मरुधरा लिख रही विकास की कहानी, मंत्रियों के लिए जैसे 'कालापानी'

- बदजुबानी: अफसरों को धमकाने के लिए नेताओं का रटापिटा जुमला बने पश्चिमी जिले

-जैसलमेर-बाड़मेर बयानबाजी से हो रहे बदनाम

By: Pankaj Chaturvedi

Published: 20 Aug 2020, 08:00 AM IST

पत्रिका @ जयपुर. प्रचीनकाल से प्रदेश की पहचान रहे धोरे और आधुनिक राजस्थान की शान रिफायनरी। सैंकड़ों करोड़ रुपए का पर्यटन व्यवसाय और सौर व पवन ऊर्जा के लिहाज से देश में सबसे अधिक उपयुक्त स्थान। जैसलमेर और बाड़मेर को समेटे मरुधरा भलेे ही अब राजस्थान की अर्थव्यवस्था का आधार हों, लेकिन खुद सरकार के मंत्री-विधायक ही इसकी तस्वीर 'कालापानी' सरीखी पेश करने पर उतारू है।
आए दिन जब मंत्री या विधायक को सरकारी कर्मचारियों पर नाराजगी जाहिर करनी होती है तो एक ही धमकी सुनाई देती है... सुधर जाओ नहीं तो बाड़मेर, जैसलमेर भेज दूंगा। सरकार में राज्यमंत्री अशोक चांदना के नमाना में अधिकारियों से फोन पर बात करते हुए एक वीडियो वायरल होने के बाद फिर यह धमकी चर्चा में है। इससे पहले, इसी सरकार में मंत्री रह चुके सपोटरा विधायक रमेश मीणा का भी पिछले साल अधिकारियों को धमकी देने का यही जुमला चर्चा में रहा था। चांदना का ताजा वीडियो जारी होने के बाद अब सरकारी कार्मिकों के बीच चर्चा है कि जब सरकार ही अपने प्रदेश के हिस्सों में ऐसा भेदभाव करने लगेगी तो उन जिलों में विकास की नई इबारत लिख रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के मनोबल पर क्या असर पड़ेगा।

पहले, मीणा की धमकी जैसलमेर

विधायक रमेश मीणा पिछले वर्ष सितम्बर में जब मंत्री के तौर पर प्रतापगढ़ में जनसुनवाई कर रहे थे तो उनकी कृषि विभाग के अधिकारियों को ऐसे ही लताड़ने की खबरें आई थीं कि सही से काम करो नहीं तो जैसलमेर भेज दूंगा।

अब, चांदना ने काम लिया बाड़मेर

हाल ही चांदना के सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में भी वह समर्थकों के बीच से ही किसी अधिकारी को यह कहते हुए दिख रहे हैं कि जो पटवारी काम नहीं करेगा, बाड़मेर भेज दूंगा।

बाड़ा भी बचा था जैसलमेर में

प्रदेश में हाल ही सरकार पर आए सियासी संकट के बीच भी सरकार के समर्थक विधायकों की बाड़ेबंदी जैसलमेर में ही की गई थी। कई दिनों तक यहां विधायकों को रोक कर सरकार पर आए संकट को टाला गया।

जैसलमेर: हर साल 1200 करोड़ की कमाई
देश दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर जैसलमेर आकर्षक डेस्टिनेशंस में से एक है। हर साल देश और विदेश से 8 लाख से अधिक सैलानी जिले में आते हैं। यहां के पर्यटन व्यवसाय में तकरीबन 1200 करोड़ रुपए सालाना से अधिक राशि का टर्नओवर है। पवन ऊर्जा और पत्थर व्यवसाय को जोड़े तो हर वर्ष करीब 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक का व्यवसाय इसी जिले से होता है।

बाड़मेर: हर दिन 10 करोड़ का राजस्व
बाड़मेर प्रतिदिन करीब 10 करोड़ रुपए का राजस्व अकेले तेल से दे रहा है। 43129 करोड़ रुपए की लागत से सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट रिफाइनरी पचपदरा में प्रस्तावित है। 6 हजार करोड़ का पेट्रो केमिकल हब भी बाड़मेर में ही लगने वाला है। राजवेस्ट पॉवर प्रोजेक्ट से करीब 10 हजार मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। सालाना 16 अरब रुपए कीमत का जीरा पैदा होता है। मुख्यमंत्री खुद इस जिले को आर्थिक उन्नति में प्रदेश में सबसे ऊपर बता चुके हैं।

Pankaj Chaturvedi
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