खुद को सेना का जवान बताते, फर्जी आईडी कार्ड से भरोसा भी दिलाते, फिर बनाते लोगों को शिकार

jaipur crime news : ई-कॉमर्स वेबसाइट और सोशल मीडिया सस्ते सामान का झांसा दे, लोगों को ठगते

By: Deepshikha Vashista

Published: 01 Jul 2019, 02:58 PM IST

अविनाश बाकोलिया / जयपुर. ई-कॉमर्स वेबसाइट और सोशल मीडिया पर सस्ता सामान बेचने का झांसा देकर ठगने वालों का गिरोह इन दिनों खूब सक्रिय है। गिरोह के बदमाश वेबसाइट पर सस्ते उत्पाद बेचने का झांसा देकर लोगों को फंसाते हैं। खुद को सेना का जवान या कर्मचारी बताकर सेना का फर्जी आइ-कार्ड, कैंटीन कार्ड, आधार कार्ड तक मोबाइल पर भेजते हैं। शिकार फंसने पर सिक्योरिटी अमाउंट, इंश्योरेंस, जीएसटी टैक्स आदि के नाम पर लोगों से पैसा ऐंठते हैं। शहर के थानों में रोजाना ऐसे 2-3 मामले दर्ज हो रहे हैं।

कम कीमत का लालच देते

साइबर क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार ई-कॉमर्स वेबसाइट, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर कम कीमत पर फोन, स्कूटर, बाइक उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ठग पहले तो ई-कॉमर्स वेबइसाइट, सोशल मीडिया पर आइडी बनाते हैं। फिर फैक्ट्री से फोन पैक होते हुए, स्कूटर या बाइक की डिलीवरी करते हुए के फोटो-वीडियो डालते हैं। कम कीमत का लालच देते हैं।

जाल में फंसकर कोई खरीदार संबंधित नम्बर पर फोन करे तो ये बदमाश बुकिंग कन्फर्म करने का झांसा देकर कुछ रुपए दिए गए एकाउंट में डलवाते हैं। शेष राशि डिलीवरी के समय देने के लिए कहते हैं। पूरे रुपए मिलने पर ये ठग मोबाइल बंद कर लेते हैं। जयपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र के लगभग सभी थानों में पिछले दिनों में ऐसी ठगी के मामले दर्ज हुए हैं।


यों फायदा उठा रहे ठग : 

पेटीएम वॉलेट में पैसे चले जाएं तो रिटर्न नहीं होते। केवल वॉलेट धारक ही पैसे लौटा सकता है। साइबर अपराधी इसी का फायदा उठा रहे हैं।


ऐसे ठगों को पकडऩा मुश्किल

साइबर थाना पुलिस का कहना है कि ऐसे अपराधियों को पकडऩा मुश्किल होता है क्योंकि अपराधी हर बाद नए मोबाइल नंबर से नए शिकार को फांसते हैं। लोगों को शिकार बनाकर एकाउंट का नाम बदल लेते हैं, फिर नए नाम से ठगी करते हैं।


सैन्यकर्मियों के लीक हुए फोटो-दस्तावेज!

पुलिस का कहना है कि सेना के कुछ कर्मियों के फोटो और दस्तावेज ई-कॉमर्स वेबसाइट से लीक हो चुके हैं। जालंधर में जयकिशन, कश्मीर में तैनात प्यारेलाल जैसे कई सैन्य कर्मियों ने पहले ई-कॉमर्स वेबसाइट पर सामान बेचने का विज्ञापन दिया था। उसके बाद ठगों ने उनके आर्मी कार्ड, कैंटीन कार्ड आदि दस्तावेज मंगवा लिए। ठग उन्हीं से लोगों को ठग रहे हैं। पुलिस जयकिशन और प्यारेलाल तक पहुंची तो पता चला कि उनके दस्तावेज लीक हुए हैं।


यों गंवा दी पसीने की कमाई

केस-01:

सायपुरा गांव निवासी अनिल ने ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बाइक का विज्ञापन देखकर योगेश नामक संबंधित व्यक्ति को फोन किया। योगेश ने खुद को जैसलमेर में सेना में चालक बताया। अगले दिन विजेन्द्र सैनी नामक व्यक्ति ने फोन कर अनिल से कहा कि मैं डिलीवरी देने आ रहा हंू, गूगल पे से पैमेंट कर दीजिए। अनिल ने पहले 60 हजार और बाद में सिक्योरिटी अमाउंट के नाम पर 11550 रुपए डाल दिए। ठग कई बार में अनिल से 84 हजार रुपए हड़प गए।


केस-02:

गिरिराज कॉलोनी श्रीराम की नांगल निवासी दिनेश सैनी ने 17 जून को ई-कॉमर्स वेबसाइट पर विज्ञापन देखकर 70 हजार की बाइक 65 हजार रुपए में बुक कराई। दिनेश ने फोन किया तो ठग ने कहा मैं आर्मी में हंू। उसने आर्मी का फर्जी कैंटीन कार्ड, आइडी कार्ड, आरसी की कॉपी मोबाइल पर भेजी। 1300 रुपए पेटीएम से लेकर ठग ने ड्राइवर के नंबर दिए। अगले दिन ड्राइवर ने कहा कि मैं आ गया हंू। उसने झांसा देकर 79 हजार रुपए डलवा लिए, बाइक नहीं दी।


केस-03:

मानसरोवर निवासी उषा गुप्ता ने एसी का विज्ञापन देखकर संबंधित फोन नम्बर पर कॉल किया तो ठग ने कहा कि मैं आर्मी में हंू। मेरा तबादला हो गया है इसलिए एसी बेचना चाहता हंू। झांसे में आकर उषा ने उसके बताए अनुसार ऑनलाइन पैमेंट ऐप से 5 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। फिर डिलीवरी चार्ज, जीएसटी आदि के नाम पर 10 हजार रुपए और दे दिए। एसी नहीं पहुंचने पर उषा ने फोन किया तो ठग ने जान से मारने की धमकी तक दे दी।

 

फोन नंबर बंद

साइबर विषेशज्ञ आयुष भारद्वाज ने बताया कि फर्जी नाम से सिम लेकर ठग पेटीएम अकाउंट बनाते हैं। पैसा आते ही सिम बंद कर लेते हैं। उनसे वापस संपर्क करने का जरिया नहीं बचता।

 

यहां से चल रहे रैकेट

पुलिस ने बताया कि राजस्थान के भरतपुर, अलवर, हरियाणा के मेवात सहित मथुरा और आगरा से चल रहे हैं।

ये बरतें सावधानी :

- ई-कॉमर्स वेबसाइट से खरीदारी भले ही करें लेकिन किसी को भी भुगतान बैंक खाते में ही करें
- सामान बेचने वाले के पेटीएम का केवायसी मांगें
- ऑनलाइन पैमेंट ऐप से भुगतान करते समय सावधानी बरतें

 

ठग हर बार नए मोबाइल नंबर से नए पीडि़त को फांसते हैं। पैसे ऐंठने के बाद सिम बंद कर लेते हैं। जागरूक रहने की जरूरत है।

संजय आर्य, थानाधिकारी, साइबर थाना

 

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