चिटफंड के मकड़जाल में फंसे करोड़ों, लाखों निवेशकों को नहीं मिल रही राहत

चिटफंड के मकडज़ाल में फंसे करोड़ों, लाखों निवेशकों को नहीं मिल रही राहत

By: anandi lal

Updated: 04 Apr 2019, 05:36 PM IST

शरद विश्वास कुमार/जयपुर। प्रदेश में पोंजी कंपनियों ने अपना मकडज़ाल फैला रखा है। इस मकडज़ाल में लाखों निवेशक फंस रहे हैं। सख्त कानून के अभाव में हजारों करोड़ के घोटालेे करने के बाद भी इन कंपनियों के मालिकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 6 कंपनियों ने लाखों निवेशकों के करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि का घोटाला किया है। पुलिस और एसओजी ने कार्रवाई की लेकिन अभी निवेशकों को उनकी धनराशि नहीं मिल पाई है। हाल ही सीकर में डायमंड कंपनी के नाम पर निवेश के मामले में 30 हजार से अधिक निवेशकों के साथ ठगी हुई है। चौमूं निवासी 5 लोगों के खिलाफ 300 करोड़ से अधिक के घोटाले का मामला दर्ज हुआ है।
इन कंपनियों के मालिक बेरोजगारों को मोटे वेतन का झांसा देकर एजेंट बनाते हैं। मुख्य रूप से इनका निशाना ग्रामीण क्षेत्र और गृहणियां होती हैं। एजेंटों के माध्यम से कम पढ़े लिखे लोगों को कम समय में पैसा दोगुना-तिगुना करने का लालच दे फंसाते हैं। सस्ते में जमीन, ट्री प्लांटेशन और गोल्ड बांड सहित कई प्रकार के झांसे दिए जाते हैं। शुरु में कुछ को दोगुनी राशि लौटाते हैं।

सख्त कानून की कमी से फल फूल रही कंपनियां

ये हैं प्रमुख मामले
पीएसीएल....राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित एक दर्जन से अधिक राज्यों में 49 हजार करोड़ का घोटाला।
अरबुदा क्रेडिट कॉपरेटिव सोसायटी...गुजरात और राजस्थान में करीब 100 करोड़ रुपए का घोटाला।
पिनकॉन स्कीम...राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में करीब क्र1600 करोड़ का घोटाला।
गोल्ड सुख स्कीम...राजस्थान में करीब 300 करोड़ रुपए का घोटाला।
डायमंड कंपनी... राजस्थान में 300 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला।

केस-1
पीसीएल कंपनी में मैंने अपने नाम, पत्नी मंजू यादव तथा बेटी सीमा यादव के नाम 3.5 लाख रुपए जमा करवाए थे। हमने हमारी खून पसीने की गाढ़ी कमाई बेटी की शादी के लिए जमा की थी। 7 वर्ष हो गए अभी तक भी पैसा नहीं मिला है। मैं इस कंपनी का एजेंट भी था अपने रिश्तेदारों एवं आस-पड़ोस के जानकारों के पैसे भी लगाए थे। वर्ष 2014 में कंपनी बंद हो गई, रिश्तेदार और आस पड़ोस कि लोग अब पैसे का तकाजा कर रहे हैं। मदन सिंह यादव, निवासी उदयपुर
केस-2
पीएसीएल कंपनी में मैंने स्वयं, माता, पिता, पत्नी और बेटे के नाम से कुल 13 पॉलिसियां जमा करवाई थी। जिसकी कुल मूल रकम 10 लाख रुपए है। यह परिवार की छोटी-छोटी बचत से बचाए हुए रुपए थे, जिसका भविष्य में मकान बनाने एवं बच्चों की पढ़ाई में उपयोग होना था। आज 8 वर्ष से अधिक का समय हो गया पैसा नहीं मिल रहा। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आए हुए भी 3 वर्ष हो गए लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिला। गणपत सिंह तंवर, निवासी टोंक

केंद्रीय कानून
बैनिंग ऑफ इरेग्यूलेटड डिपॉजिट स्कीम बिल 2018 में केंद्र सरकार ने अनियोजित तरीके से चलने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त प्रावधान किए हैं। कंपनी के काम को बंद करने, जमा योजना को बढ़ावा देने पर कठोर सजा के साथ संपत्ति जब्त करने का अधिकार दिया गया है।

यह करे सरकार
पोंजी कंपनियों के खिलाफ सख्त कानून लाया जाए। कानून में कंपनी संचालकों के खिलाफ सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान हो, निवेशकों के पैसे को लौटाने के लिए व्यवस्था की जाए। कंपनियों के रजिस्ट्रेशन चिट फंड एक्ट के तहत किए जाएं।

राज्य में अलग से कानून नहीं
पोंजी कंपनियों के खिलाफ अलग से कानून नहीं होने से उन पर धोखाधड़ी के तहत धारा 420 में कार्रवाई होती है। आरोपी को गिरफ्तार करने का प्रावधान है, उसकी संपत्ति जब्त करने का अधिकार नहीं है। सजा के प्रावधान के तहत 5 से 7 साल तक की जेल हो जाती है। इस तमाम कवायद में अधिकांश आरोपी अपने परिवारजनों के नाम पर संपत्ति हस्तांतरित कर देता है, जिसे जब्त करने का कानून नहीं है।

लम्बी प्रक्रिया

निवेशकों में वित्तीय जागरुकता के अभाव में इस प्रकार की ठगी होती है। रोकने के लिए कानून हैं, लेकिन प्रोसेस इतना लंबा है कि कार्रवाई समय पर नहीं हो पाती। प्रवर्तन निदेशालय को संपत्ति सीज करने के अधिकार हैं, लेकिन उनके पास फोर्स इतनी नहीं है कि वो तमाम मामलों में तुरंत कार्रवाई कर सके। ओमेन्द्र भारद्वाज, पूर्व डीजीपी

बन रहा एक्ट
पोंजी कंपनियों के मामले में पुलिस और एसओजी आपराधिक मामले दर्ज कर कार्रवाई करती है, वर्तमान में कई कंपनियों के मामलों पर कार्रवाई चल रही है। इन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए पीआइडी एक्ट राज्य सरकार बना रही है। डॉ. भूपेन्द्र सिंह, डीजी, एटीएस एण्ड एसओजी

राज्य में अलग से कानून नहीं
पोंजी कंपनियों के खिलाफ अलग से कानून नहीं होने से उन पर धोखाधड़ी के तहत धारा 420 में कार्रवाई होती है। आरोपी को गिरफ्तार करने का प्रावधान है, उसकी संपत्ति जब्त करने का अधिकार नहीं है। सजा के प्रावधान के तहत 5 से 7 साल तक की जेल हो जाती है। इस तमाम कवायद में अधिकांश आरोपी अपने परिवारजनों के नाम पर संपत्ति हस्तांतरित कर देता है, जिसे जब्त करने का कानून नहीं है।

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