ब्राह्मणी से पानी लाने के बजाय धरती की कोख छीलने पर तुले अफसर

ब्राह्मणी से पानी लाने के बजाय धरती की कोख छीलने पर तुले अफसर
Drinking Water Crisis, preparation of 453 new tube wells

neha soni | Updated: 07 Jan 2019, 03:54:48 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

पेयजल संकट: फिर 453 नए नलकूप खोदने की तैयारी, 552 की पहले हो चुकी मंजूरी

भवनेश गुप्ता

जयपुर. जल संसाधन और जलदाय विभाग के अफसर शहर के पेयजल संकट से निपटने को ब्राह्मणी नदी से पानी लाने के बजाए धरती की कोख छीलने पर उतर आए हैं। शहर में जलदाय विभाग की ओर से पहले से ही 2064 नलकूपों से पानी खींचा जा रहा है, अब 453 नए नलकूप फिर खोदने की तैयारी हो रही है।
पांच माह पहले भी 552 नलकूपों की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में पांच माह में ही 1005 नलकूप लगाकर डार्क जोन में भूजल स्तर और गिराने की तैयारी है। शहर का भूजल स्तर पहले ही आधा मीटर गिर चुका है। सरकार और नौकरशाहों का ब्राह्मणी नदी से बीसलपुर बांध में पानी लाने के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पर फोकस नहीं होने से ऐसे हालात पनप रहे हैं।
ऊंचाई वाले इलाकों के लिए : ऊंचाई वाले और पेयजल टंकी से अंतिम छोर वाले इलाकों में ये नलकूप खुदेंगे, जहां पानी नहीं पहुंच पाता है। ऐसे इलाकों में समान रूप से पेयजल पहुंचाने के लिए 453 नए नलकूप का प्रस्ताव बनाया गया।
मानसून के दौरान ब्राह्मणी नदी में काफी पानी की आवक होती रही है। यह बरसाती पानी जवाहर सागर बांध और कोटा बैराज से होते हुए चंबल नदी में बह जाता है। इसे बनास नदी से जोड़ दिया जाए तो बीसलपुर बांध हर साल भरने की संभावना बन सकती है। चंबल की सहायक नदी ब्राह्मणी से पानी लाने के लिए भैंसरोडगढ़ के पास बांध का निर्माण किया जाएगा। इस बांध में पानी रोककर नहर से लिफ्ट करेंगे, जिसे भीलवाड़ा के जहाजपुर (नापाखेड़ा) के पास बनास नदी में मिलाया जाना है। यह प्रोजेक्ट करीब 4 वर्ष पहले बना था, लेकिन जलदाय विभाग ने अब डीपीआर के लिए 5.58 करोड़ रुपए दिए हैं।

यह है प्रोजेक्ट
89 किलोमीटर लम्बी नहर बनाना प्रस्तावित ब्राह्मणी नदी से बांध में पानी लाने के लिए

53 किलोमीटर लम्बाई में टनल कैनाल होगी
411 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलने की उम्मीद मानसून में
1.5 मीटर उंचाई भी बढ़ाई जानी है बीसलपुर बांध की
317 आरएल मीटर हो जाएगी भराव क्षमता उंचाई बढऩे के बाद
6.9 टीएमसी अतिरिक्त पेयजल मिलने लगेगा बीसलपुर दूसरे फेज के लिए
(जल संसाधन विभाग इस पर काम कर रहा है)

यों समझें परेशानी
पिछले वर्ष अगस्त में 30 प्रतिशत पेयजल कटौती शुरू की गई। इसी बीच 273 पुराने बंद पड़े नलकूप को संचालित करने का काम शुरू हुआ। इसमें से 230 नलकूप शुरू कर दिए, इससे 39 एमएलडी पानी हर दिन लिया जा रहा है।
इसी बीच विभाग ने 279 नए और नलकूप का प्रस्ताव सौंपा, जिस पर दो दिन पहले ही स्वीकृति मिल गई। इससे 40 एमएलडी पेयजल मिलेगा।
अब 453 नए नलकूप और खुदाई का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया। इस पर विभाग के प्रमुख शासन सचिव संदीप वर्मा ने मौखिक सहमति भी दे दी। इस पर 35 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे करीब 70 एमएलडी पानी मिलने का आकलन।
इन नलकूप के जरिए हर दिन 15 करोड़ लीटर पानी जमीन से खींचा जाएगा। जबकि, करीब 8 करोड़ लीटर भूजल पहले से लिया जा रहा है।

एक्सपर्ट व्यू
- जलदाय विभाग जिस गति से जमीन से पानी खींच रहा है, उससे साफ है कि 4—5 साल तक ही भूजल आसानी से उपलब्ध होगा। फिर बड़ी मुश्किल आने वाली है। बीसलपुर बांध को ब्राह्मणी नदी-चम्बल नदी से जोडऩा होगा लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। शुक्र है कि चार—पांच साल में अच्छी बारिश के कारण बांध में पानी आता रहा है। स्थिति नहीं सुधरी तो लातूर जैसे हालात होने में भी समय नहीं लगेगा।
एसके जैन, भूजल विशेषज्ञ

- ब्राह्मणी नदी से बीलसपुर बांध में पानी लाने का काम जल संसाधन विभाग को करना है। हमने 5 करोड़ रुपए डीपीआर के लिए दे दिए हैं। अभी भूजल ही वैकल्पिक स्रोत है, इसलिए 453 अतिरिक्त नए नलकूप का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
डीके सैनी, मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग

- डीपीआर के लिए राशि मिल गई है, लेकिन आचार संहिता के कारण काम अब शुरू हो पाएगा। प्रोजेक्ट के लिए जल्द ही ईओआई जारी कर रहे हैं। डीपीआर और निविदा में करीब एक वर्ष का समय लगेगा।
रवि सोलंकी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग

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