क्या राजस्थान की अधूरी चाहत पूरी करेंगे मनमोहन, अगर हुआ ऐसा तो प्रदेश को मिलेगा बड़ा फायदा

Special Status States Demand for Rajasthan : पूर्व PM Manmohan Singh ने आज Rajasthan Rajya Sabha Seat पर Nomination Fill किया। उनके नामांकन दाखिल करने के साथ ही राजस्थान की बरसों पुरानी मांग फिर जिंदा हो गई है। Rajasthan पिछले कई सालों से विशेष राज्य ( Special States Category ) का दर्जा देने की मांग कर रहा है। मगर आज भी यह आस अधूरी है।

By: rohit sharma

Published: 13 Aug 2019, 08:02 PM IST

जयपुर। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ( Manmohan Singh ) ने आज राज्यसभा सीट पर नामांकन दाखिल ( Rajya Sabha nomination Fill ) किया। उनके नामांकन दाखिल करने के साथ ही राजस्थान की बरसों पुरानी मांग फिर जिंदा हो गई है। राजस्थान से कई सांसद राज्यसभा पहुंचे और इस मांग को पूरी कराने का ठोस आश्वासन भी दिया, मगर आज तक यह मांग अधूरी पड़ी है।

 

जी हां राजस्थान पिछले कई सालों से विशेष राज्य ( Special States Category ) का दर्जा देने की मांग कर रहा है। मगर आज भी यह आस अधूरी है। जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ( gajendra singh shekhawat ), हनुमान बेनीवाल ( hanuman beniwal ) सहित कई सांसद जीतने के बाद आश्वासन दे चुके हैं कि राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने का भरसक प्रयास किया जाएगा। अब प्रदेशवासियों को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से आस बंधी है। नामांकन दाखिल करने के बाद जब सिंह से पूछा गया कि क्या वह राजस्थान को विशेष दर्जा दिलाने का प्रयास करेंगे, इस पर उन्होंने कहा कि यहां की जरुरतों को पूरा करने के लिए वह हर मदद करने का पूरा प्रयास करेंगे।

ये राज्य भी कर रहे हैं मांग ( Demands for Special States Category )

आंध्र प्रदेश और बिहार भी लंबे समय से विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। मगर नॉर्थ ईस्ट और पहाड़ी राज्यों के अलावा किसी और राज्य को अभी तक यह दर्जा नहीं मिल पाया है। किसी राज्य की भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और संसाधन के लिहाज से उसकी क्या स्थिति है, इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है. विशेष राज्य का दर्जा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है. केंद्र सरकार अपने विवेक से उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष राज्य का दर्जा देती है.

 

विशेष राज्य का दर्जा मिलने के फायदे ( Special Category State Benefits )

—केंद्र सरकार से 90 फीसदी फंडिंग अनुदान के रूप में मिलती है
—बाकी 10 फीसदी रकम बिना किसी ब्याज के मिलती है
—एक्साइज, कस्टम, कॉर्पोरेट, इनकम टैक्स में मिलती है रियायत
—प्लांड बजट में 30 फीसदी रकम विशेष राज्यों को मिलती है
—अन्य राज्यों को महज 30 फीसदी राशि ही अनुदान के रूप में मिलती है
—70 फीसदी रकम केंद्र का कर्ज होता है

 

इनको मिला विशेष राज्य का दर्जा ( special category states list )

1969 में पांचवें वित्त आयोग के कहने पर नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल ( national development council ) ने पहाड़, दुर्गम क्षेत्र, कम जनसंख्या, आदिवासी इलाका, अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर, प्रति व्यक्ति आय और कम राजस्व के आधार पर राज्यों की पहचान की थी. 1969 में असम, नगालैंड और जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्ज दिया गया था. बाद में अरुणाचल ( arunachal ), मणिपुर ( Manipur ), मेघालय ( Meghalaya ), मिजोरम ( Mizoram ), सिक्किम ( Sikkim ), त्रिपुरा ( tripura ), हिमाचल ( Himachal Pradesh ) और उत्तराखंड ( uttrakhand ) को विशेष राज्य का दर्जा मिला।

 

राजस्थान को मिलेगा ये फायदा

बहरहाल राजस्थान की वित्तीय स्थिति भी अच्छी नहीं है। ऐसे में अगर केंद्र विशेष राज्य का दर्जा देता हैं तो कुछ हद तक वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। मगर यह दर्जा पाने के लिए यहां के सभी सांसदों को एकजुट होकर केंद्र पर दबाव बनाना पड़ेगा।

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