कोरोना वायरस : मजदूरों के पलायन से राजस्थान के किसानों को हो रही मुश्किलें

टिड्डियों (Locust) के हमले और ओलावृष्टि (hailstorm) के बाद, राजस्थान के किसानों के सामने नई समस्या आ गई है - कोरोना वायरस (coronavirus) का डर और लॉकडाउन (lockdown) के बीच खेतों में काम कर रहे दूसरे राज्यों के मजदूर अपने अपने घर लौट रहे हैं।

By: जमील खान

Published: 29 Mar 2020, 04:45 PM IST

जयपुर। टिड्डियों (Locust) के हमले और ओलावृष्टि (hailstorm) के बाद, राजस्थान के किसानों के सामने नई समस्या आ गई है - कोरोना वायरस (coronavirus) का डर और लॉकडाउन (lockdown) के बीच खेतों में काम कर रहे दूसरे राज्यों के मजदूर अपने अपने घर लौट रहे हैं। भारतीय किसान संघ के प्रवक्ता राजीव दीक्षित ने बताया कि करीब 75 प्रतिशत फसलें नष्ट हो गर्ई और जो कुछ भी काटा जा सकता था और जिन्हें मंडियां ले जाने की तैयारी की जा रही थी, वे भी पिछले कुछ दिनों में आई बारिश के कारण नष्ट हो गईं।

दीक्षित ने कहा कि हालांकि, केंद्र सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी कर कृषि से संबंधित अतिरिक्त श्रेणियों को छूट दी थी, लेकिन यह घोषणा थोड़ी देरी से आई क्योंकि 75 प्रतिशत खड़ी और कटी हुई फसलों को नुकसान हुआ है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने कृषि श्रमिकों, खेती के संचालन, कृषि उपज की खरीद के लिए काम करने वाली एजेंसियों, फसलों को दूसरे राज्यों से लाना-ले जाना और बुवाई मशीनों को लॉक डाउन से मुक्म रखा है।

तहसीलदारों को दी सूचना
हालांकि, अशोक गहलोत सरकार ने खेत मालिकों और उन्हें जोतने वालों से आग्रह किया है कि वे हर्जाना और दावों का आकलन ऑनलाइन जमा करें, लेकिन किसान राज्य सरकार से इस बात को लेकर नाराज हैं क्योंकि उसके द्वारा वादा की गई कर्ज माफी को लागू करने में विफल रही है। जयपुर जिले के बेगास गांव के किसान चोगा लाल ने बताया कि मार्च माह में आई बारिश से खड़ी और कटी हुई फसलों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आगे कहा कि जो भी फसल बच गई थी, उसे काटा नहीं जा सका क्योंकि मजदूर अपने अपने घरों को लौटने लगे हैं। किसानों ने अपनी शिकायतें ऑनलाइन दे दी हैं, तहसीलदारों को नुकसान की सूचना दे दी है ताकि बीमा कंपनियों को सूचित किया जा सके। लेकिन, वर्तमान स्थिति में यह सब राज्य के अधिकारियों पर निर्भर करता है जो फिलहाल कोविड-19 से लडऩे में व्यस्थ हैं।

मनरेगा मजदूरों की ली जा सकती है मदद
चोगा लाल ने बताया कि गेहूं की फसल को काफी हद तक नुकसान पहुंचा है। हमें मंडियों में उचित भाव नहीं मिल रहा है। सरकार को तत्काल सर्वेक्षण करवाना चाहिए और हमें नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा मजदूरों को फसल की कटाई और ढुलाई के लिए लगाया जा सकता है।

बिजली के बिल भरने के नहीं हैं पैसे
उन्होंने कहा कि सरसों फसल का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं मिल पा रहा है। हमारे पास बिजली के बिलों का भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैँ। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि इसपर हमें सब्सिडी दी जाए। वहीं, जयपुर से 70 किलोमीटर दूर अपने सरसों के खेतों को ठेके पर देने वाले प्रदीप चुतर्वेदी ने कहा, लॉकडाउन से कुछ दिन पहले, मुझे मंडी में अपनी फसल के लिए उचित मूल्य मिला था। जिस किसान ने मेरे खेत में खेती की, उसने फसलों की अच्छी देखभाल की, लेकिन बारिश ने फसलों को बर्बाद कर दिया, अब वह क्या करेगा। जब उसने क्षति के बारे में कहने के लिए फोन किया तो मैं असहाय महसूस कर रहा था।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने कहा, किसान इन दिनों परेशान हैं। मुझे अपने निर्वाचन क्षेत्र से लगातार फोन आ रहे हैं। मैं उन्हें आश्वस्त करने की कोशिश कर रही हूं कि सरकार उनकी समस्याओं को हल करने के लिए काम कर रही है।

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