काम का शेडूल गड़बड़ाने से फ़ूड इंडस्ट्री और रिटेल सेक्टर कर्मचारितों में बढ़ रही मनोवैज्ञानिक समस्यायें

काम का शेडूल गड़बड़ाने से फ़ूड इंडस्ट्री और रिटेल सेक्टर कर्मचारितों में बढ़ रही मनोवैज्ञानिक समस्यायें
अनिश्चित वर्क शिड्यूल से लोगों में मनोवैज्ञानिक परेशानियां बढ़ीं

Mohmad Imran | Updated: 15 Jul 2019, 05:00:18 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

अनिश्चित वर्क शिड्यूल से लोगों में मनोवैज्ञानिक परेशानियां बढ़ीं

26 फीसदी श्रमिक किसी न किसी प्रकार की मनोवैज्ञानिक समस्या से जूझ रहे थे फूड चेन और ऑफिस कल्चर में

दुनिया भर के महानगरों में काम का इतना दबाव है कि लोग अतिरिक्त समय देकर भी उसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं इस दबाव के चलते लोग अपने परिवार को भी समय नहीं दे पा रहे हैं। हाल ही हुए एक शोध अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। शोधकर्ताओं ने कर्मचारियों से बात की तो सामने आया कि नौकरी के शुरुआती कुछ सप्ताह में वे अपने परिवार को सप्ताह में 30 घंटे का समय दे रहे थे। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया यह घटकर 20 फिर 12 और अब महज 4 घंटे रह गया है। विशेष रूप से फूड सर्विस (खाद्य सेवा) और खुदरा (रिटेल) के क्षेत्र में स्थिति ज्यादा खराब है। शोधकर्ता डैनियल श्नाइडर और क्रिस्टीन हरनेट ने शोध में पाया कि ऐसे कर्मचारियों में अनिद्रा, मानसिक समस्या और नाखुश रहना आम लक्षण हैं।

84 हजार लोगों पर सर्वे
डैनियल और क्रिस्टीन ने 'द शिफ्ट प्रोजेक्ट' शोध से न्यूनतम वेतन, काम के अनिश्चित घंटे और अनिश्चित वर्क शिड्यूल पर अमरीका के बड़े शहरों में देश की 80 सबसे बड़ी फूड सर्विस कंपनियों और रिटेल चेन के 84 हजार से ज्यादा श्रमिकों पर सर्वे किया। दोनों जानना चाहते थे कि इतने दबाव में काम करने वाले कर्मचारियों की मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है। अध्ययन में सामने आया कि लगभग दो-तिहाई श्रमिकों को दो सप्ताह से कम के अंतराल में अपना साप्ताहिक कार्य शेड्यूल मिलता है। 16 फीसदी श्रमिकों को महज 72 घंटे पहले इसकी जानकारी मिलती है। इतने कम समय में परिवार, बच्चों की देखभाल और अन्य कामों के लिए समय निकालना मुश्किल है। रात 11 बजे स्टोर बंद करने के कुछ ही घंटों बाद उन्हें वापस इसे खोलना होता है। इसे 'क्लोपिंग' कहा जाता है। एक चौथाई कर्मचारियों को ऑर्डर लेने के लिए हमेशा कॉल पर बने रहने के लिए कहा जाता है।

26 फीसदी मनोवैज्ञानिक समस्याओं से ग्रसित
अत्यधिक दबाव वाला वर्क शिड्यूल कर्मचारियों की सेहत और मनोदशा पर बुरा असर डाल रहा है। 26 फीसदी श्रमिक किसी न किसी प्रकार की मनोवैज्ञानिक समस्या से जूझ रहे थे। घबराहट, निराशा और नकारात्मक भावनाओं से भी ये लोग परेशान थे। न्यूनतम आय वाले वाले कर्मचारियों में यह समस्या ज्यादा थी। जिन 14 फीसदी कर्मचारियों की छुट्टी रद्द की गई थी उन्होंने मानसिक रूप से ज्यादा परेशान होना बताया। 24 प्रतिशत ने खराब नींद की शिकायत की। एक चौथाई कर्मचारियों को ऑर्डर लेने के लिए हमेशा कॉल पर बने रहने के लिए कहा जाता है।

सुधार के प्रयास भी हो रहे हैं
ऐसा नहीं है कि सिर्फ समस्या ही बढ़ रही है। साल 2014 के बाद से सैन फ्रांसिस्को, सिएटल, न्यूयॉर्क और फिलाडेल्फिया ने शेड्यूलिंग नियमों में सुधार किया है। सिएटल में यह नियम बनाया है कि नियोक्ताओं को कम से कम दो सप्ताह के कार्य शेड्यूल की सूचना कर्मचारियों को पहले से देनी होगी। अगर वे इसमें कोई भी बदलाव करते हैं तो उन्हें ओवरटाइम के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान भी करना होगा। कर्मचारियों की शिफ्टों के बीच 10 घंटे का आराम भी देना होगा।

 

अगर वे शिड्यूल में बदलाव करते हैं तो भी उन्हें कर्मचारी को आधा वेतन देना होगा। इसी प्रकार न्यूयॉर्क में फास्ट-फूड सर्विस में काम करने वाले कर्मचारियों को कम से कम 72 घंटे पहले काम का शिड्यूल देना अनिवार्य होगा। अंतिम मिनट में शिफ्ट रद्द करने पर भी कर्मचारी को भुगतान करना होगा। वहीं कॉल-ऑन शिफ्ट के लिए दबाव नहीं डाल सकते। अगर कर्मचारी अतिरिक्त समय देता है तो उसे भुगतान करना होगा।

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