महिलाओं को फंसाने का अपराधियों ने बदला ट्रेंड, कभी दोस्ती तो कभी गिफ्ट के बहाने बना रहे शिकार

जयपुर में शातिरों ने दो महिलाओं को ठगा, 2.55 लाख रुपए गंवाए, सायबर थाने में मामला दर्ज

जयपुर. ठगी के तरीकों का पता होने के बाद भी लोग शातिर बदमाशों के झांसे में आकर के रुपए गंवा रहे हैं। इस कारण शहर में सायबर ठगी के मामले थम नहीं रहे हैं। पुलिस की एडवाइजरी को भी लोग नजरअंदाज कर रहे हैं। पेटीएम केवायसी के नाम पर पिछले एक सप्ताह में एक दर्जन के करीब मामले ठगी के सामने आ चुके हैं और इसका सिलसिला थम नहीं रहा है। अब विधायकपुरी निवासी एक महिला दो दिन में दो बार ठगी की शिकार हो गई। वहीं सिरसी रोड निवासी एक महिला फेसबुक पर दोस्त के झांसे में आकर रुपए गंवा बैठी। दोनों ही मामले में पुलिस आयुक्तालय के विशेष अपराध एव सायबर थाने में दर्ज हुए हैं।

सेवानिवृत्त शिक्षिका के साथ ठगी

पुलिस ने बताया कि हथरोई निवासी सेवानिवृत्त शिक्षिका उमा निगम के साथ ठगी की वारदात हुई है। उनके भाई गोपालबाड़ी निवासी जितेन्द्र निगम रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अनुसार 15 जनवरी को पेटीएम कस्टमर केयर से फोन आया और उसने केवायसी अपडेट करने को कहा। उसने मोबाइल फोन पर क्विक सपोर्ट स्टार्ट एप डाउनलोड करवाया और चार बार में बैंक खाते से लगभग 80 हजार रुपए निकाल लिए।

अगले ही दिन फिर एक नंबर से फोन आया उसने खुद को एसबीआई क्रेडिट कार्ड का प्रतिनिधि बताते हुए रुपए वापस दिलाने काि झांसा दिया और 45 हजार रुपए निकाल लिए। आरोपियों ने पीडि़ता से 1.25 लाख रुपए की ठगी कर ली।

गिफ्ट भेजने की कह लिया झांसे में

उधर, सिरसी रोड निवासी रुचि वर्मा ने भी रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पीडि़ता ने रिपोर्ट में बताया कि उसके फेसबुक अकाउंट पर विदेशी युवक फिलिप एड्रसन जुड़ा हुआ था। कुछ महीनों से उससे वाट्सऐप पर भी बातचीत शुरू हो गई थी। उसने कहा कि मैं आपके और दो बच्चों के लिए कुछ गिफ्ट भेज रहा हूं। कोरियर कम्पनी से किसी का फोन आया और बताया गया कि 42 लाख रुपए भेजे हैं। इसके लिए टेक्स देना होगा और पीडि़ता ने झांसे में आकर के 35 हजार रुपए जमा करवा दिए।

फिर से फोन आया कि रकम ज्यादा है 95 हजार रुपए और जमा करवाने होंगे, ऐसा नहीं करने पर ऑफिसर्स आपके घर आकर पकडेंग़े। डर के कारण पीडि़ता ने अपनी एफडी तुड़वाकर के 95 हजार रुपए भी जमा करवा दिए। बाद में उन्होंने और रकम की मांग की। रुपए देने से मना करने पर उनके मोबाइल नंबर भी बंद आने लगे और न ही गिफ्ट भेजा।

Deepshikha Vashista Desk
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