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उत्तर कोरिया ने क्यों दिया ऐसा बयान?

-उत्तर कोरियाई सरकार के प्रतिनिधि ने ये कहकर वार्ता के नतीजों पर ग्रहण लगा दिया कि अमरीका का ध्यान बातचीत से ज्यादा प्रतिबंधों की सख्ती पर है।

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उत्तर कोरिया ने उस पर लगे प्रतिबंधों में छूट चाहता है

उत्तर कोरिया ने क्यों दिया ऐसा बयान?

जयपुर.

अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ मुलाकात के बाद दोनों देश वार्ता की पटरी पर भले ही लौट आए, लेकिन अभी आशंकाओं के बादल छंटे नहीं है। इस मुलाकात के बाद अमरीका, उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार छोडऩे के लिए मनाने की दिशा में चरणबद्ध दृष्टिकोण पर लौट रहा है। हालांकि ये इतना आसान नहीं है, क्योंकि किम ने ट्रंप के बड़े सौदे के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। फिर उत्तर कोरियाई सरकार के प्रतिनिधि ने ये कहकर वार्ता के नतीजों पर ग्रहण लगा दिया कि अमरीका का ध्यान बातचीत से ज्यादा प्रतिबंधों की सख्ती पर है। फरवरी में हुई वार्ता में भी ट्रंप ने परमाणु निरस्त्रीकरण के साथ अर्थव्यवस्था की मजबूत बहाली का आग्रह किया था, जिसे किम ने उस वक्त नकार दिया था।

दोनों देश अपने इरादों पर अडिग
उत्तर कोरिया के हालिया रुख के बाद दोनों देशों के बीच फिर तल्ख रिश्ते हो सकते हैं। हनोई में वार्ता बेनतीजा रहने के बाद दोनों देशों के बीच पत्र व्यवहार चलता रहा। अमरीका उत्तर कोरिया से परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने के लिए कह रहा था जबकि उत्तर कोरिया ने उस पर लगे प्रतिबंधों में छूट चाहता है। अमरीका पर दबाव की रणनीति अपनाते हुए उत्तर कोरिया ने मई में दो मिसाइल परीक्षण भी किए थे। अमरीका के विशेष प्रतिनिधि स्टीफन बीगन ने कोरिया की यात्रा से पहले कहा था कि परमाणु निरस्त्रीकरण से पहले उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों में ढील देने का कोई विचार नहीं है। लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हम उत्तर कोरिया को सहायता और राजनयिक संबंधों को उन्नत कर सकते हैं, बशर्ते उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों पर आगे काम नहीं करे। दोनों नेताओं के बीच पिछले वर्ष जून में सिंगापुर में पहली वार्ता हुई थी।