बाजार में सिक्के लेकर जा रहे हो तो पढ़ ले पहले ये खबर...

बाजार में सिक्के लेकर जा रहे हो तो पढ़ ले पहले ये खबर...

Deepshikha | Updated: 04 Jun 2019, 12:34:47 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

मुद्रा की 'मानहानि'

विजय शर्मा / जयपुर. ये तीन उदाहरण काफी हैं, यह बताने के लिए कि सिक्कों की इन दिनों कितनी बेकद्री हो रही है। घरों पर गुल्लक या पर्स सिक्कों से लदे हैं। दुकानदारों के गल्लों में भी सिक्के भरे हैं। हर कोई सिक्के देने के लिए तो तत्पर दिखता है लेकिन लेने के लिए कोई राजी नहीं है। राजधानी सहित राज्यभर में ऐसी ही स्थिति सामने आ रही है। कई शहरों में 1 व 2 के सिक्के तो 'अघोषित बन्द' ही हो गए हैं।

भारतीय मुद्रा के अपमान और नियमों की अवहेलना की स्थिति सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने पिछले साल सभी बैंकों को सिक्के लेने के लिए निर्देश दिए थे। यह तक कहा था कि सिक्के ज्यादा आएं तो तौल के हिसाब से सिक्के लें लेकिन इन्कार न करें। इसके बावजूद सिक्कों को 'ना' किया जा रहा है।

उधर, रिजर्व बैंक के एक अधिकारी के अनुसार सिक्के लेने से मना नहीं किया जा सकता। काइनेज एक्ट 1906 के तहत यह अपराध है। मना करने पर पुलिस और रिजर्व बैंक कार्रवाई कर सकते हैं।

 


क्यों और कितने बढ़े सिक्के

-2016 में देश में 211.6 बिलियन यानी 21 हजार 100 करोड़ के सिक्के बाजार में थे

-2019 में स्थिति यह है कि 25 हजार 100 करोड़ के सिक्के बाजार में हैं

04 हजार करोड़ के सिक्के बाजार में बढ़ गए नोटबंदी के बाद (रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार)


बेकद्री: पसोपेश में लोग, हर कोई हो रहा परेशान

 

जनता का हाल: दुकानदार सिक्के देने को तत्पर, लेने को राजी नहीं

गृहिणी कमलेश शर्मा छुट्टे 36 रुपए लेकर डेयरी पर जाते हैं, दूध की थैली मांगते हैं लेकिन दुकानदार छुट्टे 36 रुपए लेने को आसानी से राजी नहीं होता। उसकी मंशा रहती है कि आप 40 या 50 रुपए दें और दूध का मूल्य काटकर वह 4 या 14 रुपए आपको लौटाए। यानी दुकानदार आपसे 6 रुपए छुट्टे नहीं लेना चाहता बल्कि 4 रुपए छुट्टे देना चाहता है।

 

दुकानदार का हाल: सिक्के लें तो दें कहां, नहीं लें तो ग्राहक टूटता है

खुदरा व्यापारी रतनलाल गुप्ता के पास बड़ी संख्या में सिक्के जमा हो गए हैं। सिक्के नहीं लें तो ग्राहक टूटता है। सेमी होलसेलर माल बेचने आते हैं लेकिन सिर्फ 5 व 10 के सिक्के लेने को राजी होते हैं, इससे छोटे नहीं। क्योंकि उनसे बड़े होलसेलर सिक्के नहीं लेते। बड़े होलसेलरों के समक्ष भी समस्या यह है कि बैंक उनसे सिक्के नहीं ले रहे।

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