Annapurna Jayanti 2020 जब शिवजी बने भिक्षुक, माता पार्वती ने रूप बदलकर बांटा भोजन, जानें अन्नपूर्णा जयंती की अनूठी कथा

मार्गशीर्ष यानि अगहन माह की पूर्णिमा का बहुत महत्व है। इस दिन दत्त जयंती के साथ ही अन्नपूर्णा जयंती भी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन पार्वतीजी ने माता अन्नपूर्णा का रूप लिया था। इस दिन अन्नपूर्णा माता की पूजा के साथ घर के भंडारगृह की पूजा का विधान है। ऐसा करने से घर धन—धान्य से भरा रहता है और कभी भोजन की कमी नहीं होती। अन्नपूर्णा जयंती पर अन्नदान का सबसे ज्यादा महत्व है।

By: deepak deewan

Published: 29 Dec 2020, 09:02 AM IST

जयपुर. मार्गशीर्ष यानि अगहन माह की पूर्णिमा का बहुत महत्व है। इस दिन दत्त जयंती के साथ ही अन्नपूर्णा जयंती भी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन पार्वतीजी ने माता अन्नपूर्णा का रूप लिया था। इस दिन अन्नपूर्णा माता की पूजा के साथ घर के भंडारगृह की पूजा का विधान है। ऐसा करने से घर धन—धान्य से भरा रहता है और कभी भोजन की कमी नहीं होती। अन्नपूर्णा जयंती पर अन्नदान का सबसे ज्यादा महत्व है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस दिन अन्नदान करने से ही पूरे अगहन माह में अन्नदान करने का फल मिलता है। अन्नपूर्णा जयंती के दिन भूखों को भोजन जरूर करवाना चाहिए। यह सबसे फलदायी होता है। इस दिन मां अन्नपूर्णा की विधिविधान से पूजा करने की परंपरा है। पूजा के बाद कई तरह के मिष्ठान्न भोग के रूप में अर्पित करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए.

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पूर्णिमा पर अन्नपूर्णा देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए घर में बना भोजन ही करना चाहिए। घर में बना हुआ भोजन गरीबों को खिलाना चाहिए। इस दिन भूलकर भी अन्न का अनादर नहीं करना चाहिए। इस दिन भंडारघर में दीपक जलाकर माता पार्वती एवं भगवान शंकरजी की विधिवत पूजन करें। साथ ही चूल्हे की भी पूजा करनी चाहिए। पूजन करने के बाद अपने माता अन्नपूर्णा से घर में सदा धन—धान्य भरे रहने की प्रार्थना करें।

ज्योतिषाचार्य पंडित जीके मिश्रा के अनुसार एक बार धरती पर अकाल के कारण हाहाकार मच गया। तब शिवजी ने भिक्षुक का रूप और पार्वतीजी ने अन्नपूर्णा माता का रूप लेकर लोगों को भोजन बांटा। पार्वतीजी मार्गशीर्ष अथवा अगहन पूर्णिमा के दिन ही मां अन्नपूर्णा के रूप में प्रकट हुईं थीं। इसीलिए अगहन पूर्णिमा पर अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। यही कारण है कि इस दिन अन्न दान का भी खास महत्व है।

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