डीजल की कीमतों में तेजी, माल ढुलाई महंगी, बढ़ेगी महंगाई

पेट्रोल और डीजल ( petrol and diesel ) के बीच का अंतर घटकर मात्र छह रुपए प्रति लीटर रह जाने से जहां कोरोना काल ( Corona era ) में महंगाई बढऩे ( inflation rising in june ) की आशंका बढ़ गई है वहीं ऑटोमोबाइल कंपनियों ( automobile companies ) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। डीजल ( diesal ) की कीमतें पिछले 18 दिनों से लगातार बढ़ रही हैं। इस दौरान डीजल की कीमत 10.35 रुपए प्रति लीटर बढ़ी है। ट्रक ऑपरेटरों ( Truck operators ) का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतों से उनका मुनाफा प्रभावित हो रहा है।

By: Narendra Kumar Solanki

Published: 24 Jun 2020, 12:00 PM IST

जयपुर। पेट्रोल और डीजल के बीच का अंतर घटकर मात्र छह रुपए प्रति लीटर रह जाने से जहां कोरोना काल में महंगाई बढऩे की आशंका बढ़ गई है वहीं ऑटोमोबाइल कंपनियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। डीजल की कीमतें पिछले 18 दिनों से लगातार बढ़ रही हैं। इस दौरान डीजल की कीमत 10.35 रुपए प्रति लीटर बढ़ी है। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतों से उनका मुनाफा प्रभावित हो रहा है।

लगातार 18वें दिन भी बढ़े डीजल के दाम
ट्रक और छोटे माल ढुलाई वाहनों के मालिकों का कहना है कि डीजल की कीमतों में रोज हो रही बढ़ोतरी के कारण उन्हें परिचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 1८ दिनों में ईंधन की कीमतों में हुई भारी वृद्धि से माल ढुलाई की लागत भी निकालना मुश्किल हो गया है। दरअसल, ट्रक परिचालन की लागत प्रति किलोमीटर 65 से 70 फीसदी बढ़ गई है। दूसरी तरफ, मांग में कमी के कारण बड़ी संख्या में ट्रक बिना किसी काम के खड़े हैं।

किसानों की मुश्किलें
अभी धान रोपाई का मौसम है बारिश नहीं होने पर किसान डीजल से पंपिंग सेट चलाते है और बुआई करते हैं। डीजल महंगा होने से किसानों की भी मुश्किलें बढ़ी हैं। मालवाड़ा महंगा होने से सब चीज महंगी हो जाएगा। इससे महंगाई को काबू में रख पाना मुश्किल होगा। माल ढुलाई बढऩे से सामान महंगा होगा।

महंगी हो सकती है कई वस्तुएं
माल ढुलाई बढऩे से फल और सब्जी जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों की कीमत में उछाल आना तय है। वहीं, दैनिक उपयोग के सामान की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण माल ढुलाई में इजाफे का असर एकसाथ पूरे देश पर दिखाई देगा। इससे एफएमसीजी कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और वे कीमतों में बढ़ोतरी को मजबूर होंगी। फल और सब्जियों की कीमतों में ढुलाई का हिस्सा दूसरी वस्तुओं के मुकाबले ज्यादा होता है। दरअसल, अलग-अलग किसानों के पास कम मात्रा में फल-सब्जी होती हैं। उन्हें अपने उत्पाद मंडी तक पहुंचाने में बड़ी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ता है।

पेट्रोल कारों की बढ़ेगी मांग
पेट्रोल और डीजल के बीच का अंतर घटकर मात्र सात रुपए प्रति लीटर रह जाने से ऑटोमोबाइल कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती है। बीएस-६ फेरे में चल रही इन ऑटो कंपनियों को अब यह तैयारी करनी होगी कि वह डीजल वाहनों की बिक्री के लिए नई रणनीति तैयार करें, क्योंकि डीजल वाहन पेट्रोल वाहनों के मुकाबले करीब डेढ़ से दो लाख रुपए तक महंगे आते है। पिछले कुछ सालों में डीजल और पेट्रोल के दामों में काफी अंतर था, जिससे वाहन कंपनियों को दोनों सेगमेंट में वाहन बेचने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी, लेकिन अब अंतर घटकर मात्र सात रुपए रह गया है। देश में जिस तरह से पेट्रोल और डीजल के बीच का अंतर कम हो रहा है, जिससे लगता है कि एक दिन डीजल देश में पेट्रोल से भी महंगा मिलेगा।

Narendra Kumar Solanki Desk
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