VIDEO: सरकार V/S डॉक्टर्स- नहीं माने धरती के भगवान, देखें रातभर चली वार्ता के बीच कैसे गरमा गया माहौल

Doctors Strike in Rajasthan: समिति कक्ष से सचिवालय के मुख्य द्वार तक तनातनी, पत्रिका LIVE

By: Nakul Devarshi

Published: 10 Nov 2017, 10:37 AM IST

जयपुर।
प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में मरीज भले ही परेशान हो रहे हों, सेवारत डॉक्टरों और राज्य सरकार के बीच गुरुवार देर रात तक चली वार्ता फिर हाइटेक ड्रामा साबित हुई। शाम 6 बजे से सचिवालय में चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ, एसीएस वित्त डीबी गुप्ता, प्रमुख गृह सचिव दीपक उप्रेती, चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव वीनू गुप्ता और चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव आनंद कुमार, सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में करीब 4 घंटे तक वार्ता चली। इसके बाद ऐसा नाटकीय घटनाक्रम शुरू हुआ कि एक घंटे के दौरान डॉक्टर 4 बार तमतमाते हुए बाहर निकले।

 

पहले आईएएस के बराबर पे ग्रेड की मांग पर गतिरोध बताया, फिर एक पारी के अस्पताल की मांग पर। अंत में सभी यह कहते हुए बाहर निकले कि सरकार ने हमें यहां बेइज्जत करने के लिए बुलाया था क्या। जबकि बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार विवाद वार्ता के बीच में ही रेजीडेंट डॉक्टरों की मांगें भी मानने की बात पर हुआ। रेजीडेंट चाहते थे कि इसीके साथ उनकी मांगें भी मानी जाएं। इसी बात पर तनातनी बढ़ गई।

 

दुर्व्यवहार किसने किया, इस सवाल पर सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी व अन्य पदाधिकारियों ने आईएएस अधिकारियों पर आरोप लगाया कि इन्होंने रेजीडेंट्स के बैठक में मौजूद रहने पर ही सवाल खड़े कर दिए। आरोप था कि सेवारत प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चौधरी से भी दुर्व्यवहार किया गया।

 

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कई मांगें तत्काल पूरी नहीं किए जाने के बावजूद वे सकारात्मक दौर में वार्ता कर रहे थे। फिर भी वार्ता के लिए बुलाकर आईएएस अफसरों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इस बीच प्रमुख गृह सचिव दीपक उप्रेती और कुछ अन्य डॉक्टरों ने समझाइश की कोशिश की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मुख्य द्वार पर रेजिडेंट्स ने कहा कि आईएएस अधिकारियों ने रेजीडेंट्स के बैठक में मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं। अब इन्हें बुलाएंगे तब ही वार्ता होगी।

 

डॉक्टर आगे-आगे, पीछे समझाइश वाले
डॉक्टरों के बाहर निकलते ही वार्ता में मौजूद कुछ दूसरे डॉक्टर और अन्य लोग समझाइश के लिए पीछे भागे। इस दौरान कई बार डॉक्टरों को वापस ले जाने का प्रयास किया। लेकिन इस बार रेजीडेंट ने उनके साथ दुव्र्यवहार का हवाला देते हुए विरोध शुरू कर दिया।

 

पुलिस पहले देखती रही, फिर पीछे लगाई गाडिय़ां
वार्ता के दौरान सचिवालय में समिति कक्ष के बाहर पुलिस बल मौजूद था। प्रमुख गृह सचिव भी थे। राज्य में रेसमा लागू होने से यह कयास लगाया जा रहा था कि मरीजों को हो रही परेशानी और डॉक्टरों पर दबाव बनाने के लिए रेसमा के तहत गिरफ्तारियां हो सकती हैं। लेकिन अंत तक पुलिस मूकदर्शक देखती रही। सचिवालय के मुख्य द्वार तक भी पुलिस पीछे रही। डॉक्टरों के सचिवालय से बाहर निकलते ही पुलिस की गाडिय़ां पीछे लगी। बाद में बताया गया कि अभी उनके पास गिरफ्तारी के कोई आदेश नहीं हैं।

 

मिसबिहेव का आरोप झूठा
बैठक पांच घंटे चली, मांगों पर सहमति भी बनी। बीच में डॉक्टरों ने कहा कि रेजीडेंट की मांगें भी मानो। अब हमें पता ही नहीं, इनकी मांगें क्या हैं। मिस बिहेव का आरोप झूठा है।
- कालीचरण सराफ, चिकित्सा मंत्री

doctors in rajasthandoctors in rajasthandoctors in rajasthan

4 दिन में चौथी बार वार्ता विफल
डॉक्टरों के 6 नवंबर को सामूहिक इस्तीफे देने के बाद पहली बार स्वास्थ्य भवन में वार्ता हुई, जो विफल रही। उसी दिन रात में चिकित्सा मंत्री के निवास पर, देर रात हाइटेक ड्रामे के बाद 2.30 बजे हुई वार्ता भी विफल रही। इसके एक दिन बाद स्वास्थ्य भवन में वार्ता हुई, वह भी विफल रही थी।

Nakul Devarshi
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