काम के प्रति दीवानगी ने पहुंचाया इस मुकाम पर

इन्हें तकनीकी विषयों पर पढऩा बहुत अच्छा लगता था। यही कारण था कि 11 साल की उम्र में ही इन्होंने एचटीएमएल सीख लिया था।

By: Archana Kumawat

Updated: 11 Jun 2020, 05:28 PM IST

इनका जन्म 1986 में अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में हुआ। पिता फिल्म और टेलीविजन में कंपोजर का काम करते थे तो मां विज्ञान की अध्यापिका थी। कुछ समय बाद ही मां-पिता के बीच विवाद होने लगा। बचपन से ही इन्हें एनीमेशन का शौक था। मां और पिता, जहां अपने-अपने कामों में वयस्त रहते, वहीं ये कंप्यूटर पर कुछ न कुछ नया सीखने का प्रयास करते। कंप्यूटर में इनकी इतनी रुचि थी कि स्कूल में सारा समय कंप्यूटर लैब में ही बिताते थे। इन्हें तकनीकी विषयों पर पढऩा बहुत अच्छा लगता था। यही कारण था कि 11 साल की उम्र में ही इन्होंने एचटीएमएल सीख लिया था। अब इन्हें वेबसाइट डिजाइन करने में बड़ा मजा आता था। यहां वे अपनी एनिमेशन के कौशल से नए-नए प्रयोग करते रहते थे। अब इन्होंने बिजनेस के लिए वेबसाइट डिजाइन करना शुरू किया। प्री स्कूल के बाद इन्हें ब्रोनॉक्स हाई स्कूल ऑफ साइंस में दाखिला दिलाया गया। कंप्यूटर के प्रति अब इनकी दीवानगी इस कदर बढ़ गई थी कि दिनभर कंप्यूटर के अलावा कुछ नहीं दिखता था। इसका परिणाम यह हुआ कि ये हाई स्कूल में बुरी तरह से फेल हो गए। इनके रिजल्ट को देखते हुए किसी स्कूल ने दाखिला नहीं दिया। इस तरह १५ साल की उम्र में इन्हें मजबूरन घर से पढ़ाई शुरू करनी पड़ी। जब ये 17 वर्ष के हुए तो माता-पिता ने तलाक ले लिया।
एनीमेशन कंपनी से की कॅरियर की शुरुआत
एनीमेशन में इनकी बचपन से ही रुचि थी। इसलिए एनीमेशन की दुनिया में कुछ नया सीखने के लिए इन्होंने फ्रेडेरेटर स्टूडियो के संस्थापक और प्रोड्यूसर फ्रेड सीबर्ट के साथ इंटर्न के रूप में कॅरियर शुरू किया। यहां इन्होंने अपना पहला इंटरनेट वीडियो नेटवर्क बनाया। यहां ये कंपनी के कोडर्स और इंजीनियर्स के साथ काम करते थे। एनीमेशन इनका पैशन था इसलिए ये कंपनी में घंटों काम में वयस्त रहते थे। इसका नतीजा यह हुआ कि कई दिनों में पूरा होने वाले एक प्रोजेक्ट को इन्होंने केवल चार घंटे में पूरा कर दिया। इसकी मेहनत को देखते हुए 16 साल की उम्र में ही कंपनी उन्हें एक अहम जिम्मेदारी देते हुए कुछ शेयर भी दे दिए गए थे। इंटर्नशिप पूरी करने के बाद ये टोकियो चले गए और वहां भी पांच महीनों तक इन्होंने कार्यों का अनुभव लिया।
फिर अपनी कंपनी शुरू करने की ठानी
टोकयो पहुंचने के बाद इनके दिमाग में आइडिया आया कि मुझे अपनी कंपनी शुरू करनी है, जिसमें में लोगों के लिए कुछ नया कर सकूं। इसी आइडिया के साथ ये वापस न्यूयॉर्क लौट गए। 2006 में इन्होंने ऑनलाइन पेरेंटिंग फोरम अर्बनबेबी के लिए भी काम किया। इसके बाद इन्होंने अपनी सॉफ्टवेयर कंसल्टिंग कंपनी शुरू की लेकिन कुछ नया करने ललक इन्हें हर समय परेशान करती थी। 2007 में जब ये 21 साल के हुए तो अपने एक इंजीनियर दोस्त के साथ मिलकर ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म शुरू किया। सिर्फ दो सप्ताह बाद ही इस साइट के लिए 75 हजार यूजर्स ने खुद को रजिस्टर कर लिया था। कंपनी शुरू करने के बाद ही इनके पास कई टेक कंपनियों से आकर्षक ऑफर आए। ये व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म टम्बलर के फाउंडर और सीईओ डेविड कार्प हैं। टम्बलर ने ब्लॉगिंग को नए आयाम दिए। वर्ष 2013 में याहू और टम्बलर ने एक समझौता किया और याहू ने टम्बलर को 1.1 बिलीयन डॉलर में अधिगृहीत कर लिया। इसके बाद भी डेविड कंपनी के सीईओ बने रहे।

Archana Kumawat Desk
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