रेस्तरां जहां इशारों से जीत रहे हैं ग्राहकों का दिल

रेस्तरां जहां इशारों से जीत रहे हैं ग्राहकों का दिल

Mohmad Imran | Publish: Jul, 20 2019 08:09:26 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

रेस्तरां जहां इशारों से जीत रहे हैं ग्राहकों का दिल


-'मोज्जेरिया' नाम के इस रेस्तरां में सभी कर्मचारी मूक-बधिर और बोलने-सुनने में बाधा महसूस करने वाले होंगे। ग्राहक साइन लैंग्वेज, पेन-पेपर और इशारे से भी अपना ऑर्डर दे सकेंगे।यह अमरीका का पहला रेस्तरां होगा जहां पूरा स्टाफ बधिर है।


-30 लाख से ज्यादा लोग दोनों कानों से सुन न पाने की समस्या से पीडि़त हैं अमरीका में।

ज़िदगी भर का सपना जब एक कमी के कारण अधूरा रह जाए तो इंसान भीतर तक टूट जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ 45 वर्षीय बधिर शेफ मैलोडी स्टीन के साथ भी। मैलोडी को खाना बनाने और लोगों को खिलाने का बहुत शौक था। इस शौक को पूरा करने के लिए उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के पाक शास्त्र विषय में प्रवेश भी लिया। डिग्री पूरी करने के बाद वे भी अपना खुद का रेस्तरां खोलना चाहती थीं। लेकिन उनका सपना उस समय टूट गया जब उनकी जन्मजात बधिरता के कारण उन्हें अनुमति नहीं मिली। अकादमी का तर्क था कि उनकी बधिरता अच्छी ग्राहक सेवा में बाधक बनेगी।

 

20 साल बाद जीती लड़ाई
मैलोडी अकादमी के इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में गईं। 20 साल चले केस में उन्हें जीत मिली। आज वह अपने 47 वर्षीय बधिर पति रॉस स्टीन के साथ सैन फ्रांसिस्को में एक 'पिज्जेरिया' नाम की पिज्जा चेन की मालकिन हैं। मैलोडी और रॉस ने अपने संघर्ष से सबक लेते हुए अपने सभी आउटलेट्स पर केवल बधिरों को ही कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया है।

 

साइन लैंग्वेज वाला पहला रेस्तरां
मैलोडी अब अपने इस रेस्तरां को सैन फ्रांसिस्को से वाशिंगटन लेकर आ रही हैं। अपने 'डेफ सोशल वेंचर फंड' के लिए उन्होंने ऑनलाइन दानदाताओं से कई मिलियन डॉलर का निवेश जुटाया है। अब वे सैन फ्रांसिस्को में अपने 'पिज्जेरिया' रेस्तरां की तर्ज पर यहां 'मोज्जेरिया' की शुरुआत करेंगी। इसकी खास बात होगी कि यह रेस्तरां यहां के एच स्ट्रीट पर खुलेगा जहां पूर्वोत्तर वाशिंगटन में बहरे और कम सुनने वाले छात्रों का विश्व प्रसिद्ध स्कूल में कठिन होने के लिए विश्व प्रसिद्ध स्कूल गैलॉडेट विश्वविद्यालय है। मैलोडी और रॉस की मुलाकात भी इसी कॉलेज में हुई थी। रॉस ने दुभाषिए की मदद से वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि क्षेत्र में बहुत समय से एक ऐसे रेस्तरां की जरुरत महसूस की जा रही थी जो खास मूक-बधिर के लिए हो।

 

52 फीसदी हैं बेरोज़गार
अमरीका में इस समय 30 लाख से ज्यादा लोग दोनों कानों से सुन न पाने की समस्या से पीडि़त हैं। मूक लोगों की तुलना में बधिरों को रोजगार के लिए भी कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। नेशनल डीफ सेंटर और टेक्सास विश्वविद्यालय, ऑस्टिन के अनुसार 52 फीसदी सुन सकने वाले लोगों की तुलना में अमरीका में केवल 48 फीसदी बधिरों को ही रोजगार प्राप्त है।

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