'डीम्ड टू बी' यूनिवर्सिटी में ayurveda पर होंगे नए शोध

राष्ट्रीय ayurveda दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को डीम्ड टू बी युनिवर्सिटी यानी मानद यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया है। इसके साथ ही संस्थान देश के उन चुनिंदा प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल हो गया है, जहां पर प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों पर शोध हो रहा है।

By: Tasneem Khan

Published: 15 Nov 2020, 08:32 PM IST

jaipur राष्ट्रीय ayurveda दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को डीम्ड टू बी युनिवर्सिटी यानी मानद यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया है। इसके साथ ही संस्थान देश के उन चुनिंदा प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल हो गया है, जहां पर प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों पर शोध हो रहा है। खास बात यह है कि यहां पर दुनियाभर से आने वाले स्टूडेंट्स ayurveda पर रिसर्च कर चिकित्सा सेवाओं के विस्तार में अपना योगदान देंगे। इस रिसर्च का खास फायदा राज्य को तो मिलेगा ही, साथ ही इससे रोजगार के नए अवसर भी युवाओं को मिलेंगे। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को यह नई सौगात कोरोना महामारी में इस चिकित्सा पद्धति की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए मिली है। केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने इस संस्थान को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के समारोह में कहा है कि कोरोना मरीजों के लिए सबसे ज्यादा कारगर आयुर्वेद चिकित्सा रही है। इससे संबंधित दवाइयों से कोरोना मरीजों को सबसे ज्यादा राहत मिली है। इसलिए इस क्षेत्र में और शोध कर महामारियों से बचने की चिकित्सकीय पद्धतियों के निर्माण की जरूरत है।
फार्मासिस्ट और अन्य पद भी मिलेंगे
आयुर्वेद क्षेत्र में इस बड़ी सौगात के साथ ही नए पद सृजन होने की उम्मीद भी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी पीएम नरेंद्र मोदी से आयुर्वेद में फार्मासिस्ट पदों के सृजन की मांग की है। साथ ही नाड़ी विज्ञान को सुविधाजनक बनाने के लिए नई नीतियां बनाने की मांग भी की है। इससे लोगों के पास रोजगार के अवसर भी होंगे।

वैद्य करेंगे सस्ता उपचार
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर संजीव शर्मा का कहना है कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से आमजन को सस्ती चिकित्सकीय सुविधाएं मिलती सकती है। सस्ता और सुलभ इलाज उपलब्ध कराने के लिए ज्यादा से ज्यादा शोध की जरूरत है। डीम्ड यूनिवर्सिटी से पढ़कर स्टूडेंट्स आयुर्वेद को नए आयाम दे सकते हैं। आयुर्वेद में कई संभावनाएं हैं, जो अब तक हम जान ही नहीं सके हैं। अभी देशभर में 5 लाख वैद्य हैं, जो आयुर्वेद पद्धति से आमजन की सेवाएं कर रहे हैं। अब ज्यादा से ज्यादा आयुर्वेद विशेषज्ञ हर घर तक यह सेवाएं उपलब्ध करवाएंगे।

Tasneem Khan Desk
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