Dasara-2020 : 'दशानन' के दहन पर कोरोना हावी, रावण मंडी में पसरा सन्नाटा, देखें वीडियो

शहर में सालाना 15 हजार से अधिक पुतले होते थे तैयार

By: SAVITA VYAS

Published: 23 Oct 2020, 09:32 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयादशमी यानि दशहरा का पर्व 25 अक्टूबर को है। पहली बार कोरोना का काला साया सभी त्योहार पर इस तरह पड़ा है, जिससे सभी पर्व फीके पड़ गए। पहली बार राजधानी के बाजारों में बड़े दशानन बाजार से गायब हैं। कोरोना महामारी के मद्देनजर धारा-144 लागू होने से सार्वजनिक बड़ी जगहों पर रावण का दहन नहीं होगा। इससे सालभर पुतले बनाने वाले कारीगर बीते साल के पुतलों को पुन: सही करके बेचने को मजबूर हैं। इस बार मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित शहर की सबसे बड़ी रावण मंडी में कारीगरों ने महज 8 फीट तक नए पुतलों को तैयार किया है। कारीगरों ने बताया कि सालभर पेट पालने के लिए यही जीविका थी, इस बार यह भी खत्म हो गई। रावण मंडी के अध्यक्ष जगदीश नाथ परमार वोढ़ा ने बताया कि बीते 20 साल से रावण बना रहे हैं। पहली बार सब व्यापार चौपट हो गया है। छोटे बच्चों के शौक को पूरा करने के लिए गलियों में रावण दहन के लिए आठ फीट तक के 1500 रुपए तक के पुतले बनाए हैं। शहर के बाहर भी रावण भेजे जाते थे, इस बार ऐसा नहीं हुआ। 80 से अधिक परिवार यहां जोधपुर से पहुंचते थे। हर साल राजधानी में 15 हजार से अधिक 70 लाख रुपए के 2 फीट से लेकर 75 फीट तक के रावण के पुतले बेचे जाते थे।

बदल गया नजारा

लक्ष्मी मंदिर स्थित कारीगर सोहन ने बताया कि सड़क पर रखकर रावण बेचने में कई बार पुलिस प्रशासन परेशान कर रहा है। ऐसे में छोटे रावण को बेचना भी चुनौती बन रहा है। अब तक रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतले बनने शुरू हो जाया करते थे। शहर में मानसरोवर, लक्ष्मी मंदिर, वैशालीनगर, मालवीय नगर, दिल्ली रोड पर सड़क के किनारे, फु टपाथ, पार्कों व छतों पर पुतला बनाने वाले कारीगर व्यस्त नजर आते थे, लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल बदला हुआ है।

यहां होता था मेले का आयोजन

राजापार्क स्थित दशहरा मैदान से सबसे पुराने और सबसे लंबा 105 फीट रावण दहन कार्यक्रम और नयनाभिराम आतिशबाजी की झलक इस बार गायब रहेगी। राजधानी की सभी बड़ी समितियों ने रावण दहन नहीं करने की सहमति जताई है। मुख्य रूप से आदर्श नगर, राजापार्क, विद्याधर नगर, वैशाली नगर, मानसरोवर, रामलीला मैदान सहित 15 से 16 स्थानों पर रावण दहन और दशहरे मेले का आयोजन होता था। इसके अलावा नगर निगम चुनावों में जनप्रतिनिधि अपनी राजनीति चमकाने के लिए कोरोना काल में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले का सहारा इस बार नहीं ले पाएंगे।

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