बेटी नहीं बचेगी तो बहू कहां से लाओगे

बेटों की चाह ने समाज के सामने एक ऐसी विकराल स्थिति पैदा कर दी है कि विवाह के लिए लड़कों को लड़कियां नहीं मिल रही हैं। कुंवारे लड़कों का ग्राफ दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। इस चिंता को देखते हुए विभिन्न समाज की ओर से युवक-युवती परिचय सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन यहां भी चौंकाने वाले आकड़े हैं। लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या बीस फीसदी से भी कम है। राज्य के कई हिस्सों में महिला-पुरुष अनुपात चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है और लोग विवाहयोग्य लड़कियां ढूंढने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बेटियां ही नहीं बचेगी तो फिर बेटों के लिए बहु कहां से लाओगे।

By: pulakit

Published: 19 Jan 2019, 09:56 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

बेटों की चाह ने समाज के सामने एक ऐसी विकराल स्थिति पैदा कर दी है कि विवाह के लिए लड़कों को लड़कियां नहीं मिल रही हैं। कुंवारे लड़कों का ग्राफ दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। इस चिंता को देखते हुए विभिन्न समाज की ओर से युवक-युवती परिचय सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन यहां भी चौंकाने वाले आकड़े हैं। लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या बीस फीसदी से भी कम है। राज्य के कई हिस्सों में महिला-पुरुष अनुपात चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है और लोग विवाहयोग्य लड़कियां ढूंढने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बेटियां ही नहीं बचेगी तो फिर बेटों के लिए बहु कहां से लाओगे।

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