रकिया शुरू कर दी है। डा अजय कृष्ण विश्वेश अब इस मामले की सुनवाई 22 सितंबर को करेगी। अब देखना ये है कि आगे क्या होगा...। सभी यही जानना चाहते हैं तो हमने कुछ कानूनविदों से बात की तो आगे क्या होगा यह जानने की कोशिश की।
मुस्लिम पक्ष
इस मामले को लेकर अब उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है। ज्ञानवापी मस्जिद का देखरेख कर रही अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी जिला अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक फैसले को रिव्यू करने सहित तमाम पक्षों पर अपील दायर कर सकती है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महल ने कहा है कि कोर्ट के पूरे फैसले को पढ़ने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे वकील इस फैसले को फिलहाल पढ़ेंगे और उसके बाद ही जायजा लेंगे।

हिंदू पक्ष करेगा पूजा
हिंदू श्रृंगार गौरी मामले में 1993 से पहले वाली स्थिति बहाल की मांग कर सकते हैं। गौरतलब है कि यहां लगातार दर्शन पूजन होता रहा है। 1993 में बैरिकेडिंग बनाए जाने तक इस परिसर में हिंदू देवी देवताओं की पूजा होती रही है। ऐसे में एक बार फिर से यहां पूजा की मांग की जाएगी।

ज्ञानवापी मस्जिद का होगा सर्वे
अब जब सुनवाई शुरू होगी तो सबसे पहले हिंदू पक्ष मस्जिद सर्वे की मांग कर कर सकता है। सुनवाई में सर्वे रिपोर्ट पर भी जिरह हो सकती है। शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग की जा सकती है।

वर्शिप एक्ट क्या है
सुप्रीम कोर्ट ने एक उपासना स्थल पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि यह कानून काशी और मथुरा में चल रहे मामलों पर कोई असर नहीं डालता है। इसकी को आधार बनाते हुए जिला अदालत ने कहा कि यहां वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता है। हिंदू पक्ष ने दलील दी थी कि जब तक जब तक किसी स्‍थल का धार्मिक स्‍वरूप तय नहीं हो जाता तब तक प्‍लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्‍ट 1991 प्रभावी नहीं माना जाएगा। 1991 में लागू किया गया यह प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता।

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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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