असमंजस में निकला दिन, कल से बंद रहेंगी पशु चिकित्सा संस्थाएं

असमंजस में निकला दिन

विभाग की ओर से आदेश जारी नहीं करने से असमंजस
परेशान होते रहे कार्मिक
अधिकारियों ने कर लिए मोबाइल बंद

By: Rakhi Hajela

Updated: 19 Apr 2021, 11:38 PM IST


जयपुर, 19 अप्रेल
अपन जान जोखिम में डालकर काम कर रहे पशुपालन विभाग (Animal husbandry) के कार्मिकों लिए सोमवार का दिन परेशानी और असमंजस भरा रहा, उन्हें कोई यह बताने वाला नहीं था कि उन्हें काम करना है अथवा नहीं। यह स्थिति न केवल राजधानी बल्कि प्रदेश भर में संचालित की जा रही पशु चिकित्सा संस्थानों (Veterinary institutions) में रही। मुख्यालय स्थित जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए और कार्मिक परेशान होते रहे। कार्मिकों का कहना था कि उनके समक्ष स्थिति स्पष्ट नहीं थी कि उन्हें पशु चिकित्सा संस्थाओं (Veterinary institutions) को खोलना है अथवा नहीं। स्पष्ट आदेश नहीं मिलने से कार्मिक दिन भर अपने संभागों के उच्चाधिकारियों से सम्पर्क कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते रहे लेकिन उनके पास भी इसका जवाब नहीं था।
स्थिति यह रही कि अजमेर में कार्मिक काम कर रहे थे तो जैसलमेर के कार्मिक विभागीय अधिकारियों से सम्पर्क कर पता करने का प्रयास कर रहे थे कि उन्हें काम पर जाना है अथवा नहीं। इसी प्रकार अलवर में भी कार्मिकों ने संभागीय अधिकारियों से इस संबंध में निर्देश मांगे।
स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग
कार्मिकों की इस परेशानी को देखते हुए राजस्थान पशुचिकित्सा कर्मचारी संघ की ओर से इस संबंध में विभाग के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह को ज्ञापन भेजा गया। संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय सैनी ने कहा कि सरकार की ओर से जारी कोविड गाइडलाइन में जिन संस्थाओं, कार्यालयों को खोलने का उल्लेख किया गया है उसमें पशु चिकित्सा संस्थाओं का नाम नहीं है। ऐसे में विभाग में कार्यरत राज्य के सभी अधिकारी और कर्मचारी संशय की स्थिति में है। विभाग ने भी कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए। यदि आज कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं होते तो प्रदेश के सभी पशु चिकित्सा संस्थाएं 20 अप्रेल यानी मंगलवार से बंद रहेंगी। उनका कहना था कि यदि पशु चिकित्सा संस्थाएं खोली जानी हैं तो विभाग कार्मिकों को परिचय पत्र उपलब्ध करवाए जिससे वह अपने कार्यस्थल पर पहुंच सके। साथ ही उन्हें फ्रंट लाइन वर्कर में शामिल कर वैक्सीनेशन करवाया जाए।
हो चुकी है कोविड से मृत्यु
विभाग के जैसलमेर कार्यालय में कार्यरत एक पशु चिकित्सा अधिकारी की मृत्यु पिछले दिनों कोविड से ड्यूटी के दौरान हो चुकी है लेकिन उसके परिवार को सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक 50 लाख रुपए की राशि का मुआवजा नहीं मिल सका क्योंकि सरकार ने पशुपालन विभाग को आवश्यक सेवा में शामिल नहीं किया।
गौरतलब है कि पशु चिकित्सा सेवा पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की असेंशियल सर्विसेज की श्रेणी में शामिल है लेकिन राज्य सरकार ने रविवार रात जो गाइडलाइन जारी की है उसमें आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में पशुपालन विभाग नहीं है।

Rakhi Hajela Desk
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