प्रदेश में सुस्त मानसून ने बढ़ाई किसानों की चिंता, मध्य भारत के राज्यों में हुआ सक्रिय

मानसून की बेरुखी से दर्जनभर से ज्यादा जिलों में अकाल की आहट...

By: dinesh

Published: 22 Aug 2017, 01:08 PM IST

जयपुर। भादो मास का एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी प्रदेश में मानसून का दूसरा दौर सुस्त है और अब मानसून की बेरुखी के चलते करीब एक दर्जन से ज्यादा जिलों में अकाल के बादल मंडराने लगे हैं। हालांकि मौसम केंद्र आगामी दिनों में प्रदेश के पूर्वोत्तर जिलों में बारिश होने का अनुमान जता रहा है लेकिन रूट लाइन बदलकर दक्षिण मध्य गुजरात और मध्यप्रदेश का रुख कर चुके मानसून ने मौसम केंद्र के पूर्वानुमानों की सटीकता को गलत साबित कर दिया है। बीते एक पखवाड़े में विंड पैटर्न में बदलाव नहीं होने व मानसून के असामान्य बर्ताव को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने पूर्वोत्तर जिलों में भी बौछारों तक ही बारिश का दौर सिमटने का अंदेशा जता दिया है।

 

मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो प्रदेश में हवा के पैटर्न में बदलाव नहीं होने व लगातार उत्तर पश्चिमी हवाएं बहने से ?हिमालय तराई क्षेत्र में ठहरा मानसून अब पूर्वोत्तर राज्यों से होकर गुजरात के कच्छ और मध्यप्रदेश के कुछ भागों में फिर से दस्तक दे चुका है। प्रदेश में बाड़मेर से होकर मानसून की अक्षीय रेखा गुजर रही है लेकिन लगातार उत्तर पश्चिम व पश्चिमी हवा बहने और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ रहने के कारण बारिश का दौर प्रदेश में जल्द शुरू हो जाएगा इसकी उम्मीद फिलहाल कम है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटे में पूर्वी राजस्थान में कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की चेतावनी दी है लेकिन अनुकूल परिस्थितियां नहीं बनने से आगामी दिनों में प्रदेश में मानसून की सक्रियता पर अभी से सवाल खड़े हो रहे हैं। गुलाबीनगर में दिन के तापमान में हो रही बढ़ोतरी के साथ उमस से शहरवासी परेशान हैं वहीं बादलों की आवाजाही रहने पर भी मेघ शहरवासियों की उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं। शहर की लाइफ लाइन बीसलपुर बांध में पानी की आवक धीमी रफ्तार से बनी हुई है। त्रिवेणी में पानी का बहाव 1.40 मीटर ऊंचाई पर बने रहने से बांध में पानी की आवक हो रही है। आज सुबह बांध का गेज 313.61 आरएल मीटर दर्ज हुआ है। बीते शनिवार को बांध के कमांड क्षेत्र में करीब एक इंच से ज्यादा बारिश होने पर बांध के गेज में आंशिक बढ़ोतरी हुई है।

 

वापसी में भी बदला रूट
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार हर साल सामान्यत: दक्षिण पश्चिमी मानसून प्रदेश में बांसवाड़ा, उदयपुर होकर एंट्री करता है और पहले दौर की बारिश के बाद हिमालय तराई इलाकों में सक्रिय रहने के बाद फिर से मानसून प्रदेश में पूर्वोत्तर जिलों से होकर प्रवेश कर सक्रिय होता है। लेकिन इस बार बाड़मेर, जैसलमेर से हुई एंट्री के बाद हिमालय तराई इलाकों में ठहरा मानसून वापस इसी रूट लाइन से होकर गुजरात, मध्यप्रदेश का रुख कर गया है। मानसून की अक्षीय रेखा बाड़मेर से होकर गुजर रही है। इससेे जैसलमेर कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई है।



विंड पैटर्न से भटके बादल
प्रदेश में बीते एक पखवाड़े से हवा की दिशा उत्तर पश्चिम व पश्चिमी रही है जिसके चलते प्रदेश से खिसक कर मानसून हिमालय तराई क्षेत्र के साथ पूर्वोत्तर राज्यों की ओर रुख कर गया। मानसून की वापसी में भी विंड पैटर्न ने बाधा खड़ी कर दी जिसके चलते मानसूनी बादल उत्तर पश्चिमी दिशा से होकर देश के दक्षिण पश्चिमी और पूर्वी राज्यों में पहुंच गए हैं।

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