दिल्ली गए राजस्थान के नेताओं की अब 'गुप्तचर' रखेंगे नज़र, जानें क्यों पड़ रही स्पेशल यूनिट की ज़रुरत

दिल्ली में राज्य के नेताओं पर नजर रखने की तैयारी, गुप्तचर शाखा ने नई विंग के गठन के लिए लिखा पत्र, नई यूनिट में होंगे 10 अधिकारी कर्मचारी, एक करोड़ 12 लाख से ज्यादा का खर्च आएगा सालाना, 22 अप्रैल को लिखा गया था पत्र अब आया सामने

By: firoz shaifi

Published: 01 Jul 2020, 11:18 AM IST

फ़िरोज़ सैफी, जयपुर।

दिल्ली आने जाने वाले राज्य के चुने हुए जनप्रतिनिधियों की हर गतिविधि पर नजर रखने की तैयारी हो चुकी है। नेताओं पर नजर रखने के लिए राज्य के गुप्तचर शाखा ने एक नई विंग के गठन की मांग की है जो दिल्ली में नेताओं पर नजर रखेगी, इसे लेकर राज्य के गुप्तचर शाखा के एडीजी उमेश मिश्रा ने एडीजी पुनर्गठन को लॉकडाउन के बीच 22 अप्रैल 2020 को एक पत्र लिखा था। हालांकि एडीजी मिश्रा का यह पत्र अब सामने आया है।

एडीजी ने यह लिखा पत्र में
एडीजी उमेश मिश्रा ने अपने पत्र में लिखा कि राजधानी दिल्ली में राज्यपाल और मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए तो एक यूनिट कार्यरत है किंतु आज सूचना संकलन के लिए राज्य विषय शाखा के कोई यूनिट नहीं है। राजस्थान की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य के चुने हुए राजनीतिक जनप्रतिनिधियों का दिल्ली में निरंतर आना जाना लगा होने के कारण उनकी गतिविधियों की आ सूचना संकलन में कठिनाई आती है। इन हालातों को ध्यान में रखते हुए आसूचना संकलन और सुरक्षा की दृष्टि से दिल्ली में राज्य विशेष शाखा की जरूरी है इसके लिए 10 अधिकारी कर्मचारियों की एक यूनिट गठित की जाए

नई प्रस्तावित यूनिट में इनकी मांग
नई प्रस्तावित यूनिट में एक पुलिस उपाधीक्षक, एक पुलिस निरीक्षक, 2 सहायक उप निरीक्षक, 4 कॉन्स्टेबल, 2 कांस्टेबल चालक सहित कुल 10 अधिकारी कर्मचारी होंगे।

यूनिट पर सालाना आएगा एक करोड़ से ज्यादा का खर्च

एडीजी उमेश मिश्रा के पत्र में यूनिट पर सालाना खर्च का भी जिक्र किया गया है। 10 अधिकारी कर्मचारियों का सालाना खर्च एक करोड़ 12 लाख 68 हज़ार 678 रूपए आएगा।

मुख्यमंत्री लगा चुके हैं खरीद-फरोख्त के आरोप

इधर गुप्तचर शाखा के एडीजी की ओर से लिखे गए पत्र के ठीक एक माह बाद ही राज्यसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई नेता भाजपा पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगा चुके हैं।


नई यूनिट के गठन की कवायद से साफ है कि दिल्ली आने जाने वाले राज्य के चुने हुए जनप्रतिनिधियों के हर गतिविधियों पर अब नजर रखी जाएगी।

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