राजस्थान में क्राइम अनलॉक, छह हफ्ते मे 25 हजार मुकदमें हुए दर्ज

Crime rise in Rajasthan after unlock ....औसतन हर 24 घंटे में ही प्रदेश में 5 से ज्यादा मर्डर, 16 से ज्यादा बलात्कार और 20 से भी ज्यादा अपहरण के मुकदमें दर्ज हो रहे हैं। अपराध के इस बढ़ते ग्राफ ने अब पुलिस मुख्यालय को भी चिंता में डाल दिया है। अपराधियों में पुलिस के खौफ का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि लॉकडाउन के दौरान मई महीने में जितने मर्डर हुए उतने अनलॉक के दौरान भी नहीं हुए हैं।

By: JAYANT SHARMA

Published: 24 Jul 2020, 11:44 AM IST

जयपुर
1 जून से प्रदेश में अनलॉक शुरू होने के बाद अपराध भी अनलॉक हो गए हैं। अपराधी इस अनलॉक का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। एक जून से लेकर 15 जुलाई तक अपराध की संख्या 25 हजार से भी ज्यादा तक पहुंच चुकी है और हर दिन अपराध तेजी से बढ़ भी रहे हैं। औसतन हर 24 घंटे में ही प्रदेश में 5 से ज्यादा मर्डर, 16 से ज्यादा बलात्कार और 20 से भी ज्यादा अपहरण के मुकदमें दर्ज हो रहे हैं। अपराध के इस बढ़ते ग्राफ ने अब पुलिस मुख्यालय को भी चिंता में डाल दिया है। अपराधियों में पुलिस के खौफ का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि लॉकडाउन के दौरान मई महीने में जितने मर्डर हुए उतने अनलॉक के दौरान भी नहीं हुए हैं।


इस तरह बढ़ते जा रहे हैं अपराध, 45 दिन में यह सब कुछ हुआ
दरअसल अप्रेल और मई के महीने में पूर लॉकडाउन होने के कारण अपराध में गिरावट दर्ज हुई। चोरी, लूट, मारपीट और अन्य अपराधों में पचास फीसदी से भी ज्यादा कमी आई। लेकिन जैसे ही अनलॉक वन शुरू हुआ मानों अपराध का भी ताला खुल गया हो। अनलॉक वन के 45 दिनों के भीतर ही प्रदेश के पुलिस थानों में 25307 मुकदमें दर्ज हो चुके हैं। इनमें हत्या के 245, हत्या के प्रयास के 328, डकैती के 19, लूट के 140, अपहरण के 911, बलात्कार के 791, बलवा के 68, नकबजनी के 674, चोरी के 3216 और अन्य अपराध 18911 दर्ज हुए हैं। हर चौबीस घंटे का औसत निकाला जाए तो हर दिन प्रदेश में पांच से ज्यादा हत्याएं हो रही हैं। बीस से ज्यादा अपहरण और बलात्कार के 16 मामले हर चौबीस घंटे में सामने आ रहे हैं।

हर महीने होती थी क्राइम मीटिंग, अब महीनों से नहीं हुई
पुलिस अफसरों की मानें तो समय—समय पर होने वाली क्राइम बैठकों के कम होने के कारण भी अपराध बढ़े हैं। दरअसल भाजपा के कार्यकाल में होम मिनिस्टर गुलाबचंद कटारिया लगभग हर महीने पुलिस मुख्यालय में क्राइम रिव्यू बैठक करते थे। इनमें प्रदेश के आला पुलिस अधिकारी एक महीने के काम काज के साथ मौजूद रहते थे। इन बैठकों से पहले जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक अपने थानाधिकारियों से रिव्यू लेते और इसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय तक पहुंचती थी। लेकिन इस बार सीएम के बार खुद ही गृह विभाग है। व्यवस्तता ज्यादा होने के कारण हर महीने होने वाली बैठकें कई महीनों से नहीं हो सकी है। हांलाकि पुलिस मुख्यालय प्रदेश में होने वाले अपराधों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

पुलिस खुद ही तनाव में, कैसे थमें अपराध
अपराध को रोकने में लगी पुलिस के सामने भी बड़ी परेशानी है। अफसरों या परिवार के अन्य मामलों के चलते पुलिसकर्मी भी दबाव में हैं।डेढ़ साल के दौरान कई पुलिसकर्मियों ने सुसाइड़ किया है और कईयों ने प्रयास भी किया है। हाल ही में चुरू के थानाधिकारी विष्णु दत्त के केस में राजनीतिक एंगल भी सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब पुलिस मुख्यालय ने कुछ सीनियर पुलिस अफसरों की टीम तैयार की है जो प्रदेश में पुलिसकर्मियों से संपर्क कर उन पर दबाव के कारणों को खोज रही है।

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