मॉल्स में नहीं ग्राहक, दुकान का किराया भी बना मुसिबत

गुलाबी नगरी ( Pink City ) में शॉपिंग मॉल्स ( Shopping malls ) को फिर से खुलने की इजाजत दे दी गई है। सरकार से मिली इस अनुमति के बाद सुरक्षा इंतजामों ( security arrangements ) के साथ शॉपिंग मॉल खोल भी दिए गए, लेकिन इन मॉल्स ( malls ) में अभी भी ग्राहक नहीं लौटे हैं। कई मॉल्स में तो सिर्फ 20 से 25 प्रतिशत ग्राहक ( customers ) ही पहुंच रहे हैं। शहर के सबसे व्यवस्तम एक मॉल में शोरूम चलाने वाली व्यापारी ने कहा कि यहां गिने-चुने ग्राहक ही आ रहे हैं।

By: Narendra Kumar Solanki

Published: 30 Jun 2020, 02:00 PM IST

जयपुर। गुलाबी नगरी में शॉपिंग मॉल्स को फिर से खुलने की इजाजत दे दी गई है। सरकार से मिली इस अनुमति के बाद सुरक्षा इंतजामों के साथ शॉपिंग मॉल खोल भी दिए गए, लेकिन इन मॉल्स में अभी भी ग्राहक नहीं लौटे हैं। कई मॉल्स में तो सिर्फ 20 से 25 प्रतिशत ग्राहक ही पहुंच रहे हैं। शहर के सबसे व्यवस्तम एक मॉल में शोरूम चलाने वाली व्यापारी ने कहा कि यहां गिने-चुने ग्राहक ही आ रहे हैं। पहले हमारे यहां पांच लोग काम करते थे। अब इनमें से सिर्फ दो बचे हैं। लेकिन दुकान पर मौजूद इन दोनों कर्मचारियों को भी दिनभर खाली ही बैठना पड़ता है।
लॉकडाउन से पहले हम 90 हजार रुपए महीना शोरूम का किराया देते थे। अब इतना किराया चुका पाना संभव नहीं है। फिलहाल हम अपनी कुल आमदनी का 50 फीसदी किराये के रूप में देंगे।
मॉल में डिजिटल कैमरे का शोरूम चलाने वाले कारोबारी का कहना है कि शहर में लोग बड़ी तादाद में कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। यही कारण है कि लोग अभी भी खरीदारी के लिए बाहर निकलने से डर रहे हैं। हम प्रतिदिन शोरूम खोलने से पहले पूरे इलाके को सैनिटाइज करवाते हैं। अभी तो हम शोरूम का किराया दे पाने में भी सक्षम नहीं हैं। हमने किराया कम करने की मांग की है। यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर शोरूम खाली करने के अलावा हमारे पास और कोई विकल्प नहीं बचेगा। दूसरे व्यापारी भी बस दुकान खोलने के लिए मॉल में आ रहे हैं। अधिकांश लोग अभी भी केवल आवश्यक वस्तुओं की ही खरीदारी कर रहे हैं।
मॉल्स को लेकर हुए एक सर्वे के मुताबिक मॉल्स में स्थित रेस्टोरेंट की बिक्री 70 फीसदी गिर गई है। कपड़े और परिधान की खुदरा बिक्री 69 फीसदी और घड़ी और अन्य व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं का कारोबार 75 फीसदी तक नीचे आ गया है। ऐसे में हालत यह है कि एक ओर तो शोरूम मालिक किराए के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। वहीं शोरूम चलाने वाले दुकानदारों के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं हैं।

Narendra Kumar Solanki Desk
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