भारत जैसे लोकतंत्र में कोई भी सत्ता मनमानी और बेलगाम नहीं हो सकती है—कलकत्ता हाईकोर्ट

(Calcutta Highcourt)कलकत्ता हाईकोर्ट ने (CAA) नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन में भाग लेने वाले(Polist Student) पोलैंड के एक छात्र के (Leave Indai) निष्कासन आदेश (Quash) निरस्त करते हुए कहा है कि भारत जैसे (Democracy ) लोकतंत्र में (Any Govt) कोई भी सत्ता (Arbitary) मनमानी और (Unrestricted) बेलगाम नहीं हो सकती।

By: Mukesh Sharma

Updated: 19 Mar 2020, 03:58 PM IST

जयपुर

(Calcutta Highcourt)कलकत्ता हाईकोर्ट ने (CAA) नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन में भाग लेने वाले(Polist Student) पोलैंड के एक छात्र के (Leave Indai) निष्कासन आदेश (Quash) निरस्त करते हुए कहा है कि भारत जैसे (Democracy ) लोकतंत्र में (Any Govt) कोई भी सत्ता (Arbitary) मनमानी और (Unrestricted) बेलगाम नहीं हो सकती। भारत के संविधान में निहित मौलिक अधिकार न केवल भारतीय नागरिकों को, बल्कि भारत की धरती पर रहने तक विदेशियों पर भी शासित होते हैं। भारत की भूमि पर विदेशी नागरिक को भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्‍यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है।

खुलासा तो करना होगा-
कोर्ट ने कहा है कि सरकार के पास चाहे जैसी शक्तियां हों,लेकिन याचिकाकर्ता के अधिकारों को समाप्त करने के कारणों का खुलासा करना आवश्यक है। जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने कहा है कि मामले में याचिकाकर्ता के मूल्यवान अधिकार, जिसे इसने केंद्र सरकार की ओर से जारी वीजा के जरिए अर्जित किया है, स्वयं ही इसे संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार प्रदान करते हैं । कोर्ट ने कहा कि पोलिश छात्र को बिना कारण बताए और सुनवाई का मौका दिए बिना ही निष्कासन का आदेश दिया था और मामले में प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांत का उल्लंघन किया गया। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक गतिविधि संविधान के अनुच्छेद 21 तहत दिए गए अधिकारों का ही एक हिस्सा है।

यह था मामला—

मौजूदा मामला एक पोलिश छात्र कामिल सिडक्जाइनस्की को जारी किया भारत छोडऩे की नोटिस की वैधता से संबंधित था। कामिल स्टूडेंट वीजा पर जादवपुर विश्वविद्यालय में तुलनात्मक साहित्य का अध्ययन कर रह हैं। उन्हें जारी किया गया वीजा 3 अगस्त, 2020 तक मान्य था।
14 फरवरी, 2020 को, विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय,कोलकाता ने उन्हें 9 मार्च तक भारत छोडऩे का नोटिस जारी किया था। छात्र को नोटिस नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ आयोजित रैलियों में शामिल होकर सरकार विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लेने के आधार पर दिया था, हालांकि 6 मार्च को कोर्ट ने नोटिस पर रोक लगा दी थी।
केंद्र सरकार ने तर्क था कि छात्र वीजा पर एक विदेशी को सरकार के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने का अधिकार नहीं है। और विदेशी संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत स्वतंत्रता का हकदार नहीं था। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अनुच्छेद 21 के तहत ‌दिए गए जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के हकदार हैं और इसे कानून के जरिए स्थापित प्रक्रिया के उल्लंघन के कारण समाप्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के तहत पोलिश छात्र को एंटी-सीएए रैलियों में भाग लेने का भी अधिकार है।

