बहुचर्चित दारा सिंह एनकाउंटर मामले में अहम फैसला, अदालत ने सभी आराेपियाें काे किया बरी

बहुचर्चित दारा सिंह एनकाउंटर मामले में अदालत ने सभी आराेपियाें काे बरी कर दिया है।

By: santosh

Updated: 13 Mar 2018, 07:23 PM IST

जयपुर। प्रदेश के बहुचर्चित दारा सिंह एनकाउंटर मामले में मंगलवार को एडीजे कोर्ट-14 ने सभी 14 आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया है। जज रमेश कुमार जोशी ने अपना फैसला सुनाते हुए सभी आरोपितों को सभी धाराओं में दोषमुक्त कर दिया है।

 

राजधानी के मानसरोवर इलाके में 23 अक्टूबर 2006 को हुए प्रकरण में दारा सिंह की पत्नी सुशीला देवी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने 17 आरोपितों के खिलाफ डीजे डिस्ट्रिक्ट में चार्जशीट पेश की थी।

 

डीजे डिस्ट्रिक्ट के बाद डीजे मैट्रो, जाली नोट प्रकरण की विशेष अदालत से होता हुआ एडीजे-14 में मामलें की अंतिम बहस हुई। पूरे प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने 194 गवाह, 705 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने 463 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए अपनी तरफ से कोई भी गवाह पेश नहीं किया।

 

यू चला घटनाक्रम
इस मामले में मानसरोवर थाना क्षेत्र के कमला नेहरू नगर में दारासिंह एनकाउंटर के बाद तत्कालीन मंत्री राजेन्द्र राठौड़, तत्कालीन एडीजी एके जैन समेत 17 लोगों को सीबीआई ने आरोपित बनाया, 11 मार्च 2011 में सीबीआई ने इंस्पेक्टर सत्यनारायण गोदारा, निसार खान, नरेश शर्मा को गिरफ्तार किया।15 मई 2011 को तत्कालीन एसपी व वर्तमान में एडीजी ए.पौन्नुचामी को गिरफ्तार किया गया। 26 मई 2011 को सब इंस्पेक्टर मुंशीलाल की गिरफ्तारी हुई। फरवरी 2015 में एडीजी एके जैन को भी हाई कोर्ट ने आरोप मुक्त किया। फरारी के दौरान आरोपी विजय चौधरी की मौत हो गई।

 

14 आरोपिताों को सुनाया गया फैसला
एडीजी ए पौन्नुचामी- एडि.एसपी अरशद अली- इंस्पेक्टर सत्यनारायण गोदारा- इंस्पेक्टर निसार खान- इंस्पेक्टर नरेश शर्मा- इंस्पेक्टर सुभाष गोदारा- सब इंस्पेक्टर राजेश चौधरी- सब इंस्पेक्टर जुल्फीकार- सब इंस्पेक्टर अरविन्द भारद्वाज- सब इंस्पेक्टर सुरेन्द्र सिंह- रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर मुंशीलाल- हैड कांस्टेबल बद्री प्रसाद- कांस्टेबल जगराम- ड्राइवर सरदार सिंह

 

मामला
23 अक्टूबर 2006 को उस समय शुरू हुआ जब आदतन अपराधी दारा सिंह को मानसरोवर थाना इलाके में एसओजी ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद दारा सिंह की पत्नी सुशीला देवी ने मामले में 26 अक्टूबर 2006 को तत्कालीन आईजी ग्वाला को शिकायत की थी।

-4 नवंबर 2006 को सुशीला ने अदालत याचिका पेश कर एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
-सरकार ने 22 दिसंबर 2009 को तत्कालीन आईएएस रोहित कुमार रोहित कुमार को जांच दी, जिसने 8 अप्रैल 2010 को सरकार को जांच रिपोर्ट सौंपी। -19 जनवरी 2007 को सरकार ने भी जांच कमेटी बनाई
- 4 अक्टूबर को सीबीआई को जांच सौंपी गई
-मामले में 5 अप्रैल 2012 को राजेंद्र राठौड़ को गिरफ्तार किया
-सीबीआई ने 194 गवाहों के बयान कराएं 705 दस्तावेज पेश किए
- बचाव पक्ष में भी 463 दस्तावेज पेश किए
-ए पुन्नोचामी मामले में सबसे अधिक लंबे समय तक जेल में रहे, सीबीआई ने 14 मई 2011 को गिरफ्तार किया था 15 जुलाई 2016 को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिली है
- सबसे पहले 26 मई 2011 को मुंशीलाल को गिरफतार किया जिसे ट्रॉयल के दौरान ही जमानत मिल गई थी

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