जयपुर में बेटी ने निभाया फर्ज, पिता को बेटे की तरह दी मुखाग्नि

बेटों को बेटियों पर तवज्जो देते थे कि उनकी अर्थी को कांधा देगा, चिता को अग्नि देगा, लेकिन अब ये मिथक भी टूटने लगा है। एक नहीं ऐसे कई उदाहरण सामने आ रहे हैं। बेटियां अपने पिता के अन्तिम संस्कार को पूरे रीति रिवाजों के साथ निभा रही है।

हमारे बड़े इसलिए बेटों को बेटियों पर तवज्जो देते थे कि उनकी अर्थी को कांधा देगा, चिता को अग्नि देगा, लेकिन अब ये मिथक भी टूटने लगा है। एक नहीं ऐसे कई उदाहरण सामने आ रहे हैं। बेटियां अपने पिता के अन्तिम संस्कार को पूरे रीति रिवाजों के साथ निभा रही है। राजधानी जयपुर में ही बीते दिनों जयसिंहपुरा खोर की प्रीति शर्मा ने अपने पिता के अन्तिम संस्कारों को शिद्दत के साथ निभाया। प्रीति का कहना था कि पिता ने दोनों बहनों को पाल पोसकर इस काबिल बनाया। अब बेटों की कमी हमने उनको नहीं होने दी। अब जब उनके अंतिम संस्कार का समय है तो हम पीछे क्यों रहे। हमारे पिता ने हमको बेटा मानकर की पाला है। बता दे कि प्रीति की बहन की शादी हो चुकी है। मां की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। घर में प्रीति ही अकेली बची है। इसके बाद भी प्रीति ने अपने फर्ज को बखूबी निभाया। उधर बीते शनिवार को ही मानसरोवर में भी एक बेटी ने अपने पिता के अन्तिम संस्कार में अर्थी को कांधा दिया और चिता को अग्नि। स्वर्णपथ निवासी श्वेता भाटी ने पिता को न सिर्फ मुखाग्नि दी बल्कि अंतिम संस्कार की हर वह रस्म निभाई, जिनकी कल्पना एक पुत्र से की जाती है। मानसरोवर स्वर्णपथ निवासी ओमप्रकाश भाटी की 17 जनवरी को मानसरोवर के वीटी रोड पर एक पिकअप द्वारा टक्कर मार देने के कारण दुर्घटना में मौत हो गई थी। श्वेता भाटी अपने पिता की इकलौती बेटी है। श्वेता का कहना है कि उसके पिता ने बेटे और बेटी में फर्क नहीं किया, मेरा हमारा सौभाग्य है कि हमें अपने पिता का अन्तिम संस्कार करने का मौका मिला है। बता दे कि श्वेता के पिता मानसरोवर स्थित एक सैलून में कार्य करते थे। श्वेता अभी पढ़ाई कर रही है। श्वेता घर में पिता के साथ ही रहती थी, उसकी मां 6 वर्ष पूर्व पारिवारिक कारणों से घर छोडकर जा चुकी है। हालांकि श्वेता ने पुत्री धर्म निभाते हुए यह साबित कर दिया कि वर्तमान समय में बेटा-बेटी बराबर हैं।

Dinesh Gautam Desk
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