केवल भारत में रहना ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं बल्कि-
याचिकाकर्ता के प्रमाण पत्रों और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर कोर्ट ने कहा किया कि याचिकाकर्ता न केवल कई प्राच्य भाषाओं का जानकार है, बल्कि उसे संस्कृत, बंगाली, हिंदी और तमिल साहित्य के साथ-साथ इतिहास का व्यापक ज्ञान भी है। साथ ही उसे दक्षिण भारत, दक्षिण एशिया के दर्शन और धर्म, दक्षिण एशिया की कला और सौंदर्यशास्त्र, प्राकृतिक वातावरण और जातीय, जनसांख्यिकीय और राजनीतिक स्थिति के दायरे में उक्त क्षेत्र के सामाजिक, दा‌र्शनिक और सांस्कृतिक मुद्दों का भी जानकारी है। उसकी योग्यताएं उसे ऐसी गतिविधियों में संलग्न होने की क्षमता प्रदान करती हैं। इसलिए, याचिकाकर्ता की जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दायरे को अस्‍तित्व मात्र तक सीमित नहीं किया जा सकता है, बल्कि रुचियों और विशेषज्ञता अनुसरण करने को भी शामिल करना होगा, यह याचिकाकर्ता के स्वस्थ जीवन के लिए भी आवश्यक है। किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता केवल भारत में रहने तक सीमित नहीं हो सकती है। याचिकाकर्ता की दक्षिण एशिया की राजनीतिक स्थितियों और सामाजिक, सांस्कृतिक मुद्दों की जानकारी को देखते हुए उसे राजनीतिक रैलियों में भाग लेने से रोकना तब तक उचित नहीं है जब तक उसकी गतिविधि देशद्रोह या ऐसे किसी अपराध के बराबर न हो। कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक रैली में भागीदारी का अध‌िकार, जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में शामिल है, विशेष रूप से एक ऐसे छात्र के लिए जिसका एक शानदार अकादमिक रिकॉर्ड है और जिसकी चेतना असाधारण है। चूंकि याचिकाकर्ता को दिया गया छात्र वीजा उसे 30 अगस्त, 2020 तक भारत में रहने के लिए का अधिकार देता है, इसलिए उसका बौद्धिक रुचियों के अनुसरण का अधिकार, भारत में विभिन्न समुदायों और जीवन शैली को समझने का अधिकार जीवन के अधिकार के साथ जोड़कर देखा जाएगा।

भारतीय भूमि पर विदेशियों को अनच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार

कोर्ट ने कई पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय भूमि पर मौजूद किसी भी विदेशी को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त संरक्षण उपलब्ध है। अनुच्छेद 19 के तहत केवल भारतीय नागरिकों को अधिकार दिए गए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय जमीन पर रह रहे विदेशी स्वतंत्रता का हकदार नहीं हैं। हालांकि अनुच्छेद 19 का दायरा भारत के नागरिकों पर ही लागू होता है। फिर भी यह नहीं माना जाना चा‌हिए कि अनुच्छेद 19 विदेशियों के अधिकारों पर अंकुश लगाता है। कोर्ट ने कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का स्रोत संविधान ही नहीं है, बल्कि सभ्य समाज द्वारा स्वीकार किए गए मानवा‌धिकार भी हैं।

मनमाने तरीेके से रद्द नहीं कर सकते वीजा-
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पोलिश छात्र के निष्कासन आदेश में कारण का उल्लेख नहीं किया है। किसी विदेशी को वीजा देना सरकार का विवेकाधिकार है, लेकिन एक बार दिया गया वीजा, बिना कारण बताए मनमाने तरीके से रद्द नहीं किया जा सकता है। एक विदेशी नागरिक को, जब तक कि उसे जारी किए गए वीजा के आधार पर भारत में रहने का अधिकार है, मात्र प्रशासनिक आदेश पर भारत से बाहर नहीं किया जा सकता है, और वह भी बिना कारण बताए या विदेशी नागरिक को सुनवाई का मौका दिए बिना।

विभिन्न विचार,धर्म और पंथों के प्रति सहिष्णुता भारत की पहचान—
कोर्ट ने फैसले में कहा है कि ऐतिहासिक रूप से, भारत सभी विचारों, धर्मों और पंथों के प्रति सहिष्णु होने के लिए पहचाना जाता है। याचिकाकर्ता का, वीजा होने के बावजूद और बिना किसी दंडनीय अपराध के,किया जा रहा निष्कासन, भारत के बारे में दुनिया को एक गलत संदेश भेजेगा। भारत ने दुनिया भर के छात्र-छात्राओं का स्वागत किया है। विदेशियों और भारतीयों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान की अनुमति दी है। नालंदा विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान इस देश में रहे हैं, जहां दुनिया भर के छात्रों ने अध्ययन किया है और उन्होंने भारतीय समाज और संस्कृति को समृद्घ किया है। इस प्रकार, वीजा अवध‌ि के बावजूद याचिकाकर्ता का निष्कासन, वह भी बिना किसी दंडनीय अपराध के, भारत के बारे में दुनिया में एक गलत संदेश भेजेगा।

Mukesh Sharma
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