सोशल कनेक्ट: रोशन करने में जुटा केशवपुरा गांव, पूरा गांव बना रहा गोमय दीपक और बांदरवाल

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की गावों को स्वावलंबन बनाने की मुहिम अब रंग लाने लगी हैं।

By: santosh

Updated: 01 Nov 2020, 12:55 PM IST

शैलेंद्र शर्मा
जयपुर। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की गावों को स्वावलंबन बनाने की मुहिम अब रंग लाने लगी हैं। इसका असर राजधानी जयपुर से महज 40 दूर चाकसू तहसील की छांदेल कलां ग्राम पंचायत के आदर्श गांव 'केशवपुरा' में देखने को मिल सकता हैं, जहां इस गांव में 85 में से 75 परिवार एक ही तरह के रोजगार में जुटा हुआ हैं और वह हैं गोमय दीपक, बादरवाल और भगवान की मूर्तियां के अलावा दीवाली से जुड़े तमाम सजावटी सामान बनाने में। एक परिवार रोजाना करीब 300—500 दीये और 40 से 50 बांदरवाल बना रहा हैं।

संघ की योजना ग्राम विकास
संघ की ओर से ग्राम विकास अभियान के तहत एक जिले में एक गांव को स्वावलंबन के साथ साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, समरसता से जोड़ने के लिए यह एक विशेष अभियान चलाया जा रहा हैं। ग्राम विकास समिति सदस्य सुरेश कुमार ने बताया केशवपुरा गांव में पिछले एक महीने से यह काम शुरू किया गया था। सवेरे 10 बजे से रात तक यह काम चलता हैं। जिसमें घर की बहू—बेटियां के अलावा पूरा परिवार मन से इस काम में जुटा हुआ हैं। यहां गोमय दीपक के अलावा, लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां, शुभ—लाभ, श्री ॐ, जय श्री राम, जय श्री कृष्णा के स्टीकर, पांच तरह की बांदरवार की आकर्षक सामग्री बनाई जा रही हैं।

गौशाला और गांव दोनों हो आत्म निर्भर
इस प्रकल्प के विक्रय का कार्य देख रहे संजय छाबड़ा का कहना हैं कि गोबर में तयशुदा मिक्चर मिलाकर इसका लेप 'घोल' बनाया जाता हैं। जो बिलकुल इको फैंडली हैं। दीपक में मोम को डालकर उसमें लो लगा दी जाती हैं। दीपक को उपयोग में लेने के बाद उसे मोम के दीपक धुनी लगा सकते हैं या फिर उसे गमले में भी डाल सकते हैं जो जैविक खाद का काम करेगा। हमारा उदृदेश्य हैं कि इस तरह के कार्यों से सभी गोशाला आत्मनिर्भर हो जाए और सभी गांव आत्म निर्भर बन जाए। हर घर में गोबर का उत्पाद हो। उन्होंने बताया कि वाटिका स्थित श्री कृष्ण गोपाल गोशाला से यहां गोबर आता हैं।

इतनी डिमांड की एडवांस बना रहे
सांगानेर विभाग ग्राम विकास प्रमुख गजानन्द शर्मा 'गुरु' का कहना हैं कि दीपक सहित इन तमाम वस्तुओं की बनावट और सफाई इस कदर आकर्षक हैं कि इसे लेने के लिए लोगों की जबरदस्त डिमांड आने लगी हैं। यहां तक कि कुछ कंपनियों के प्रबंधन ने तो इस बार दीवाली पर गिफ्ट देने के लिए इन्हीं सामग्रियों के आर्डर दे दिए हैं। इसलिए यह परिवार दिन रात काम में जुटकर दीवाली ( 14 नवंबर ) से पहली सभी डिमांड पूरी करने में जुटे हुए हैं।

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